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Ali Khamenei Death: जामिया नगर में आज खामेनेई की मौत पर प्रदर्शन देखने को मिला, जिसमें भारी संख्या में एकजुट होकर लोगों ने इजरायल-अमेरिका के खिलाफ जमकर नारेबाजी की है।

Jamia Protest Against Ali Khamenei Death: ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई की मौत की खबर फैलने के बाद आज 1 मार्च रविवार को कश्मीर के कई हिस्सों में प्रदर्शन शुरू हो गए हैं। इसके अलावा दिल्ली के जामिया नगर इलाके में भी भारी संख्या में लोग सड़कों पर उतर आए हैं। इस दौरान लोगों ने इजरायल और अमेरिका के खिलाफ जमकर नारेबाजी की है। प्रदर्शन के दौरान लोगो में भावुकता और गुस्सा दोनों देखने को मिला है।  

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, प्रदर्शन के दौरान लोगों ने इजरायल और अमेरिका के खिलाफ 'इजराइल मुर्दाबाद' और 'अमेरिका मुर्दाबाद' के नारे लगाए हैं। इस दौरान कई लोगों के हाथों में तख्तियां और बैनर लिए हुए दिखे, जिस पर विरोध वाले संदेश लिखे हुए थे। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वे ईरान के साथ एकजुटता दिखाने के उद्देश्य से आए थे।  

जामिया नगर और आसपास के इलाकों में प्रदर्शन में शामिल कुछ लोगों ने उस दौरान कहा कि ये केवल देश का मामला नहीं, बल्कि पूरी उम्मत और इंसाफ का सवाल है। उन्होंने उस दौरान कहा कि वे किसी तरह की हिंसा नहीं करना चाहते हैं, बल्कि शांतिपूर्ण तरीके से विरोध जता रहे हैं।

पुलिस ने लोगों से की अपील

स्थानीय लोगों ने यह भी कहा कि अंतरराष्ट्रीय मुद्दों को लेकर माहौल बिगड़े नहीं, इसका भी ध्यान रखना जरूरी है। हालांकि सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए जामिया नगर और आसपास के इलाकों में भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया है। पुलिस अधिकारियों ने लोगों से शांति बनाए रखने और कानून हाथ में न लेने की अपील की है। फिलहाल अभी किसी हिंसा की कोई सूचना नहीं है, हालात काबू में बताए जा रहे हैं। 

AIIA प्रेसिडेंट और जामा मस्जिद के इमाम ने क्या कहा ?

मीडिया से बात करते हुए ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली ख़ामेनेई की मौत पर शिया जामा मस्जिद के इमाम मौलाना मोहम्मद अली मोहसिन तकवी ने कहा कि, 'इंसानियत और देश की आज़ादी की चिंता करने वाला हर इंसान आज दुख मना रहा है। दुनिया बहुत बुरे दिन देख रही है। आज ईरान है, कल तुर्की हो सकता है, फिर सऊदी अरब भी हो सकता है।

ऑल इंडिया इमाम एसोसिएशन (AIIA) के प्रेसिडेंट साजिद रशीदी ने मीडिया से कहा कि 'अयातुल्ला खामेनेई सिर्फ़ शिया लीडर नहीं थे, वे सभी मुसलमानों के लीडर थे, दुनिया भर के मुसलमान उनकी मौत पर दुख मना रहे हैं, यह भी अपने आप में एक कामयाबी है, क्योंकि  उन्होंने शिया और सुन्नी के बीच की सारी रुकावटें तोड़ दीं और उनकी कोशिशों को हमेशा याद रखा जाएगा।' 

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