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Museums in Delhi 2024: दिल्ली में जल्द ही एक नया म्यूजियम बनने वाला है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहल पर भारत में 300 से अधिक पुरावशेष अमेरिका से वापस लाए गए। जिसे जल्द ही पुराने किले में देखा जा सकेगा। अमेरिका ने इस पुरावशेष को अलग-अलग हिस्सों में भारत को सौंप दिया था।

इन पुरावशेष में ज्यादातर मूर्तियां हैं। बता दें कि इन ऐतिहासिक मूर्तियों को पुराने किले में रखा जाएगा, जिसकी तैयारियां शुरू कर दी गई है।अप्रैल 2024 तक यहां म्यूजियम शुरू करने की भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने योजना बनाई है।

पुराने किले का इतिहास

दिल्ली के पुराने किले में पहले से भी इसी तरह का एक म्यूजियम है। जहां विदेश से वापस लाई गई कई मूर्तियों को रखा गया है। इस किले की बात करें, तो यह किला भी अपने आप में एक इतिहास है। साथ ही इसे महाभारत के समय का बताया जाता है। दिल्ली का यह पहला किला है, जिसका मुगलों से पहले का लंबा इतिहास है और इसका प्रमाण भी मौजूद है।

छह बार हुई पुराने किले में खुदाई

कहा जाता है कि पुराने किले के टीले पर बने महल से पांडवों ने अपनी सत्ता चलाई थी। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, यह वही स्थान है जहां पांडवों की राजधानी थी। इस किले को पांच हजार साल पुराना माना जाता है। इससे संबंधित साक्ष्य जुटाने के लिए पुराना किला में 1955 से अब तक छह बार खुदाई हुई है।

अभी तक खुदाई से करीब 3100 साल पहले से यहां बसावट के साक्ष्य मिल चुके हैं। अमेरिका से लाई गईं मूर्तियों की बात करें, तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहल पर न्यूयॉर्क में इंडियन कांसुलेट को कुछ साल पहले अमेरिकी अधिकारियों ने जो मूर्तियां लौटाई थीं, वे भारत आ चुकी हैं और दिल्ली के पुराने किले में पहुंचा दी गई हैं।

तस्करी के गिरोहों ने चुराई थी धरोहर

यह मूर्तियां ईसा पूर्व 2000 साल पुरानी है। इन्हें लौटाते हुए अमेरिका ने कहा था कि हमें भारत के लोगों को सैकड़ों आश्चर्यजनक धरोहर को वापस करने पर गर्व है। ये धरोहर कई जटिल तस्करी के गिरोहों द्वारा चुराई गई थी। अमेरिकी सरकार ने ये धरोहर, अंतरराष्ट्रीय तस्कर सुभाष कपूर की आर्ट गैलरी और अन्य आर्ट गैलरी के साथ तस्करी के कई नेटवर्क से बरामद की थी।

2000 ईसा पूर्व के पुरावशेष

अमेरिका से आई बहुत सी कलाकृतियां 11वीं शताब्दी से 14वीं शताब्दी के बीच की हैं। कुछ पुरावशेष 2000 ईसा पूर्व के भी हैं। टेराकोटा का एक फूलदान दूसरी शताब्दी का है। वहीं, 45 पुरावशेष ईसा पूर्व दौर के हैं। कांस्य संग्रह में मुख्य रूप से शिव पार्वती, लक्ष्मी नारायण, बुद्ध, विष्णु और 24 जैन तीर्थंकरों की प्रसिद्ध मुद्राओं की अलंकृत मूर्तियां हैं।

देवताओं के अलावा नंदीकेश की भी मूर्तियां, कंकलामूर्ति और ब्राह्मी शामिल है। इन कलाकृतियों में रथ पर आरूढ़ सूर्य, तीन सिर वाले ब्रह्मा, नृत्य करते गणेश की प्रतिमा और शिव की दक्षिणामूर्ति भी है। इसी तरह खड़े तारा की मूर्तियां, बुद्ध और बोधिसत्व मंजुश्री भी है। जैन धर्म की मूर्तियों में पद्मासन तीर्थंकर, जैन तीर्थंकर, जैन   ढोल बजाने वाली महिला और चौबीसी के साथ अनाकार युगल की मूर्ति शामिल हैं।