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एनआईए की विशेष अदालत ने आसिया अंद्राबी की दो सहयोगियो सोफी फहमीदा और नाहिदा नसरीन को भी 30 साल की सजा सुनाई है।

कश्मीरी अलगाववादी और दुख्तरान-ए-मिल्लत की प्रमुख आसिया अंद्राबी को यूएपीए मामले में दोषी पाया गया है। एनआईए की विशेष अदालत ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। आतंकी मामले में उसकी दो महिला सहयोगियों सोफी फहमीदा और नाहिदा नसरीन को भी 30 साल की सजा दी गई है। अंद्राबी कथित तौर पर महिलाओं के आतंकी संगठन दुख्तरान-ए-मिल्लत की प्रमुख हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अंद्राबी, फहमीदा और नाहिदा को 14 जनवरी को यूएपीए की धारा 20 (आतंकवादी गिरोह या आतंकवादी संगठन का सदस्य होने के लिए सजा), 38 (आतंकवादी संगठन की सदस्यता से संबंधित अपराध) और 39 (आतंकवादी संगठन का समर्थन करना) के तहत दोषी ठहराया गया था। इसके अलावा भारतीय दंड संहिता की धारा 153 ए, 153 बी, 120 बी, 505 और 121 ए के खिलाफ भी दोषी ठहराया गया था। 

अतिरिक्त सेशन्स जज चंद्र जीत सिंह ने आसिया अंद्राबी को 'गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम' (UAPA) के तहत दोषी ठहराकर आजीवन कारावास और उसकी सहयोगी सोफी फहमीदा और नाहिदा नसरीन को दोषी घोषित करते हुए 30 साल जेल की सजा सुनाई है।   

बता दें कि 64 वर्षीय आसिया अंद्राबी दुख्तरान-ए-मिल्लत की संस्थापक और प्रमुख है। यह अलगाववादी संगठन है, जो कि महिलाओं को केंद्रित करके बनाया गया है। इसे शुरू में सामाजिक और धार्मिक आंदोलन के तौर पर दर्शाया गया था, लेकिन 2018 में केंद्र सरकार ने इसकी गतिविधियों के मद्देनजर इस पर पूरे देश में प्रतिबंध लगा दिया था। अंद्राबी का जन्म 1963 में हुआ था। उन्होंने होम साइंस से स्नातक की पढ़ाई की थी। लेकिन उच्च पढ़ाई करने से पहले ही रुझान इस्लामी साहित्य की ओर हो गया।

इसके बाद जमात-ए-इस्लामी की महिला शाखा में शामिल हो गई। 1985 में अंद्राबी ने जमात-ए-इस्लामी से अलग होकर दुख्तरान-ए-मिल्लत का गठन किया। इस संगठन की पहचान 1991 में मिली, जब घाटी में महिलाओं के लिए बुर्का पहनना अनिवार्य किया गया। इससे पहले 1990 में आसिया ने आशिक हुसैन फकतू से निकाह पढ़ा था, जो कि एक अग्रवाली कमांडर है। वह भी इस समय आजीवन करावास की सजा काट रहा है। बच्चों की बात करें तो उसके दो बच्चे हैं। 

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