पंकज गुप्ते- बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के रायपुर के आमापारा की एक दुकान को लेकर चला पारिवारिक विवाद आखिरकार हाईकोर्ट तक पहुंचा, जहां बड़ा मोड़ आ गया। कोर्ट ने साफ कहा कि याचिकाकर्ता ने भले ही संपत्ति पर अपना मालिकाना हक साबित कर दिया हो, लेकिन किरायेदार- मालिक का रिश्ता साबित नहीं कर पाईं, इसलिए बेदखली की मांग खारिज की जाती है।
दरअसल, मामले में चौंकाने वाली बात यह रही कि कथित मालिक ने करीब 15 साल तक किराया नहीं मांगा और न ही कोई ठोस दस्तावेज पेश कर सकीं, जिससे यह साबित हो कि सामने वाले उनके किरायेदार हैं। रेंट कंट्रोल अथॉरिटी और ट्रिब्यूनल पहले ही इस आधार पर आवेदन खारिज कर चुके थे, जिसे हाईकोर्ट ने भी सही ठहराया और कहा कि सिर्फ सेल डीड होना काफी नहीं, किरायेदारी के ठोस सबूत जरूरी हैं।
कोर्ट ने की यह टिप्पणी
कोर्ट ने यह भी माना कि मामला पारिवारिक संपत्ति विवाद से जुड़ा है और इसका फैसला सिविल कोर्ट में लंबित टाइटल केस से तय होगा, इसलिए रिट में दखल देना उचित नहीं है। अंत में हाईकोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए पक्षकारों को सिविल अपील में अपना पक्ष रखने की छूट दे दी, जिससे साफ हो गया कि किराया विवाद से ज्यादा यह पारिवारिक संपत्ति का मामला है।









