Greater Noida News: ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने शहर के पर्यावरण को बेहतर बनाने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। रायपुर बांगर गांव के नजदीक लगभग 12 एकड़ भूमि पर घना जंगल विकसित किया जा रहा है। यह परियोजना जापानी मियावाकी वृक्षारोपण पद्धति पर आधारित है, जिसके तहत कम समय में घने और आत्मनिर्भर जंगल तैयार किए जा सकते हैं। पारंपरिक तरीकों से जंगल उगाने में कई दशक लग जाते हैं, लेकिन मियावाकी विधि से कुछ ही वर्षों में पौधे घने जंगल का रूप ले लेते हैं। इस क्षेत्र को ऑक्सीजन बैंक के रूप में विकसित किया जा रहा है, ताकि आसपास की आबादी को शुद्ध हवा मिल सके।
एक लाख देसी पौधे लगाए जाएंगे
इस वन क्षेत्र में कुल एक लाख देसी प्रजाति के पौधे लगाए जाएंगे। ये सभी पौधे स्थानीय जलवायु और मिट्टी के अनुकूल होंगे, जिससे वे बेहतर तरीके से बढ़ सकें और एक मजबूत पारिस्थितिकी तंत्र बना सकें। परियोजना को पीएनबी हाउसिंग फाइनेंस और कैच फाउंडेशन के सीएसआर फंड से वित्तीय सहायता मिल रही है। ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण की एसीईओ श्रीलक्ष्मी वीएस ने हाल ही में शनिवार को पौधरोपण करके इसकी शुरुआत की। प्राधिकरण के वरिष्ठ प्रबंधक (बागवानी) अजित पटेल के अनुसार, यह परियोजना शहरी क्षेत्रों में घने जंगलों को बढ़ावा देने के लिए मियावाकी विधि का उपयोग कर रही है। पौधों की घनत्व वाली रोपण प्रक्रिया से जंगल जल्दी विकसित होगा और प्राकृतिक रूप से खुद को बनाए रखेगा।
मियावाकी पद्धति के फायदे
मियावाकी पद्धति जापानी वनस्पतिशास्त्री अकिरा मियावाकी द्वारा विकसित की गई है। इसमें विभिन्न प्रजातियों के पौधों को बहुत करीब-करीब लगाया जाता है, जिससे वे आपस में प्रतिस्पर्धा कर तेजी से बढ़ते हैं। इससे 2-3 साल में ही 10-15 मीटर ऊंचे घने जंगल बन जाते हैं। इस विधि से लगाए गए जंगल में जैव विविधता बढ़ती है, मिट्टी की उर्वरता सुधरती है और वायु प्रदूषण कम होता है। ग्रेटर नोएडा में यह प्रयास शहरीकरण के बीच हरियाली बनाए रखने और निवासियों को स्वच्छ हवा प्रदान करने का एक बड़ा कदम है।
शहरवासियों को मिलेगी शुद्ध हवा
यह घना जंगल बनने के बाद रायपुर बांगर और आसपास के इलाकों में शुद्ध हवा उपलब्ध होगी। प्राधिकरण का लक्ष्य क्षेत्र के ग्रीन कवर को बढ़ाना है, जिससे प्रदूषण नियंत्रित रहे और पर्यावरण संतुलित बना रहे। परियोजना शुरू हो चुकी है और जल्द ही यह इलाका एक हरा-भरा मिनी फॉरेस्ट बन जाएगा। यह पहल अन्य शहरों के लिए भी प्रेरणादायक साबित हो सकती है, जहां मियावाकी विधि से छोटी-छोटी जगहों पर भी बड़े जंगल उगाए जा सकते हैं।










