Logo
Silver ETF OutFlow: चांदी की कीमतों में तेज़ उछाल के बीच फरवरी में सिल्वर ईटीएफ से 826 करोड़ रुपये की शुद्ध निकासी हुई। करीब 27 महीनों बाद पहली बार ईटीएफ से आउटफ्लो दर्ज किया गया।

Silver ETF Outflow: चांदी की कीमतों में तेज़ उछाल के बीच भारत में सिल्वर एक्सचेंज ट्रेडेड फंड से फरवरी में पहली बार बड़ी निकासी हुई। करीब 27 महीनों बाद ऐसा हुआ है, जब निवेशकों ने मुनाफावसूली करते हुए अपने पैसे वापस निकाले। कीमतों में तेज़ उछाल और बाजार की बढ़ती अस्थिरता को इसकी बड़ी वजह माना जा रहा।

आंकड़ों के मुताबिक फरवरी में Silver ETF में कुल 4628 करोड़ रुपये का निवेश आया, लेकिन इसी दौरान 5455 करोड़ रुपये की निकासी भी हुई। इस तरह महीने के अंत में 826.3 करोड़ रुपये का आउटफ्लो दर्ज हुआ। इससे पहले जनवरी में इन फंड्स में 9463.40 करोड़ रुपये का शुद्ध निवेश आया था। नवंबर 2023 के बाद यह पहला मौका है जब सिल्वर ETF से शुद्ध निकासी देखने को मिली है।

सिल्वर ईटीएफ से निवेशकों ने पैसे निकाले
दरअसल, पिछले कुछ महीनों से चांदी की कीमतों में लगातार तेज़ी बनी हुई है। फरवरी में चांदी करीब 10 प्रतिशत महंगी हुई, जबकि जनवरी में इसमें 19 प्रतिशत की उछाल आई थी। साल 2026 की शुरुआत से अब तक चांदी लगभग 20 फीसदी चढ़ चुकी है।

अगर पिछले साल के रुझान पर नजर डालें तो तेजी और भी बड़ी दिखती है। दिसंबर 2025 में चांदी 27 प्रतिशत बढ़ी थी, जबकि नवंबर में 16 प्रतिशत की तेजी आई थी। पूरे साल 2025 में चांदी ने करीब 148 प्रतिशत की जबरदस्त छलांग लगाई थी। इससे पहले 2024 में भी इसमें 22 प्रतिशत का उछाल आया था।

2025 में ईटीएफ में 23 हजार करोड़ का निवेश आया
बीते कुछ वर्षों में भारत में सिल्वर ईटीएफ में निवेशकों की दिलचस्पी काफी बढ़ी है। साल 2025 में इन फंड्स में 23472 करोड़ रुपये का निवेश आया था जबकि 2024 में यह आंकड़ा 8568 करोड़ रुपये रहा था। यानी निवेशकों की भागीदारी लगातार बढ़ती रही है।

विशेषज्ञों का मानना है कि 2025 में चांदी की कीमतें बहुत तेजी से बढ़ीं, इसलिए कई निवेशकों ने मुनाफावसूली करना बेहतर समझा। यही वजह है कि फरवरी में ETF से पैसा निकलता दिखा। इसके अलावा कुछ निवेशकों ने अपने निवेश का हिस्सा कीमती धातुओं से निकालकर शेयर बाजार की ओर भी शिफ्ट किया, क्योंकि हाल के समय में इक्विटी अपेक्षाकृत आकर्षक दिख रही थी।

उधर गोल्ड ईटीएफ में भी फरवरी में निवेश की रफ्तार धीमी पड़ी है। निवेशकों ने इस दौरान 5255 करोड़ रुपये लगाए, जो जनवरी 2026 में आए 24,039.96 करोड़ रुपये के निवेश से काफी कम है।

इस बीच बाजार नियामक सेबी ने फरवरी के अंत में एक अहम बदलाव भी किया। नए नियम के तहत अब म्यूचुअल फंड स्कीमों में रखे फिजिकल गोल्ड और सिल्वर का मूल्यांकन घरेलू बाजार की स्पॉट कीमतों के आधार पर किया जाएगा।

पहले इनकी कीमत तय करने के लिए लंदन बुलियन मार्केट एसोसिएशन के इंटरनेशनल फिक्सिंग प्राइस का इस्तेमाल किया जाता था, जिसमें मुद्रा विनिमय, आयात शुल्क और स्थानीय लागत को जोड़कर कीमत तय होती थी। नए नियम से घरेलू बाजार की कीमतों को ज्यादा महत्व मिलेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले महीनों में चांदी की कीमतों में कुछ समय के लिए कंसोलिडेशन देखने को मिल सकता है। हालांकि मध्यम अवधि में फिर से तेजी की संभावना से इनकार नहीं किया जा रहा।

(प्रियंका कुमारी)

5379487