मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और वैश्विक सप्लाई में रुकावट के बीच भारत सरकार ने प्राकृतिक गैस की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए बड़ा फैसला लिया है। केंद्र सरकार ने आवश्यक वस्तु अधिनियम (ECA), 1955 के तहत नैचुरल गैस (सप्लाई रेगुलेशन) ऑर्डर, 2026 जारी किया है, ताकि देश में घरेलू गैस की निष्पक्ष और सुचारु आपूर्ति बनी रहे।
यह आदेश मिनिस्ट्री ऑफ पेट्रोलियम एंड नेचुरल गैस ने 9 मार्च को अधिसूचित किया। इसका मकसद घरेलू रसोई गैस और अन्य जरूरी क्षेत्रों के लिए गैस की सप्लाई को बाधित होने से बचाना है।
सरकार का यह कदम ऐसे समय आया है जब मध्य पूर्व में जारी संघर्ष के कारण गैस और ईंधन की वैश्विक सप्लाई प्रभावित हुई है। खासतौर पर होर्मुज स्ट्रेट के रास्ते आने वाली आपूर्ति में बाधा की आशंका बढ़ गई है, जिससे भारत के आयात पर असर पड़ सकता है।
The Ministry of Petroleum and Natural Gas has issued the Natural Gas (Supply Regulation) Order, 2026, invoking the Essential Commodities Act to ensure uninterrupted supply of domestic cooking gas amid disrupted LNG shipments through the Strait of Hormuz pic.twitter.com/Fj9tv7rEPp
— IANS (@ians_india) March 10, 2026
सरकार ने ECA लागू किया
सरकारी आदेश के मुताबिक अब कुछ सेक्टरों को प्राकृतिक गैस की सप्लाई में प्राथमिकता दी जाएगी। इनमें घरेलू पाइप्ड नेचुरल गैस, परिवहन के लिए कंप्रेस्ड नेचुरल गैस, एलपीजी उत्पादन और पाइपलाइन संचालन से जुड़े जरूरी काम शामिल हैं। इन सेक्टरों को पिछले छह महीनों की औसत खपत के 100 प्रतिशत तक गैस उपलब्ध कराने की कोशिश की जाएगी, बशर्ते संचालन की स्थिति अनुमति दे।
क्या होता है जरूरी वस्तु अधिनियम?
आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 सरकार को उन वस्तुओं के उत्पादन, आपूर्ति, डिस्ट्रीब्यूशन और व्यापार को नियंत्रित करने का अधिकार देता है, जिन्हें वह आवश्यक मानती है। इसका मकसद यह पक्का करना है कि आम जनता के लिए जरूरी चीजें सही मात्रा और वाजिब कीमत पर उपलब्ध हों। जब सरकार को लगता है कि किसी वस्तु की जमाखोरी हो रही है या इंटरनेशनल परिस्थितियों के कारण उसकी कमी हो सकती है, तो वह इस कानून को लागू कर देती।
फर्टिलाइजर उद्योग के लिए भी गैस मुहैया कराई जाएगी
इसके अलावा उर्वरक उद्योग के लिए भी गैस की आपूर्ति सुनिश्चित करने का प्रावधान किया गया है। आदेश के मुताबिक उर्वरक संयंत्रों को उनकी पिछली छह महीने की औसत खपत के 70 प्रतिशत तक गैस सप्लाई दी जाएगी। दूसरी ओर चाय उद्योग, मैन्युफैक्चरिंग और अन्य औद्योगिक उपभोक्ताओं को राष्ट्रीय गैस ग्रिड के जरिए उनकी औसत खपत के 80 प्रतिशत तक गैस उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है।
ऑयल रिफाइनरी को LPG उत्पादन बढ़ाने के निर्देश
इसी के साथ सरकार ने तेल रिफाइनरियों को एलपीजी उत्पादन बढ़ाने के निर्देश भी दिए हैं। अतिरिक्त उत्पादन को खास तौर पर घरेलू एलपीजी जरूरतों के लिए इस्तेमाल किया जाएगा।
घरेलू गैस सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकता
सरकार ने यह भी साफ किया है कि मौजूदा भू-राजनीतिक हालात को देखते हुए घरेलू रसोई गैस की सप्लाई को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। जमाखोरी और कालाबाजारी रोकने के लिए एलपीजी सिलेंडर की बुकिंग के बीच 25 दिन का अंतराल लागू किया गया है। आयातित एलपीजी से होने वाली गैर-घरेलू सप्लाई में भी प्राथमिकता तय की गई है। अस्पताल और शैक्षणिक संस्थानों जैसे आवश्यक संस्थानों को पहले गैस उपलब्ध कराई जाएगी।
रेस्तरां, होटल और अन्य उद्योगों को एलपीजी सप्लाई से जुड़े मामलों की समीक्षा के लिए तेल विपणन कंपनियों के तीन कार्यकारी निदेशकों की एक समिति भी बनाई गई है। यह समिति जरूरत के हिसाब से सप्लाई पर फैसला करेगी। सरकार का मानना है कि इन कदमों से मौजूदा वैश्विक संकट के बावजूद देश में गैस और एलपीजी की उपलब्धता बनाए रखने में मदद मिलेगी।
(प्रियंका कुमारी)









