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Gold-Silver Prices: अमेरिका-ईरान तनाव के बावजूद सोना करीब 5.7% और चांदी लगभग 9% गिर गई है। मजबूत डॉलर, मुनाफावसूली और अमेरिकी बॉन्ड में निवेश बढ़ने से सोने पर दबाव बना है। बाजार को फिलहाल नहीं लगता कि संघर्ष लंबा वैश्विक युद्ध बनेगा, इसलिए सुरक्षित निवेश की मांग सीमित है।

Gold-Silver Prices:अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव के बावजूद सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट ने निवेशकों को चौंका दिया है। आमतौर पर युद्ध या वैश्विक संकट के समय इन कीमती धातुओं में तेज उछाल देखने को मिलता है, लेकिन इस बार तस्वीर उलटी नजर आ रही।

करीब 10 दिन पहले जब अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर सैन्य हमले शुरू किए थे, तब अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना करीब 5416 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार कर रहा था। लेकिन जैसे-जैसे संघर्ष बढ़ा, सोना मजबूत होने की बजाय कमजोर पड़ता गया। 9 मार्च को दोपहर करीब 1:30 बजे सोना 5103 डॉलर प्रति औंस के आसपास पहुंच गया, यानी करीब 5.7% की गिरावट।

भारत में भी यही ट्रेंड देखने को मिला। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज पर 28 फरवरी को सोना करीब 1.67 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के आसपास था, जो अब घटकर लगभग 1.60 लाख रुपये पर आ गया। यानी घरेलू बाजार में भी करीब 4.2% की गिरावट दर्ज की गई है।

चांदी हफ्ते भर में 9 फीसदी गिरी
चांदी में गिरावट और भी तेज रही। एमसीएक्स पर 28 फरवरी को चांदी करीब 2.89 लाख रुपये प्रति किलो थी, जो 9 मार्च तक गिरकर लगभग 2.63 लाख रुपये प्रति किलो पर आ गई। यानी सिर्फ एक हफ्ते में करीब 9% की गिरावट।

मजबूत डॉलर बना सबसे बड़ा कारण
विशेषज्ञों के मुताबिक इस गिरावट की सबसे बड़ी वजह अमेरिकी डॉलर की मजबूती है। पश्चिम एशिया में जब भी तनाव बढ़ता है और कच्चे तेल की कीमतें ऊपर जाती हैं, तब डॉलर की मांग भी बढ़ जाती है क्योंकि तेल का ज्यादातर व्यापार डॉलर में ही होता है। डॉलर मजबूत होने से सोने की कीमतों पर दबाव आता है।

मुनाफावसूली भी दबाव बना रही
एक्सपर्ट्स का कहना है कि पिछले कुछ महीनों में सोने-चांदी में तेज रैली आ चुकी थी। ऐसे में युद्ध की खबर के बाद कई निवेशकों ने मुनाफा वसूलना शुरू कर दिया। कोटक म्यूचुअल फंड के फंड मैनेजर सतीश डोंडापाटी के अनुसार, जब कीमतें तेजी से बढ़ती हैं तो निवेशक अक्सर लाभ बुक कर लेते हैं, जिससे बाजार में अस्थायी गिरावट आती है।

निवेशकों के पास बढ़े विकल्प
पहले ज्यादातर निवेशक संकट के समय सिर्फ सोने को सुरक्षित निवेश मानते थे। लेकिन अब स्थिति बदल गई है। निवेशक अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड, डॉलर आधारित एसेट्स और ऊर्जा सेक्टर में भी पैसा लगा रहे। इससे सुरक्षित निवेश की मांग कई हिस्सों में बंट गई है।

शेयर बाजार की गिरावट का भी असर
जब शेयर बाजार में तेज गिरावट आती है तो कुछ निवेशक नकदी जुटाने के लिए सोना भी बेच देते हैं। हाल ही में सेंसेक्स और निफ्टी में करीब 1.7% की गिरावट देखने को मिली, जिससे भी सोने की कीमतों पर दबाव पड़ा।

ऊंची ब्याज दरें भी रोक रहीं तेजी
ऊंची वैश्विक ब्याज दरों की वजह से भी सोने की तेजी सीमित हो रही है। जब अमेरिकी बॉन्ड यील्ड बढ़ती है तो निवेशक बिना जोखिम वाले ब्याज देने वाले एसेट्स को ज्यादा पसंद करते हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह संकट 2022 के रूस-यूक्रेन युद्ध से अलग है। उस समय डॉलर और बॉन्ड यील्ड इतने मजबूत नहीं थे। अब बाजार ज्यादा विविध और तरल है, इसलिए निवेशक कई अलग-अलग एसेट्स में पैसा लगा रहे हैं।

कुछ विश्लेषकों का यह भी मानना है कि फिलहाल बाजार को लगता है कि यह संघर्ष सीमित दायरे में रह सकता है और लंबा वैश्विक युद्ध नहीं बनेगा। इसी वजह से सोने में घबराहट वाली खरीदारी नहीं दिख रही।
(प्रियंका कुमारी)

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