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इन सर्विस डॉक्टरों को अब पीजी की पढ़ाई करने के लिए तीन साल का अध्ययन अवकाश मिलेगा। इसका लाभ 2025 के बाद आवेदन देने वाले उन सभी डॉक्टरों को मिलेगा।

रायपुर। इन सर्विस डॉक्टरों को अब पीजी की पढ़ाई करने के लिए तीन साल का अध्ययन अवकाश मिलेगा। इसका लाभ 2025 के बाद आवेदन देने वाले उन सभी डॉक्टरों को मिलेगा, जो सीएमई अथवा सीएचएस के अंतर्गत अपनी सेवाएं देते हैं। इसके पूर्व उच्च शिक्षा के लिए छुट्टी दो साल मिलती थी और एक साल डॉक्टरों को बिना स्टाइपेंड के काम करना पड़ता था।

पिछले साल मार्च महीने में अध्ययन अवकाश को दो के बजाय तीन महीने करने आदेश जारी किया गया था, जो कई बिंदुओं पर स्पष्ट नहीं था। 6 अप्रैल 2026 को जारी किए गए आदेश में स्पष्ट किया गया है कि जिन चिकित्सा छात्रों ने 3 मार्च 2025 के बाद अध्ययन अवकाश के लिए आवेदन किया है, उन्हें इसका लाभमिलेगा। साथ ही आयुक्त चिकित्सा शिक्षा और आयुक्त स्वास्थ्य सेवाएं के अंतर्गत काम करने वाले तमाम शासकीय सेवारत डॉक्टरों को इसका लाभ दिया जाएगा।

2019 के बाद शुरू हुई समस्या
एमबीबीएस की पढ़ाई के बाद कई स्नातकोत्तर विषयों में दो साल का डिप्लोमा होता था। वर्ष 2019 में सभी डिप्लोमा विषयों को तीन वर्षीय स्नातक के रूप में मान्य कर दिया गया। इसके बाद अध्ययन अवकाश को दो साल के बजाय तीन साल करने की जरूरत पड़ी, क्योंकि दो साल के अवकाश के बाद तीसरे साल छात्रों को बिना शिष्यवृति के पढ़ाई करनी पड़ती थी, जिससे उन्हें आर्थिक समस्या का सामना करना पड़ता था। इस परेशानी के बाद तीन साल के अध्ययन अवकाश का लाभदेने की मांग ने जोर पकड़ा था।

छात्रहित में बड़ा निर्णय एक वर्ग अभी वंचित
शासन द्वारा जारी किए गए इस आदेश की छत्तीसगढ़ डॉक्टर फेडरेशन और जूनियर डॉक्टर एसोसिएशन ने छात्रहित में लिया बड़ा निर्णय बताया है। सीजीडीएफ के अध्यक्ष डॉ. हीरा सिंह लोधी ने कहा कि यह हमारे संगठन के निरंतर प्रयास, संवाद और दृढ़ संकल्प का परिणाम है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अभी भी एक महत्वपूर्ण वर्ग इस निर्णय के लाभसे वंचित है। वर्ष 2025 से पूर्व उच्च शिक्षा (पीजी) हेतु अध्ययन अवकाश पर गए नियमित चिकित्सकों को इस संशोधित नीति का लाभ नहीं मिल पाया है। जूनियर डॉक्टर एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. रेशम सिंह ने कहा कि इससे राज्य शासन से आग्रह किया है कि इस विषय में शीघ्र सकारात्मक निर्णय लेते हुए पूर्व में अध्ययन अवकाश पर गए चिकित्सकों के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए जाएं और उन्हें उचित राहत प्रदान की जाए।

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