पंकज गुप्ते-बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने बहुचर्चित हत्या कै मामले में अहम फैसला सुनाते हुए आरोपी कुसुम लाल साव की उम्रकैद की सजा को बरकरार रखा है। कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि, मामले में मौजूद परिस्थितिजन्य साक्ष्य, मेडिकल रिपोर्ट, इलेक्ट्रॉनिक डेटा और आरोपी के व्यवहार से जुड़ी कड़ियां पूरी तरह जुड़ती हैं और यही आरोपी के दोषी होने की पुष्टि करती हैं।
दरअसल मामला सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के बरमकेला थाना क्षेत्र का है, जहां 2019 में सौरभ पांडा की लाश खेत में मिली थी। जांच में सामने आया कि, मृतक की हत्या कर शव को दूसरे स्थान पर फेंका गया था। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में सिर पर गंभीर चोट को मौत की वजह बताया गया और इसे हत्या करार दिया गया। जांच के दौरान आरोपी के घर से खून लगे कपड़े, लोहे के औजार और अन्य सामान बरामद किए गए थे। साथ ही व्हाट्सएप मैसेज, कॉल डिटेल और साइबर साक्ष्यों से यह भी सामने आया कि, घटना की रात आरोपी और मृतक के बीच विवाद हुआ था और आखिरी बार दोनों साथ देखे गए थे।
अपराध छिपाने की कोशिश की
हाईकोर्ट ने कहा कि, आरोपी के शरीर पर चोट के निशान, हत्या के बाद शव को खेत में फेंकना और हथियार छिपाना इस बात के स्पष्ट संकेत हैं कि, उसने अपराध छिपाने की कोशिश की। कोर्ट ने माना कि, इन सभी परिस्थितियों की कड़ी आरोपी के खिलाफ मजबूत और पूर्ण है, जिससे कोई संदेह नहीं बचता। ट्रायल कोर्ट ने पहले ही आरोपी को IPC की धारा 302 और 201 के तहत दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी।
बरकरार रखी सजा
हाईकोर्ट ने इस फैसले को सही ठहराते हुए आरोपी की अपील खारिज कर दी और सजा को यथावत रखा। कोर्ट ने अपने आदेश में यह भी कहा कि, कुछ गवाहों के मुकरने या छोटे विरोधाभास होने से पूरा मामला कमजोर नहीं होता, अगर बाकी साक्ष्य मजबूत और विश्वसनीय हों। आरोपी को अब सजा पूरी करनी होगी, हालांकि उसे सुप्रीम कोर्ट में अपील करने की स्वतंत्रता दी गई है।









