राजनांदगांव। जब बच्चे बोलते हैं, तो बदलाव की शुरुआत होती है। इसी सोच के साथ राजनांदगांव जिले के जंगलपुर स्थित शासकीय माध्यमिक शाला में राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने बाल चौपाल का आयोजन किया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य बच्चों को उनके अधिकारों, कर्तव्यों, शिक्षा, स्वास्थ्य और सुरक्षा के प्रति जागरूक करना था। बाल चौपाल के दौरान बच्चों ने खुलकर अपने विचार रखे और बेझिझक विभिन्न विषयों पर सवाल पूछे।
कार्यक्रम में बच्चों ने खास तौर पर नशे के खिलाफ कैसे लड़ाई लड़ी जाए, इस विषय पर अपनी चिंता और जिज्ञासा व्यक्त की। साथ ही विद्यालय और शिक्षा से जुड़ी समस्याओं को भी छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा के सामने रखा। डॉ. शर्मा ने बच्चों की बातों को गंभीरता से सुना और उपस्थित अधिकारियों को बेहतर संसाधन उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।

बच्चों को अधिकारों के प्रति जागरूक करने का प्रयास
इस पहल के माध्यम से बाल सहभागिता को बढ़ावा देने का प्रयास किया गया, ताकि बच्चे अपने अधिकारों के प्रति जागरूक होने के साथ आत्मविश्वास से अपनी बात रख सकें। डॉ. वर्णिका शर्मा के मार्गदर्शन में आयोजित यह संवाद आधारित कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। वे बच्चों के सर्वांगीण विकास और संरक्षण के लिए लगातार ऐसे जन-जागरूकता कार्यक्रमों को प्रोत्साहित कर रही हैं।
पालक बच्चों को दें समय : करुणा मधुसूदन यादव
आयोजन में उपस्थित शहर की प्रथम महिला नागरिक करुणा मधुसूदन यादव ने पालकों से विशेष रूप से अपील करते हुए कहा कि, प्रत्येक माता-पिता अपने बच्चों को जो सबसे अच्छी विरासत दे सकते हैं, वह हैं अपने हरदिन की व्यस्ततम दिनचर्या में से फुर्सत के कुछ पल, जो बच्चों के लिये जीवन भर यादगार रहते हैं। उन्होंने आयोग की इस पहल की सराहना करते हुए भविष्य में भी ऐसे आयोजनों की आवश्यकता पर बल दिया और बच्चों के उज्ज्वल भविष्य के लिए हरसंभव सहयोग का आश्वासन दिया।

समाजसेवी सिद्धि मिरानी ने दी जानकारी
कार्यक्रम में समाजसेवी सिद्धि मिरानी ने बच्चों को स्वास्थ्य संबंधी महत्वपूर्ण जानकारी दी। आयोजन में ग्राम जंगलपुर के स्थानीय समाजसेवी, नेतागण एवं ग्रामवासी केजादास साहू, जानीवाकर साहू, लक्ष्मण साहू, चन्दूलाल साहू, संतोष चौबे, लोमनदास साहू, ताम्रध्वज साहू, विनोद साहू, दीपिका साहू, सूर्यकांत साहू, तांकाराम साहू एवं अन्य उपस्थित रहे। बाल चौपाल का मुख्य उद्देश्य बच्चों की झिझक और संकोच को दूर कर उनके सर्वांगीण विकास को बढ़ावा देना रहा, ताकि वे आत्मविश्वास के साथ समाज में अपनी पहचान बना सकें।









