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दिन में आस्था और संस्कृति से सजा राजिम मेला रात होते ही अव्यवस्था, नशाखोरी और सुरक्षा संकट के साये में आ जाता है, जिससे परिवार खासकर महिलाएं असहज महसूस कर रही हैं।

श्यामकिशोर शर्मा - राजिम। माघ पूर्णिमा से महाशिवरात्रि तक चलने वाला पंद्रह दिवसीय राजिम मेला दिन में आस्था, संस्कृति और सामाजिक सहभागिता का जीवंत प्रतीक दिखाई देता है। लेकिन जैसे ही शाम ढलती है, वातावरण बदल जाता है और मेले का दूसरा, चिंताजनक चेहरा सामने आने लगता है। 
स्थानीय लोगों और आगंतुकों की मानें तो रात के समय नशे में धुत युवकों की भीड़, अव्यवस्थित यातायात और महिलाओं की सुरक्षा को लेकर बढ़ती चिंता ने इस परंपरागत मेले की छवि पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

दिन का दृश्य: आस्था और संस्कृति का भव्य संगम
दिन के समय राजिम मेला श्रद्धालुओं से भरा रहता है। मंदिरों में दर्शन के लिए लंबी कतारें लगती हैं, सामाजिक संस्थाएं नि:शुल्क भोजन और सेवा कार्यों में जुटी रहती हैं। लोक कलाकारों की सांस्कृतिक प्रस्तुतियां माहौल को जीवंत करती हैं और परिवारों के लिए मीना बाजार आकर्षण का केंद्र बना रहता है।

Rajim fair

रात का बदलता माहौल: असुरक्षा का साया
जैसे ही रात होती है, मेले का दृश्य बदलने लगता है। मीना बाजार, पार्किंग क्षेत्र और आसपास के सड़कों पर नशे में धुत युवक सक्रिय हो जाते हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि खुलेआम हुड़दंग, वाहन दौड़ाने और अभद्र व्यवहार की वजह से माहौल असुरक्षित हो जाता है। कई प्रत्यक्षदर्शियों ने दावा किया कि आधे से ज्यादा लोग नशे की हालत में दिखते हैं, जिससे किसी बड़े हादसे की आशंका बनी रहती है।

शराबबंदी पर सवाल: नशा मेले तक कैसे पहुंच रहा?
राजिम-नवापारा और आसपास के क्षेत्रों में शराबबंदी लागू होने का दावा किया जाता है, लेकिन मेले में बड़ी संख्या में नशे में लोगों की मौजूदगी ने व्यवस्था पर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं। लोग पूछ रहे हैं कि, जब क्षेत्र में शराबबंदी है, तो नशे के पदार्थ मेले परिसर तक कैसे पहुंच रहे हैं? यह सवाल आम चर्चा में प्रमुखता से उभर रहा है।

Rajim fair in night

महिलाओं की सुरक्षा पर बढ़ती चिंता
शाम ढलते ही महिलाओं और युवतियों के लिए मेले का वातावरण असहज होता जा रहा है। भीड़ में धक्का-मुक्की, नशे में युवकों की हरकतें और कुछ असामाजिक तत्वों की मौजूदगी ने बेटियों और परिवारों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। कई परिवार अब रात के समय मेले में जाने से बच रहे हैं।

ट्रैफिक अव्यवस्था और तेज रफ्तार वाहन
पार्किंग और मुख्य मार्गों पर वाहनों की अव्यवस्थित आवाजाही एक बड़ा खतरा बन गई है। तेज रफ्तार मोटरसाइकिलें और भीड़ के बीच से गुजरते वाहन किसी गंभीर हादसे को निमंत्रण दे रहे हैं, वहीं स्थानीय लोगों का कहना है कि पुलिस की तैनाती है, लेकिन भीड़ के अनुपात में निगरानी बहुत कम है।

Rajim mela traffic

सुरक्षा मजबूत करने की जरूरत: जनता की मांग
जनता ने प्रशासन और पुलिस के लिए कुछ स्पष्ट मांगें रखी हैं-

  • रात में अतिरिक्त पुलिस गश्त
  • मीना बाजार और पार्किंग एरिया में विशेष सुरक्षा घेरा
  • नशाखोरी पर सख्त जांच और तत्काल कार्रवाई
  • तेज रफ्तार वाहनों पर तुरंत चालानी कार्रवाई
  • महिलाओं के लिए अलग हेल्प डेस्क और त्वरित सहायता व्यवस्था
  • सीसीटीवी की सक्रिय मॉनिटरिंग और संदिग्धों पर कार्रवाई

लोगों का कहना है कि राजिम मेला आस्था और सांस्कृतिक पहचान का उत्सव है इसे अराजकता के साये में नहीं जाना चाहिए।

आस्था की छवि पर अराजकता का खतरा
राजिम मेला सदियों से सांस्कृतिक, धार्मिक और पारिवारिक परंपरा का प्रतीक रहा है। परंतु रात के समय बढ़ती अव्यवस्था और नशे का माहौल इसकी सकारात्मक छवि को नुकसान पहुंचा रहा है। अब आवश्यकता है कि प्रशासन ठोस कदम उठाए, ताकि मेला अपनी असली गरिमा, सुरक्षा और पारिवारिक माहौल के साथ चमकता रहे।

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