भोपाल। मध्य प्रदेश के वन विभाग में उस समय हलचल मच गई जब 2013 बैच के भारतीय वन सेवा (आईएफएस) के अधिकारी विपिन कुमार पटेल ने पिछले दिनों अचानक इस्तीफा दे दिया। उन्होंने अपना इस्तीफा आईएफएस एसोसिएशन के व्हाट्सएप ग्रुप में भी साझा किया था, जिसकी वजह से यह मामला तुरंत सामान्य चर्चाओं में आ गया। इस्तीफे की जानकारी सामने आने के बाद वन विभाग ने उन्हें तीन दिन के भीतर अपना पक्ष स्पष्ट करने का नोटिस जारी किया है।
विभाग का कहना है कि यदि तय समय से जवाब नहीं दिया गया तो उनके खिलाफ एकतरफा कार्रवाई की जा सकती है। नोटिस भेजे जाने के बाद से अधिकारी किसी के कॉल का जवाब नहीं दे रहे हैं, जिससे स्थिति और गंभीर हो गई है। विपिन कुमार पटेल ने अपना त्यागपत्र प्रधान मुख्य वन संरक्षक और वन बल प्रमुख, मध्य प्रदेश को संबोधित करते हुए भेजा था। साथ ही इसकी प्रति राज्य शासन के वन सचिव को भी भेजी गई थी।
हालांकि, उन्होंने इस्तीफे में केवल व्यक्तिगत कारणों का उल्लेख किया है, पर इन कारणों के बारे में कोई विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं की है। पटेल रीवा, दमोह, सतना और अनूपपुर जैसे जिलों में संभागीय वन अधिकारी (डीएफओ) के रूप में कार्य कर चुके हैं। वर्तमान में वे जबलपुर में डीएफओ (वर्किंग प्लान) हैं। उनके अनुभव और जिम्मेदारियों को देखते हुए उनका अचानक इस्तीफा प्रशासन के लिए गंभीर चिंता का विषय बन गया है।
यह समझना जरूरी है कि भारतीय वन सेवा एक अखिल भारतीय सेवा है। ऐसे में किसी आईएफएस अधिकारी का इस्तीफा सीधे राज्य सरकार द्वारा स्वीकार नहीं किया जा सकता। राज्य स्तर पर प्रक्रिया पूरी करने के बाद प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा जाता है, और अंतिम निर्णय वहीं से लिया जाता है। जब तक केंद्र सरकार औपचारिक स्वीकृति नहीं देती, तब तक इस्तीफा प्रभावी नहीं माना जाता।
(एपी सिंह)











