अंगेश हिरवानी - नगरी। धमतरी जिले के सिहावा विधानसभा क्षेत्र स्थित वनांचल एवं टाइगर रिजर्व क्षेत्र में बसे ग्राम पंचायत खल्लारी के आश्रित ग्राम गाताबहारा में शिक्षा और बुनियादी सुविधाओं की भयावह स्थिति सामने आई है। आजादी के दशकों बाद भी मासूम बच्चे और ग्रामीण मूलभूत अधिकारों से वंचित हैं। गांव में प्राथमिक शाला के लिए पक्का भवन न होने के कारण बच्चे आज भी अस्थायी झोपड़ी में शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं।
बच्चों की पढ़ाई पर गंभीर असर
गाताबहारा में बच्चों के पढ़ने के लिए लकड़ी के चार खंभों पर टिका एक अस्थायी ढांचा बनाया गया है, जिसके ऊपर सिर्फ सफेद प्लास्टिक की झिल्ली डाली गई है। यह झिल्ली न गर्मी में धूप से बचा पाती है और न ही बारिश में पानी से। गर्मी की सीधी किरणें बच्चों के स्वास्थ्य को प्रभावित कर रही हैं। बरसात में स्कूल की पूरी पढ़ाई ठप हो जाती है। यह स्थिति न सिर्फ बच्चों की शिक्षा बल्कि उनके मानसिक और शारीरिक विकास पर भी प्रतिकूल असर डाल रही है।
जंगल में जान का खतरा
गाताबहारा घना वन क्षेत्र होने के कारण यहां जंगली जानवरों की आवाजाही आम बात है। हाल ही में गांव में एक मासूम बच्चा घर के आंगन से जंगली जानवर द्वारा उठा लिया गया था, जिसकी लाश एक किलोमीटर दूर जंगल में मिली। ऐसे वातावरण में खुले और असुरक्षित स्थान पर बच्चों की पढ़ाई होना प्रशासनिक लापरवाही का स्पष्ट संकेत है।
बिजली, सड़क और स्वास्थ्य से वंचित ग्रामीण
- गांव में आज तक बिजली नहीं पहुंची है।
- बच्चे रात में चिमनी की रोशनी में पढ़ते हैं।
- गाताबहारा तक न पक्की सड़क है, न पुल-पुलिया।
- स्वास्थ्य सुविधाओं का पूरी तरह अभाव है।
जिससे किसी भी दुर्घटना या बीमारी की स्थिति में ग्रामीण गंभीर संकट में फंस जाते हैं। यह हालात साबित करते हैं कि यह क्षेत्र अब भी विकास की मुख्यधारा से कोसों दूर है।
ग्रामीणों की पीड़ा: हम अब भी आदिकाल जैसा जीवन जी रहे हैं
हमारे संवाददाता के स्थल दौरे के दौरान ग्रामीणों ने खुलकर अपनी परेशानी बताई और कहा 'यहां हमारी सुध लेने वाला कोई नहीं है। नेता चुनाव के समय आते हैं और बाद में हमें भूल जाते हैं।'
ग्रामीणों की प्रशासन से निम्न मांगें
- तत्काल पक्का स्कूल भवन का निर्माण
- बिजली और सड़क सुविधा प्रदान की जाए
- प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र या मोबाइल स्वास्थ्य सेवा की व्यवस्था
- जंगली जानवरों से सुरक्षा के लिए ठोस कदम
बच्चों के भविष्य पर बड़ा सवाल
गाताबहारा की यह स्थिति न सिर्फ शिक्षा के मौलिक अधिकार का उल्लंघन है, बल्कि मासूमों के भविष्य और जीवन के साथ गंभीर अन्याय भी है। अब जिम्मेदार विभाग इस संवेदनशील मुद्दे पर कब कार्रवाई करते हैं, यह देखने वाली बात होगी।