अंगेश हिरवानी - नगरी। आमतौर पर शैक्षणिक भ्रमण का मतलब होता है औपचारिक प्रस्तुतियाँ और चर्चाएँ, लेकिन डाइट नगरी में हुआ कार्यक्रम इन सीमाओं से कहीं आगे निकला। रायपुर से आए लगभग 300 प्राध्यापक, प्रशिक्षणार्थी और शिक्षणकर्मियों का स्वागत न केवल शब्दों से, बल्कि स्थानीय संस्कृति की सौंधी सुगंध से किया गया जहाँ शिक्षा तवे पर सिकती पान-रोटी की तरह जीवंत नजर आई।
पारंपरिक पान-रोटी बनी संवाद का केंद्र
शैक्षणिक गतिविधियों और नवाचारों के बीच पारंपरिक पान-रोटी ने अनायास ही पूरे कार्यक्रम में नई ऊर्जा भर दी। शिक्षिका रंजिता साहू ने प्रशिक्षणार्थियों को इसकी व्यवहारिक विधि सिखाई और खास बात यह रही कि उसी प्रशिक्षण में बनी रोटियाँ अतिथियों को परोसी भी गईं, जिससे सीखने की प्रक्रिया पूरी तरह अनुभवात्मक बन गई। साहू दंपत्ति, तुमनचंद साहू और रंजिता साहू ने बताया कि पान-रोटी सिर्फ स्वाद नहीं, बल्कि स्थानीय संसाधनों से पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी देती है। ग्रामीण क्षेत्रों में यह स्वरोजगार का सशक्त माध्यम बन सकती है।
नगरी के डाइट में आयोजित शैक्षणिक भ्रमण में पान-रोटी, जैविक खेती और नवाचारों का अनोखा संगम देखने को मिला, जहाँ शिक्षा ने संस्कृति का हाथ थाम लिया।@DhamtariDist #Nagri #educationaltour #paanroti pic.twitter.com/oEhHcZMlEE
— Haribhoomi (@Haribhoomi95271) February 19, 2026
जैविक खेती प्रदर्शनी बनी आकर्षण का केंद्र
कार्यक्रम स्थल पर लगी जैविक खेती की प्रदर्शनी ने आगंतुकों का विशेष ध्यान खींचा। 'गुल्लक' अवधारणा के अंतर्गत-
- गुल्लक मॉडल
- नदियों की वर्णमाला
- गणित वर्णमाला चार्ट
- अन्य नवाचारी शिक्षण सामग्री
प्रस्तुत की गई। प्रशिक्षणार्थियों को शिक्षण-सहायक चार्ट भी वितरित किए गए ताकि व्यावहारिक शिक्षा और मजबूत हो सके।
स्थानीय संसाधनों से निर्मित स्मृति चिन्ह
संस्था प्रमुख प्रकाश राय और उप प्राचार्य रामनाथ साहू ने शिक्षक शिक्षा महाविद्यालय Raipur के दल को पैरा से निर्मित स्मृति चिन्ह भेंट किया।
यह स्मृति चिन्ह डी.एड. प्रथम वर्ष के छात्राध्यापक पंकज साहू द्वारा तैयार किया गया था, जिसने स्थानीय कौशल और रचनात्मकता को उत्कृष्ट रूप से प्रदर्शित किया।

भावी शिक्षकों को प्रेरणा
कार्यक्रम प्रभारी डॉ. लता मिश्रा ने सभी भावी शिक्षकों को आगे बढ़ने और शिक्षा को समाज, संस्कृति और जीवनशैली से जोड़ने की प्रेरणा दी। उन्होंने सफल आयोजन के लिए टीम की सराहना भी की।
शिक्षा जब जीवन से जुड़ती है, तब महक उठता है ज्ञान
नगरी में आयोजित यह कार्यक्रम केवल भ्रमण नहीं था। यह एक संदेश था कि, शिक्षा तब जीवंत होती है जब वह समाज, संस्कृति और परंपरा से जुड़ती है। जहाँ एक ओर किताबों पर चर्चा जारी रही, वहीं दूसरी ओर तवे की छन-छन कानों में गूंजती रही। और यही इस आयोजन की सबसे बड़ी सफलता रही जहाँ ज्ञान ने परंपरा का हाथ थामा और शिक्षा ने स्वाद का रूप ले लिया।










