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नगरी में सामुदायिक भवन निर्माण रोकने पर भाजपा कार्यकर्ताओं और वार्डवासियों का असंतोष बढ़ा, भाजपा के स्थापना दिवस पर ही दी सामूहिक इस्तीफे और आंदोलन की चेतावनी।

अंगेश हिरवानी - नगरी। धमतरी जिले के नगरी नगर पंचायत में भाजपा के स्थापना दिवस के अवसर पर उस समय राजनीतिक हलचल तेज हो गई, जब वार्ड क्रमांक 09 और 10 में प्रस्तावित सामुदायिक भवन के निर्माण पर अचानक रोक लगा दी गई। यह निर्णय स्थानीय भाजपा कार्यकर्ताओं और नागरिकों को इतना नागवार गुज़रा कि उन्होंने संगठन की प्राथमिक और सक्रिय सदस्यता से सामूहिक इस्तीफे की चेतावनी दे डाली। पूरा मामला अब राजनीतिक और संगठनात्मक असंतोष का रूप लेता दिख रहा है।

सामुदायिक भवन निर्माण पर रोक से नाराजगी बढ़ी
अंजनी चौक के समीप प्रस्तावित सामुदायिक भवन की मांग वर्षों से उठती रही है। शासन से स्वीकृति मिलने के बाद भूमि पूजन भी करा लिया गया था और निर्माण कार्य शुरू होने की उम्मीद थी। इसी बीच नगर पंचायत के एक अधिकारी द्वारा फोन पर निर्माण रोकने के निर्देश जारी किए जाने के बाद क्षेत्र में आक्रोश फैल गया। वार्डवासियों का कहना है कि जब भूमि पूजन तक किसी ने आपत्ति नहीं उठाई, तो अब अचानक निर्माण रोकना केवल दबाव की राजनीति के कारण किया गया है।

शासकीय भवन के कारण विवाद गहराया
स्थानीय लोगों का आरोप है कि जिस स्थान पर सामुदायिक भवन निर्माण प्रस्तावित है, वहां वन विभाग का एक जर्जर शासकीय भवन मौजूद है, जिसे पूर्व विधायक पिंकी शिवराजशाह के नाम से आबंटित बताया जा रहा है। उनके अनुसार पूर्व विधायक पिछले तीन साल से उस भवन में नहीं रहतीं और केवल सुरक्षा गार्ड वहां मौजूद हैं। ग्रामीणों का कहना है कि वर्षों पुरानी और जर्जर हो चुकी इस संरचना को हटाने में कोई बाधा नहीं होनी चाहिए थी, लेकिन अधिकारी इस मुद्दे को बहाना बनाकर निर्माण कार्य रोक रहे हैं।

पूर्व विधायक का पक्ष
पूर्व विधायक पिंकी शिवराजशाह ने फोन पर दिए गए बयान में साफ कहा कि उन्होंने सामुदायिक भवन निर्माण का विरोध नहीं किया है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि शासकीय भवन उनके नाम से आबंटित जरूर है, परंतु वह खुद वहां निवास नहीं कर रहीं और केवल सुरक्षा गार्डों की तैनाती है। उन्होंने निर्माण कार्य में किसी भी प्रकार के अवरोध का समर्थन करने से इनकार किया।

भाजपा कार्यकर्ताओं और पार्षदों का बढ़ता असंतोष
स्थानीय भाजपा कार्यकर्ताओं का कहना है कि यह क्षेत्र लंबे समय से पार्टी का मजबूत गढ़ रहा है, लेकिन इस तरह निर्माण कार्य रुकवाने से संगठन को नुकसान होगा। पार्षदों ने आरोप लगाया कि अधिकारियों पर राजनीतिक दबाव बनाकर निर्माण को अवरुद्ध किया जा रहा है। इससे कार्यकर्ताओं में असंतोष चरम पर पहुंच गया है। हालांकि भाजपा नगरी मंडल प्रभारी रविशंकर दुबे ने कार्यकर्ताओं द्वारा इस्तीफे की खबरों को आधारहीन बताते हुए कहा कि वार्डवासियों की समस्याओं का समाधान जल्द किया जाएगा।

प्रशासन की सफाई और कार्रवाई
मुख्य नगर पालिका अधिकारी (सीएमओ) ने बताया कि निर्माण स्थल को लेकर एक मौखिक शिकायत मिली है, इसलिए एहतियातन जांच पूरी होने तक निर्माण रोकना पड़ा। उनका कहना है कि जांच पूरी होने के बाद काम फिर से शुरू कर दिया जाएगा ताकि किसी प्रकार का विवाद या समस्या आगे न बढ़े।

10 दिनों में कार्य शुरू नहीं हुआ तो उग्र आंदोलन की चेतावनी
इस बीच नाराज वार्डवासी और पार्षद खुलकर सामने आ गए हैं। उन्होंने प्रशासन को चेतावनी दी है कि यदि आगामी 10 दिनों के भीतर निर्माण कार्य शुरू नहीं किया गया, तो वे चक्का जाम और उग्र आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि ऐसी स्थिति की पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।
भाजपा स्थापना दिवस के दिन उत्पन्न हुआ यह विवाद न केवल स्थानीय राजनीति में हलचल मचा रहा है बल्कि पार्टी संगठन के भीतर भी गंभीर संदेश के रूप में देखा जा रहा है।

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