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Exclusive : पूर्व सीपीआई नेता मनीष कुंजाम से हरिभूमि और आईएनएच के प्रधान संपादक डॉ. हिमांशु द्विवेदी ने 'सार्थक संवाद' शो में ख़ास बातचीत । यहां देखें वीडियो-

रायपुर। भाजपा या कांग्रेस में जाने का अभी कोई मन नहीं बनाया है, मुझे फिलहाल स्वतंत्र रूप से कार्य करना है। 1984 से जिस पार्टी से जुड़ा, उसने मेरे राजनैतिक जीवन में सबसे बड़ा धोखा दिया है। ऐसे में सीपीआई के किसी भी पद से जुड़े रहना मेरे जीवन के साथ अन्याय होगा। विधानसभा चुनाव में पार्टी ने अंतिम समय में पार्टी का सिंबाल नहीं दिया, इसलिए पार्टी के सारे पद छोड़ दिए हैं। सार्थक संवाद में हरिभूमि-आईएनएच न्यूज के प्रधान संपादक डॉ. हिमांशु द्विवेदी से पूर्व विधायक मनीष कुंजाम ने उक्त बातें कही।

पूर्व सीपीआई नेता मनीष कुंजाम कोंटा विस क्षेत्र से दो बार विधायक रहे हैं। श्री कुंजाम ने कहा, इस विधानसभा चुनाव में मुझे पार्टी ने जानबूझकर सिंबाल नहीं दिया। बस्तर के किसी भी इलाके में हमें बिना मेहनत के भी 10 हजार के लगभग वोट मिलते हैं। कांग्रेस के कहने पर हमारी पार्टी ने ये फैसला लिया होगा। इस समय का चुनाव धन और बल का  चुनाव है। जिनके पास संसाधन नहीं, समझो वो योग्य नहीं, बिना पैसे के और संसाधन के हम चुनाव लड़ते हैं। आजकल मतों को खरीदने का काम चल रहा है। कवासी लखमा का व्यवहार क्षेत्र में लोगों के हित में नहीं है, कवासी धन के बल पर चुनाव जीतते हैं, भले ही मैं चुनाव हारा, लेकिन वोट बढ़े हैं।। यहां देखें वीडियो-

 

कभी नहीं रही मंत्री बनने की लालसा 

श्री कुंजाम ने एक सवाल, अगर लखमा राजनैतिक तौर पर नंबर वन दुश्मन है तो भाजपा से हाथ क्यों नहीं मिलाया, के जवाब में कहा कि भाजपा के अंदर भी स्थिति कुछ ठीक नहीं है। इस चुनाव में आठ से दस उम्मीदवार सामने आ रहे थे। प्रस्ताव मिलने पर लखमा मुक्त कोंटा के लिए भाजपा से हाथ मिलाने के सवाल पर कहा, बस्तर के ऊपर केंद्रित कर स्वतंत्र रूप से कार्य करना चाहता हूं। पूर्व में भी डॉ. रमन सिंह ने भाजपा व दिग्विजय सिंह ने कांग्रेस में आने का न्योता दिया था, उस वक्त भी नहीं गया। श्री कुंजाम ने कहा, मेरी लालसा कभी मंत्री बनने की नहीं रही है।

दोनों दलों के खिलाफ किया संघर्ष 

श्री कुंजाम ने कहा, भाकपा का संघर्ष हमेशा से ही भाजपा व कांग्रेस के खिलाफ था। श्री कुंजाम ने कहा, चुनाव के कुछ दिन पहले मेरे नारायणपुर दौरे के दौरान हुए भव्य स्वागत ने राजनैतिक भूचाल ला दिया था। पार्टी से मैं पूरी ईमानदारी व निष्ठा से जुड़ा था और संघर्ष के हर दौर को नजदीक से देखा, मुकाबला भी किया। श्री कुंजाम ने कहा, इस समय के जो चुनाव हो रहे हैं, वो धन और बल के बलबूते पर लड़े जाते हैं। जिसके पास संसाधन नहीं, वो चुनाव लड़ने की योग्यता ही नहीं रखता। हमारे पास वैसे ही संसाधन व पैसों की कमी रहती है और इसके बिना सबकुछ सूना हो जाता है। हर चुनाव में दारू, पैसा व अन्य चीजें पहुंचाई जाती हैं, उसके बाद ही मतदाता फैसला लेते हैं। यह सच्चाई है कि चुनाव पैसों से जीता जाता है।

साजिश के तहत रोका गया था मुझे

श्री कुंजाम ने कहा, अंतिम समय में मुझे चुनाव से रोकने के लिए जानबूझकर पार्टी द्वारा सिंबाल नहीं दिया गया। ये कोई तकनीकी त्रुटि नहीं थी। मुझे सिंबाल नहीं देने के पीछे यही कारण लगता है कि देश में इंडिया गठबंधन बना। हमारे नेताओं की कांग्रेस के नेताओं के साथ बातचीत होती रहती है। गठबंधन बनाने के पीछे भी यही उद्देश्य था कि किसी भी तरह से भाजपा को रोकना था। बस्तर में भी भाजपा को किसी भी तरह से रोकने व कांग्रेस को फायदा पहुंचाने के लिए अंतिम वक्त पर मुझे पार्टी द्वारा सिंबाल नहीं दिया गया। बस्तर में कांग्रेस को लाम पहुंचाने के उद्देश्य से ऐसा किया गया था।

आदिवासी मुख्यमंत्री से काफी उम्मीदें

श्री कुंजाम ने कहा, विष्णुदेव साय छत्तीसगढ़ के पहले सरल व सहज आदिवासी मुख्यमंत्री हैं। उनसे छत्तीसगढ़ के आदिवासी वर्ग को काफी उम्मीदें हैं। हम दोनों 1990 में एक साथ विधायक बने थे। चूंकि छत्तीसगढ़ राज्य आदिवासियों को देखकर ही बनाया गया था और पहली बार कोई आदिवासी मुख्यमंत्री बना है। अजीत जोगी को पहले आदिवासी मुख्यमंत्री मानने से इनकार करते हुए श्री कुंजाम ने कहा, उस पर काफी विवाद की स्थिति निर्मित हो चुकी है। अजीत जोगी को लेकर कोई नई बात अकेले मैंने नहीं की है। श्री जोगी की जाति का विवाद पूर्व से ही सुर्खियों में रहा है।

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