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कोतबा में महाशिवरात्रि का पर्व अपार श्रद्धा और धूमधाम के साथ मनाया गया। नगर के प्रसिद्ध सतीघाट शिव मंदिर धाम में तीन दिवसीय महोत्सव के दौरान पूरा क्षेत्र शिवमय हो गया। 

मयंक शर्मा। कोतबा- जशपुर। धर्मनगरी कोतबा में महाशिवरात्रि का पर्व अपार श्रद्धा और धूमधाम के साथ मनाया गया। नगर के प्रसिद्ध सतीघाट शिव मंदिर धाम में तीन दिवसीय (14 से 16 फरवरी 2026) महोत्सव के दौरान पूरा क्षेत्र शिवमय हो गया। 15 फरवरी, रविवार को मुख्य आयोजन में ब्रह्ममुहूर्त में भस्म आरती से लेकर देर रात तक चले शिव विवाह और फूलों की होली ने भक्तों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

महाशिवरात्रि पर्व पर नगर के प्रसिद्ध दार्शनिक और भगवान शिव मंदिर में गुप्तेश्वर महादेव के दर्शन कर जलाभिषेक करने भोर से ही भक्तों का तांता लगा रहा। जहां सुबह से क्षेत्रभर के हजारों की संख्या में श्रद्धालु जलाभिषेक करने पहुचे। महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर रविवार तड़के 4 बजे भगवान गुप्तेश्वर महादेव की भव्य और अलौकिक भस्म आरती की गई। इस अद्भुत दृश्य के साक्षी बनने के लिए भोर से ही भक्तों का तांता लगा रहा। आरती के पश्चात सुबह 5 बजे से आम श्रद्धालुओं के लिए जलाभिषेक प्रारंभ हुआ। रायगढ़ और जशपुर जिले सहित बागबहार, गोलियागड़, फरसाटोली, महुआडीह आदि क्षेत्रों से हजारों की संख्या में कांवड़ियों और श्रद्धालुओं ने नयनसुख भैवनी नदी के तट पर स्थित सतीघाट धाम में जलाभिषेक किया। भक्तगण फूल, दूध, बेलपत्र आदि लेकर मंदिर पहुंचने लगे थे। जिसमें बच्चों से लेकर बुजुर्ग व युवा सहित बड़ी संख्या में महिलाएं भी शामिल हुये। 

A glimpse of Lord Shiva reached the people
लोगों के बीच पहुंची भगवान शिव की झलक 

मंदिर को विशेष साज सज्जा से गया था सजाया 
महाशिवरात्रि पर्व पर मंदिर को विशेष साज सज्जा कर सजाया गया है जिससे पहुँचने वाले भक्तों आकर्षण का केंद्र बना रहे। शिवालयों में भगवान शिव का दूध, जल आदि से अभिषेक किया गया। इस दौरान ओम नमः शिवाय के जयकारे से शिवालय गूंजते रहे। भक्तों ने भोले बाबा के भव्य भस्म आरती में शामिल होकर दर्शन का लाभ लिया। महाशिवरात्रि पर्व के अवसर पर भगवान शिव की विशेष पूजा अर्चना होती है। महाशिवरात्रि पर्व पर भगवान शिव के पूजा का विशेष महत्व है। जिसके चलते दूर दराज के भक्तगण कतार में सुबह से ही भगवान शिव के दर्शन व पूजन के लिए शिवालयों में भक्तों के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया। 

सुबह चार बजे से ही लगने लगा भक्तों का तांता 
नगर के वार्ड क्रमांक 1 में स्थित सतिघाट धाम शिव मंदिर में सुबह चार बजे से ही भक्त भगवान भोलेनाथ की पूजा अर्चना के लिए पहुंचने लगे थे। महादेव का अभिषेक के बाद भक्तों ने विधि-विधानपूर्वक पूजा अर्चना की। दिनभर मंदिर में भक्त भगवान शिव के दर्शन के लिए पहुंचते रहे। मंदिर में भगवान भोलेनाथ की पूजा अर्चना के लिए पहुंचे भक्तों ने बताया कि सतिघाट शिव धाम  में भगवान शिव की पूजा कर आत्मीय शांति मिलती है।वे हर विशेष अवसर पर लोग यहां पूजा अर्चना करने पहुचते है। जिसके चलते वे व्रत रखकर मंदिर आकर भगवान शिव की पूजा अर्चना करते हैं। 

  Shiva marriage took place in Kotba
कोतबा में हुआ शिव विवाह 

मंदिर के पुजारी ने माहात्म्य के बारे में दी जानकारी 
मंदिर के पुजारी पंडित सुदामा शर्मा ने बताया कि महाशिवरात्रि पर भगवान शिव की पूजा का विशेष महत्व है। भगवान शिव की पूजा करने से सभी प्रकार की मनोकामना पूरी होती है। भगवान शिव का जल, दूध, नैवेद्य से अभिषेक करना चाहिए। भगवान शिव को विषैले पुष्प प्रिय हैं, इसलिए धतुरा, मदार व बेल पत्र आदि भगवान शिव को अर्पण कराना चाहिए। ऐसी मान्यता है कि महाशिवरात्रि पर्व में भगवान शिव माता पार्वती के साथ पृथ्वी पर आकर मंदिरों में वास करते हैं, जिसके कारण भगवान की शिव पूजा का विशेष महत्व होता है। 

​नगर भ्रमण पर निकली भोले बाबा की बारात
समारोह का मुख्य आकर्षण शाम 5 बजे बाबा श्याम मंदिर प्रांगण से निकाली गई शिव बारात रही। बाजे-गाजे और डीजे की धुन पर थिरकते भक्तों के साथ, आकर्षक रथ कार पर सवार दूल्हा स्वरूप भोलेनाथ की झांकी नगर भ्रमण के लिए निकली। बारात बस स्टैंड, भगवान परशुराम चौक होते हुए सतीघाट शिव धाम पहुंची। बारात में भक्तगण महिलाओं बहनों और नन्हें-मुन्हें बच्चों ने "हर-हर महादेव" के जयघोष से वातावरण को गुंजायमान कर दिया। सड़क के दोनों ओर खड़े हजारों श्रद्धालुओं ने बारात का भव्य स्वागत किया।

​अलौकिक श्रृंगार और शिव-पार्वती विवाह
सतीघाट पहुंचने पर बारात के स्वागत और जलपान के पश्चात मंदिर पुजारी पं. सुदामा शर्मा और पं. धीरज शर्मा के सानिध्य में वैदिक मंत्रोच्चार के साथ शिव-पार्वती का विवाह संपन्न कराया गया। शिव जी ने माता पार्वती को और माता पार्वती ने शिव जी को वरमाला पहनाई। इस दौरान भगवान का अंगूर, केला, लड्डू और मिठाइयों से अलौकिक श्रृंगार किया गया था। शाम को 1100 दीपकों के साथ पूरे घाट पर दीपदान किया गया, जिससे सतीघाट दीयों की रोशनी से जगमगा उठा।

​फूलों की होली और भजन संध्या
महाआरती के बाद भव्य संगीतमय फूलों की होली खेली गई, जिसने ब्रज की याद दिला दी। रात्रि में आयोजित भजन संध्या में 'श्याम श्री राम भजन मंडली' के गायक विजय साहू और नरेंद्र बंजारा ने अपने भजनों से श्रद्धालुओं को झूमने पर मजबूर कर दिया। कार्यक्रम के अंत में विशाल भंडारे (महाप्रसाद) का वितरण किया गया और पूरी रात अखंड रामचरितमानस का पाठ चलता रहा। 16 फरवरी, सोमवार को सुबह हवन और पूर्णाहुति के साथ तीन दिवसीय महोत्सव का समापन हुआ। 

Shiva marriage took place in Kotba
कोतबा में हुआ शिव विवाह 

​सतीघाट की पौराणिक मान्यता
स्थानीय बुजुर्गों और जानकारों के अनुसार, सतीघाट का पौराणिक महत्व रामायण काल से जुड़ा है। मान्यता है कि वनवास के दौरान भगवान राम और माता सीता का आगमन यहाँ हुआ था। यहाँ के पत्थरों पर आज भी उनके चरण चिह्न और हिरण वध के प्रतीक रक्त के निशान देखे जा सकते हैं। भैवनी नदी और 31 फीट ऊंची हनुमान प्रतिमा इस स्थान की दिव्यता को और बढ़ाते हैं। इस भव्य आयोजन को सफल बनाने में मेसर्स रघुवर प्रसाद प्रेमचंद गुप्ता, जय भोले ट्रेडर्स, बसंत ट्रेडर्स सहित समस्त नगरवासियों और आयोजन समिति का विशेष योगदान रहा।

40 साल से प्रज्वलित धुनी के दर्शन मात्र से सभी प्रकार के कष्ट होते हैं दूर
मंदिर के पुजारी व घुनी को प्रज्वलित करने वाले सुदामा महराज जी ने बताया कि यहाँ गुप्तेश्वर महादेव के स्थापना के बाद भी लोगो के कष्ट को दूर करने के लिए घुनी जलाई गई थी जो आज भी प्रज्वलित है जो भी भक्त इसके दर्शन करता है उसके सारे कष्ट दूर हो जाते है यहा काफी दूर दूर लोग दर्शन करने आते है।

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