छत्तीसगढ़ में बाल जनसंख्या यानि 6 साल से कम उम्र के बच्चों की संख्या 36 लाख से ज्यादा अनुमानित है। राज्य के 33 जिलों में बच्चों की संख्या को लेकर असंतुलन की स्थिति है। 

रायपुर। छत्तीसगढ़ में बाल जनसंख्या यानि 6 साल से कम उम्र के बच्चों की संख्या 36 लाख से ज्यादा अनुमानित है, लेकिन राज्य के 33 जिलों में बच्चों की संख्या को लेकर असंतुलन की स्थिति है, रायपुर, बलोदाबाजार, बेमेतरा, मुंगेली कबीरधाम जिलों में बाल जनसंख्या तेजी से बढ़ रही है तो दूसरी ओर दुर्ग, धमतरी जांजगीर-चांपा, महासमुंद, गरियाबंद, सुकमा और बीजापुर में यह संख्या घट रही है।  

दरअसल, बाल जनसंख्या में यह एक बड़ा असंतुलन है। राज्य सरकार के आर्थिक एवं सांख्यिकी संचालमालय ने वर्ष 2011 की जनसंख्या के अनुपात के हिसाब से साल-दर साल वृद्धि या कमी का एक आकलन किया है। इससे राज्य की बाल संख्या के संबंध में एक तस्वीर सामने आती है। 

जनसंख्या वृद्धि दर में कमी का संकेत
राज्य सरकार बच्चों के लिए योजना बनाने समय इन आंकड़ों के अनुरूप रीति-नीति निर्धारित कर सकती है। इसकी सीधा असर भविष्य में बच्चों के लिए बनने वाली योजनाओं पर भी पड़ता है। राज्य में 6 वर्ष से कम उम्र के बच्चों की कुल संख्या लगभग 36.57 लाख दर्ज की गई है। पिछले आंकड़ों की तुलना में इसमें धीरे-धीरे गिरावट का रुझान दिखाई दे रहा है, जो जनसंख्या वृद्धि दर में कमी का संकेत है। 

सबसे अधिक बच्चों वाले जिले
जिलेवार स्थिति देखें तो रायपुर में सबसे अधिक 3.32 लाख से ज्यादा बच्चे हैं। इसके बाद बिलासपुर, बालोदाबाजार, कबीरधाम और कोरबा जैसे जिले प्रमुख हैं, जहां बच्चों की संख्या अपेक्षाकृत अधिक है। इन जिलों में शहरीकरण, स्वास्थ्य सुविधाओं और रोजगार के अवसरों के कारण जनसंख्या का दबाव बना हुआ है।

सबसे कम बच्चे इन जिलों में
इसके विपरीत नारायणपुर, सुकमा, बीजापुर और कोरिया जैसे जिलों में बच्चों की संख्या सबसे कम है। ये जिले मुख्य रूप से दूरस्थ और आदिवासी क्षेत्र हैं, जहां स्वास्थ्य सेवाओं की कमी, कुपोषण और पलायन जैसे कारण प्रभाव डालते हैं।

कहां बढ़ रही है संख्या
बलोदाबाजार, बेमेतरा, मुंगेली, रायपुर और कबीरधाम जैसे जिलों में बच्चों की संख्या में लगातार वृद्धि देखी जा रही है। इन क्षेत्रों में बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं, सरकारी योजनाओं का असर और आर्थिक गतिविधियों के विस्तार से जन्मदर में वृद्धि हो रही है।

यहां घट रही है बच्चों की तादाद
दुर्ग, धमतरी, जांजगीर-चांपा, महासमुंद, गरियाबंद, सुकमा और बीजापुर जैसे जिलों में बच्चों की संख्या में गिरावट दर्ज की गई है। इन क्षेत्रों में कम जन्मदर और पलायन प्रमुख कारण माने जा रहे हैं।

वृद्धि की रफ्तार का ट्रेंड भी देखिए
जिलों के बीच वृद्धि की रफ्तार भी अलग-अलग है। बालोदाबाजार, बेमेतरा और रायपुर जैसे जिलों में तेजी से वृद्धि हो रही है, जबकि बस्तर और दंतेवाड़ा में स्थिति अपेक्षाकृत स्थिर है। दूसरी ओर सुकमा, बीजापुर और धमतरी में गिरावट की रफ्तार अधिक है, जो चिंता का विषय है।

राज्य पर क्या असर होगा
बच्चों की आबादी में यह असंतुलन राज्य की नीतियों पर सीधा असर डालेगा। जहां संख्या बढ़ रही है, वहां स्कूल, आंगनबाड़ी और स्वास्थ्य सेवाओं की मांग बढ़ेगी। वहीं जिन जिलों में बच्चों की संख्या घट रही है, वहां भविष्य में श्रमबल की कमी हो सकती है। इसके अलावा क्षेत्रीय असमानता भी बढ़ने की आशंका है। बच्चों की आबादी के ये आंकड़े केवल जनसंख्या का संकेत नहीं, बल्कि राज्य के भविष्य की दिशा भी तय करते हैं। ऐसे में सरकार के लिए जरूरी होगा कि घटती संख्या वाले जिलों पर विशेष ध्यान दिया जाए और बढ़ती आबादी वाले क्षेत्रों में आधारभूत सुविधाओं का विस्तार कर संतुलित विकास सुनिश्चित किया जाए।

सबसे अधिक वृद्धि दर्ज की गई है

बलौदाबाज़ार 2,15,511  50,686
बेमेतरा   1,56,140 32,386
कबीरधाम     1,79,782 37,878
बिलासपुर 2,80,848 41,559
रायपुर 3,32,336 28,292
मुंगेली 1,49,948 29,317

आबादी में सबसे बड़ी गिरावट देखी

बालोद 63,827 32,444
धमतरी 76,564 25,345
दुर्ग 1,81,220 29,291
सुकमा 22,872 13,387
मोहला 27,034 10,377

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