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लघु उद्योगों के साथ ही मिनी स्टील प्लांट, रोलिंग मिल और स्पंज आयरन का काम भी गैस सिलेंडर न मिलने से प्रभावित हो गया है।

रायपुर। प्रदेशभर के एमएसएमई यानी लघु उद्योगों के साथ ही मिनी स्टील प्लांट, रोलिंग मिल और स्पंज आयरन का काम भी गैस सिलेंडर न मिलने से प्रभावित हो गया है। कटिंग के साथ वेल्डिंग का काम लगभग बंद कर दिया गया है। उत्पादन भी 30 फीसदी तक प्रभावित हो गया है। यदि आने वाले समय में सिलेंडर नहीं मिले, तो आधे से ज्यादा उत्पादन प्रभावित होगा और फिर उद्योग बंद भी करने पड़ सकते हैं। उद्योग बंद होने से जहां प्रदेश सरकार को भी राजस्व का नुकसान होगा, वहीं रोजगार पर भी असर पड़ेगा।

एलपीजी गैस सिलेंडरों को लेकर हाहाकार मचा हुआ है। जहां एक तरफ घरेलू गैस सिलेंडरों को लेकर मारा मारी है, वहीं सबसे बड़ी परेशानी कमर्शियल गैस सिलेंडरों को लेकर हो रही है। हालांकि केंद्र सरकार ने राज्यों को अब 40 फीसदी तक सप्लाई करने का फैसला किया है, लेकिन इसके बाद भी कम से कम उद्योगों को सिलेंडर मिल ही नहीं रहे हैं।

एक भी नहीं मिल रहा
मिनी स्टील प्लांट के महासचिव मनीष धुप्पड़ ने कहा कि,  मिनी स्टील प्लांट, रोलिंग मिलों को आज की तारीख में एक भी गैस सिलेंडर नहीं मिल रहा है। ऐसे में कटिंग और वेल्डिंग का काम रोक दिया गया है। जो जरूरी है, वही काम कर रहे हैं। उत्पादन 25 फीसदी तक प्रभावित हो गया है।

उत्पादन प्रभावित
उरला एसोसिएशन के अध्यक्ष अश्विन गर्ग ने बताया कि, अध्यक्ष एमएसएमई के उद्योगों को भी सिलेंडर नहीं मिल पा रहे हैं। उद्योग विभाग के साथ बैठक करके समस्या का समाधान करने की मांग रखी गई है। उत्पादन प्रभावित हो रहा है। आने वाले समय में सरकार के राजस्व का भी नुकसान संभव है। अश्विन गर्ग, अध्यक्ष, उरला एसोसिएशन

इन उद्योगों के लिए जरूरी
एलपीजी गैस सिलेंडर की जरूरत लघु उद्योगों में इंजीनियरिंग का काम करने वालों को ज्यादा पड़ती है। इन उद्योगों से जुड़े लोगों का कहना है कि सही संख्या का बता पाना संभव नहीं है, उद्योगों के हिसाब से किसी को एक दिन में एक सिलेंडर लगता है तो किसी को उसके काम के हिसाब से पांच से दस सिलेंडर भी लग जाते हैं। इसी के साथ मिनी स्टील प्लांट और रोलिंग मिलों में सरिया बनाने के काम आने वाले बिलेट की कटिंग करने के लिए गैस सिलेंडर की जरूरत पड़ती है।

मिनी स्टील प्लांट और रोलिंग मिल का कारोबार करने वालों के मुताबिक एक छोटे उद्योग को हर माह 15 से 25 सिलेंडरों की जरूरत पड़ती है। स्पंज आयरन उद्योग को भी गैस सिलेंडर लगते हैं। प्रदेश में 150 रोलिंग मिल, 120 मिनी स्टील प्लांट और 70 स्पंज आयरन उद्योगों के साथ भारी संख्या में एमएसएमई के उद्योग हैं। इनको सिलेंडर मिल ही नहीं पा रहे हैं।

ब्लैक में कीमत डबल से ज्यादा
कमर्शियल गैस सिलेंडर की कीमत प्रदेश में करीब 21 सौ रुपए है, सामान्य समय में उद्योगों को इसी कीमत पर जब भी जरूरत रहती है सिलेंडर मिल जाते थे। लेकिन अब सिलेंडर मिल ही नहीं रहे हैं। ब्लैक में जरूर आज भी सिलेंडर आसानी से मिल जा रहे हैं। इसके दाम चार से पांच हजार लिए जा रहे हैं। जिन उद्योगों को ज्यादा जरूरत है, उनको ब्लैक में लेना पड़ रहा है ताकि काम न रूके।

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