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संजय वन वाटिका में कुत्तों के हमले में 24 घंटे के भीतर 15 हिरणों की मौत होने के मामले में वन अधिकारियों की बड़ी लापरवाही सामने आई है।

अम्बिकापुर। संजय वन वाटिका में कुत्तों के हमले में 24 घंटे के भीतर 15 हिरणों की मौत होने के मामले में वन अधिकारियों की बड़ी लापरवाही सामने आई है। संजय वन वाटिका की प्राकृतिक सुंदरता एवं वाटिका में रह रहे वन्य जीवों को देखने हर दिन संभाग के विभिन्न क्षेत्रों से 300 से अधिक पर्यटक पहुंचते हैं। विभाग अ पर्यटकों से 20 रूपए की दर से राशि वसूलता है। वाटिका से चंद कदमों की दूरी पर ही विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों की आवासीय कॉलोनी है लेकिन किसी भी अधिकारी ने वाटिका की सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लेने की जरूरत नहीं समझी। दो साल पूर्व वाटिका के पिछले हिस्से में आवारा कुत्तों की भीड़ देख तत्कालीन मुख्य वन संरक्षक ने कड़ी नाराजगी जताई थी।  

विभाग एवं समिति के बीच विवाद की चर्चा
लोगों में चर्चा है कि वनकर्मियों एवं समिति के सदस्यों के बीच किसी बात को लेकर लम्बे समय से विवाद चल रहा है। चर्चा में जहर देकर हिरणों को मारने की बात कही जा रही है। सुबह हिरणों के बाड़े के पास एक खून से सना धारदार हथियार भी मिला है। वन अधिकारी हथियार को पीएम करने वाले चिकित्सकों का तथा भूलवश पीएम स्थल पर छूट जाने की बात कह रहे हैं।  

सार्वजनिक हो जांच रिपोर्ट
रिटायर्ड एडिशनल एसपी एवं वन्यजीव व परीक्षी प्रेमी नरेन्द्र वर्मा ने बताया कि शहरी क्षेत्र के कुत्तों में जंगली कुत्तों की तरह वन्य जीवों का शिकार करने की प्रवृत्ति नहीं होती। 4-5 आवारा कुत्तों द्वारा तड़के 3-4 बजे के मध्य हुए हमले एवं हमले में इतनी अधिक संख्या में हिरणों की मौत किसने देखा है अभी तक स्पष्ट नहीं हुआ है।

जू अथॉरिटी की मान्यता जरूरी
वन्य जीव प्रेमी नितिन सिंघवी ने वन अधिकारियों पर जू अथॉरिटी की अनुमति लिए बिना ही संजय वन वाटिका में रेस्क्यू सेंटर चलाने का आरोप लगाया है उन्होंने बताया कि वन अधिकारी संजय वन वाटिका में जू नहीं रेस्क्यू सेंटर संचालित करने की बात कह रहे हैं। रेस्क्यू सेंटर के लिए भी सेंट्रल जू अथॉरिटी की अनुमति जरूरी है। रेस्क्यू सेंटर में किसी वन्यजीव को प्रदर्शन के लिए नहीं रखा जा सकता।

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