Logo
छत्तीसगढ़ में मेट्रो ट्रेन चलाने का सपना अब जल्दी ही पटरी पर आने वाला है।

रायपुर। छत्तीसगढ़ में मेट्रो ट्रेन चलाने का सपना अब जल्दी ही पटरी पर आने वाला है। राज्य सरकार की इस अत्यंत महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए स्टेट कैपिटल रीजन प्राधिकरण ने मेट्रो के लिए फिजिबिलिटी स्टडी के लिए कंपनी हायर करने कंसल्टेंट एजेंसी नियुक्त करने का अनुमोदन किया है। यही नहीं, एक और एजेंसी यह सर्वे करेगी कि इस ट्रेन का कहां से कहां तक चलाया जाना है। एजेंसियों के चयन के लिए अब टेंडर निकालने की तैयारी है। 

छत्तीसगढ़ में मेट्रो ट्रेन चलाने का सपना लंबे अरसे से फाइलों में तैर रहा है, लेकिन अब इसे पटरी पर लाने की तैयारी पूरी हो चुकी है। मेट्रो ट्रेन का संचालन स्टेट कैपिटल रीजन यानी एससीआर के माध्यम से होगा। एससीआर प्राधिकरण के अध्यक्ष राज्य के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय हैं, उनकी अध्यक्षता में प्राधिकरण की पहली बैठक पिछले दिनों हो चुकी है। उच्च पदस्थ सूत्रों की मानें तो इसी पहली बैठक में मेट्रो संबंधी प्रस्तावों पर अनुमोदन किए गए हैं।

सबसे पहले होगा फिजिबिलिटी सर्वे
राज्य सरकार ने रायपुर-दुर्ग मेट्रो रेल परियोजना को सिद्धांततः मंजूरी दे दी है। इसके लिए वर्ष 2024-25 के पिछले बजट में प्रारंभिक तौर पर लगभग 5 करोड़ रुपए का प्रावधान कर चुकी है। अब मेट्रो के लिए व्यवहार्यता (फिजिबिलिटी) सर्वे कराया जाएगा। यह मेट्रो कॉरिडोर रायपुर, नवा रायपुर अटलनगर और भिलाई-दुर्ग औद्योगिक क्षेत्र को आपस में
जोड़ेगा। परियोजना का उद्देश्य इन शहरों को एक एकीकृत शहरी क्षेत्र के रूप में विकसित करना है, जिससे परिवहन व्यवस्था मजबूत हो और यातायात दबाव कम हो सके।

इस मॉडल पर बनेगी परियोजना
बताया जा रहा है कि इस पूरी योजना को दिल्ली-एनसीआर मॉडल की तर्ज पर तैयार किया जा रहा है, जिसमें परिवहन के साथ-साथ आवास, स्वास्थ्य, शिक्षा और औद्योगिक विकास को भी एक साथ बढ़ावा दिया जाएगा। परियोजना के संचालन और समन्वय के लिए कैपिटल रीजन डेवलपमेंट अथॉरिटी ने काम करना शुरू कर दिया है। यह अथॉरिटी मेट्रो प्रोजेक्ट सहित पूरे क्षेत्र के समेकित विकास की जिम्मेदारी संभालेगी।

रूट और कॉरिडोर सर्वे इस तरह होगा
परियोजना के तहत रूट और कॉरिडोर सर्वे होगा। इसके जरिए पता लगाया जाएगा कि मेट्रो किन-किन इलाकों से गुजरेगी और स्टेशन कहां-कहां बनाए जाएंगे। एलिवेटेड (ऊपर) या अंडरग्राउंड (भूमिगत) मेट्रो होगी? यह चरण शहर के भविष्य के विस्तार को ध्यान में रखकर किया जाता है। इसके साथ ही तकनीकी सर्वे भी किया जाता है। इसमें जमीन की स्थिति, नदी, नाले, रेलवे क्रॉसिंग जैसी बाधाएं, पुल, सुरंग, स्टेशन निर्माण की संभावनाएं, इससे निर्माण की तकनीकी जटिलताओं और लागत का अंदाजा लगाया जाता है।

कैसे होता है फिजिबिलिटी सर्वेक्षण ?
किसी भी बड़ी परियोजना का अहम हिस्सा है फिजिबिलिटी सर्वे, इसके तहत बहुत से काम किए जाएंगे। यह काम कंसल्टेंट एजेंसी के जिम्मे होता है। इसके तहत सबसे पहले कंसल्टेंट एजेंसी संबंधित क्षेत्र का बेसिक डाटा जुटाती है, जैसे आबादी और भविष्य की जनसंख्या वृद्धि, वर्तमान यातायात (ट्रैफिक वॉल्यूम) सड़क, बस, रेल जैसी मौजूदा परिवहन व्यवस्था, औद्योगिक और व्यावसायिक गतिविधियां की जानकारी ली जाती है। यह भी अनुमान लगाया जाता है कि रोजाना कितने लोग मेट्रो का उपयोग करेंगे। पीक ऑवर (सुबह-शाम) में कितना दबाव रहेगा, किन रूट्स पर सबसे ज्यादा मांग है। इसी आधार पर तय होता है कि मेट्रो आर्थिक रूप से टिकाऊ होगी या नहीं।

7