रायपुर। अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच एक माह से ज्यादा समय से चल रहे युद्ध की आग में अब चिकन भी उबल गया है। प्रदेश के पोल्ट्री कारोबार पर इसकी दोहरी मार पड़ रही है, एक तो पहले ही अंडों की खपत बहुत ज्यादा कम हो गई है, अब चिकन की खपत पर भी मार पड़ी है।
प्रदेश में हर माह डेढ़ करोड़ किलो यानी रोज पांच लाख किलो चिकन की खपत होती है। इसमें से करीब 30 लाख किलो यानी 20 फीसदी दूसरे राज्यों में जाता है, लेकिन खपत 40 फीसदी कम हो गई है। ऐसे में अब रोज की खपत दो लाख किलो कम होकर तीन लाख किलो पर पहुंच गई है। इसके कारण कीमत भी थोक में 90 रुपए हो गई है, लेकिन चिल्हर में दाम डबल हैं।
चिल्हर में कीमत डबल
चिकन की खपत कम होने से पोल्ट्री फार्म में तो रेट बहुत कम हो गया है। कारोबारियों के मुताबिक पोल्ट्री में बायलर के दाम थोक में 90 रुपए किलो है, लेकिन जहां तक चिकन दुकानों का सवाल है तो बड़ी चिकन दुकानों में इसके दाम 160 रुपए किलो और छोटी दुकानों में इसके दाम 180 रुपए किलो हैं। कटा चिकन 200 से 220 रुपए किलो बिक रहा है ।
गैस संकट से घटी खपत
प्रदेश में चिकन की ज्यादातर खपत ढाबों, होटल और रेस्टोरेंट में होती है। युद्ध के कारण गैस संकट की वजह से अब होटलों में चिकन कम बन रहा है तो इसकी खपत पर असर पड़ गया है। चिकन कारोबारियों का कहना है घरों में भी चिकन की खपत कम हो गई है। जो ग्राहक रोज चिकन खाते थे वो सप्ताह में एक या दो बार भी चिकन ले रहे हैं। इसी तरह से सप्ताह में दो दिन चिकन लेने वाले ग्राहक अब सप्ताह में एक बार ही चिकन ले रहे हैं। ऐसे में खपत पर असर पड़ा है।
गैस संकट का खपत पर असर
हैचरी एसोसिएशन सेंट्रल इंडिया बॉयलर के सचिव धनराज बैनर्जी ने बताया कि, होटल, रेस्टोरेंट में एलपीजी गैस संकट के कारण कारोबारी कम चिकन ले रहे हैं। घरों में भी चिकन की खपत कम हो गई है। इसके कारण खपत 40 फीसदी कम हो गई है।
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