पंकज गुप्ते- बिलासपुर। पत्नी पर शक और घरेलू विवाद के चलते उसे जिंदा जलाने के मामले में हाईकोर्ट ने आरोपी पति की उम्रकैद की सजा को बरकरार रखा है। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट की डिविजन बेंच ने सुनवाई के बाद स्पष्ट कहा कि मृतका का डाइंग डिक्लेरेशन भरोसेमंद है और उसी के आधार पर दोष सिद्ध होता है।
दरअसल, मामला कबीरधाम जिले के रबेली गांव का है, जहां 18 नवंबर 2019 को आरोपी संतोष उर्फ गोलू श्रीवास ने अपनी पत्नी लता श्रीवास पर चरित्र शंका के चलते पहले विवाद किया। फिर घर का दरवाजा बंद कर उस पर केरोसिन डालकर आग लगा दी। जलती हालत में महिला किसी तरह बाहर निकली और पास के तालाब में कूदकर आग बुझाई, बाद में इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।
मामले में ट्रायल कोर्ट ने आरोपी को धारा 302 के तहत दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी, जिसे चुनौती देते हुए आरोपी ने हाईकोर्ट में अपील की। बचाव पक्ष ने डाइंग डिक्लेरेशन और गवाहों पर सवाल उठाते हुए सजा कम करने या दोषमुक्त करने की मांग की।
कोर्ट ने की यह टिप्पणी
हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि मृतका का बयान कार्यपालक मजिस्ट्रेट द्वारा विधिवत दर्ज किया गया था और डॉक्टर ने उसे बयान देने के लिए मानसिक रूप से फिट भी बताया था। इसके अलावा पड़ोसियों के बयान, मेडिकल रिपोर्ट और एफएसएल रिपोर्ट में भी केरोसिन के साक्ष्य मिलने से घटना की पुष्टि होती है।
कोर्ट ने माना कि आरोपी ने जानबूझकर पत्नी को बंद कमरे में जलाया, जो हत्या की स्पष्ट मंशा को दर्शाता है। ऐसे में इसे गैर इरादतन हत्या नहीं माना जा सकता। सभी साक्ष्यों के आधार पर कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के फैसले को सही ठहराते हुए अपील खारिज कर दी और आरोपी को शेष सजा काटने के निर्देश दिए।
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