haribhoomi hindi news
बलौदा बाजार के धमनी गांव में सरकारी भूमि पर वर्षों से अवैध चिमनी ईंट भट्ठा संचालित होने का मामला सामने आया है, जहां बड़े पैमाने पर घोड़े और खच्चरों से ईंट ढुलाई कराई जा रही है।

कुश अग्रवाल - बलौदा बाजार। छत्तीसगढ़ के बलौदा बाजार जिले के पलारी तहसील अंतर्गत ग्राम धमनी से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां महानदी के किनारे जंगल के बीच सरकारी भूमि पर वर्षों से अवैध ईंट भट्ठा संचालित हो रहा है। बिना अनुमति, बिना पंजीयन और बिना किसी निगरानी के चल रही यह गतिविधि प्रशासनिक उदासीनता और संभावित मिलीभगत पर गंभीर सवाल खड़े करती है।

सरकारी भूमि पर वर्षों से अवैध संचालन
ग्रामीणों के अनुसार यह चिमनी ईंट भट्ठा स्पष्ट रूप से सरकारी भूमि पर संचालित है। ना पर्यावरण विभाग से अनुमति ली गई, ना खनिज विभाग की स्वीकृति, इसके बावजूद बड़े पैमाने पर ईंट निर्माण लंबे समय से जारी है। इससे यह साफ होता है कि नियमों को दरकिनार कर अवैध कारोबार चलाया जा रहा है।

पर्यावरण को भारी नुकसान
महानदी के किनारे और घने वन क्षेत्र के बीच भट्ठा चलने से पर्यावरण संतुलन प्रभावित हो रहा है। बिना अनुमति मिट्टी की खुदाई, धुएं का उत्सर्जन और जंगल के बीच निर्माण गतिविधियां भूमि क्षरण और प्रदूषण को बढ़ा रही हैं। स्थानीय लोग इसे जंगल और नदी दोनों के लिए खतरा मान रहे हैं।

घोड़े-खच्चरों से ढुलाई
भट्ठे में ईंटों की ढुलाई के लिए बड़े पैमाने पर घोड़े और खच्चरों का उपयोग किया जा रहा है। इस प्रकार की व्यवस्था पर प्रतिबंध के बावजूद विभागीय कार्रवाई का अभाव गंभीर सवाल खड़े करता है। पशु क्रूरता अधिनियम की खुलेआम अवहेलना होने के बाद भी जिम्मेदार अधिकारी मौन हैं।

नाबालिग बच्चों से कराया जा रहा श्रम
इस भट्ठे में नाबालिग बच्चों से काम कराए जाने की पुष्टि ग्रामीणों ने की है। बाल श्रम एक गंभीर अपराध है, फिर भी किसी जिम्मेदार अधिकारी ने अब तक कोई कार्रवाई नहीं की। यह मामला प्रशासनिक लापरवाही से अधिक संभावित मिलीभगत की ओर इशारा करता है।

बिना पंजीयन बाहरी मजदूरों की तैनाती
भट्ठे में बड़ी संख्या में बाहरी राज्यों से मजदूर लाए गए हैं। न तो इनमें से किसी का रिकॉर्ड स्थानीय थाने में दर्ज है और न ही ग्राम पंचायत के कोटवार रजिस्टर में इनका पंजीयन किया गया है। यह स्थिति कानून-व्यवस्था और सुरक्षा की दृष्टि से भी गंभीर मानी जा रही है।

अब प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी निगाहें
ग्रामीणों ने मांग की है कि इस पूरे मामले की जांच हो और अवैध भट्ठे पर तुरंत रोक लगे। अब देखना यह होगा कि प्रशासन नियमों के खुले उल्लंघन पर क्या कार्रवाई करता है, या फिर मामला फिर से फाइलों में दबकर रह जाता है।

(छत्तीसगढ़ के जिले, कस्बे और गांवों की खबरों के लिए हरिभूमि का "ई-पेपर" पढ़ें। यहां क्लिक करें "epaper haribhoomi" या प्लेस्टोर से "हरिभूमि हिंदी न्यूज़" App डाउनलोड करें।)

7