बैकुंठपुर में इस बार होली पर महिला स्वसहायता समूह द्वारा बनाए गए हरी और लाल भाजी के रस से तैयार हर्बल रंगों की जबरदस्त मांग देखने को मिल रही है।

कमालुद्दीन अंसारी- बैकुंठपुर। प्रकृति के रंगों से सराबोर इस बार की होली खास बनने जा रही है। रासायनिक रंगों से दूरी और सुरक्षित पर्व की चाह ने लोगों का रुझान हर्बल रंगों की ओर बढ़ा दिया है। यही वजह है कि, कोरिया जिले के बैकुंठपुर में इस बार हरी भाजी और लाल भाजी के रस से तैयार प्राकृतिक रंगों की जबरदस्त मांग देखने को मिल रही है।

आपको बता दें कि, होली की पूर्व संध्या पर बैकुंठपुर का बाजार पूरी तरह रंगों में रंगा नजर आ रहा है। मुख्य बाजारों में रंग, अबीर, गुलाल और पिचकारियों की दुकानों पर खरीदारों की भीड़ उमड़ रही है। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी में त्योहार को लेकर खासा उत्साह दिखाई दे रहा है।

हरी भाजी और लाल भाजी के रस से बना रंग
इस बार की खास पहल महिला स्वसहायता समूह की महिलाओं ने की है। उन्होंने हरी भाजी और लाल भाजी के रस से पूरी तरह प्राकृतिक हर्बल रंग तैयार कर बाजार में उतारे हैं। ये रंग त्वचा के लिए सुरक्षित माने जा रहे हैं और पर्यावरण को भी नुकसान नहीं पहुंचाते। स्थानीय स्तर पर तैयार इन रंगों को लोगों का भरपूर समर्थन मिल रहा है।

इस वर्ष हर्बल रंगों की मांग अधिक 
दुकानदारों के मुताबिक, पिछले वर्ष की तुलना में इस बार हर्बल रंगों की मांग में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। लोग केमिकल युक्त रंगों से बचते हुए प्राकृतिक विकल्पों को प्राथमिकता दे रहे हैं। खासकर अभिभावक अपने बच्चों के लिए सुरक्षित हर्बल रंगों की खरीदारी कर रहे हैं, ताकि आंखों और त्वचा को किसी प्रकार का नुकसान न पहुंचे।

4 मार्च को खेली जाएगी होली
बाजार में लाल, गुलाबी, पीले और हरे रंगों की बहार छाई हुई है। पिचकारी, मुखौटे और होली से जुड़ी सजावटी सामग्री भी आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। इस वर्ष 2 मार्च को होलिका दहन किया गया। 3 मार्च को ग्रहण होने के कारण 4 मार्च को रंगों का पर्व होली खेली जाएगी, जिसे लेकर बाजारों में उत्साह और भी बढ़ गया है। प्रशासन ने भी नागरिकों से शांतिपूर्ण और सौहार्दपूर्ण तरीके से होली मनाने की अपील की है।