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अभनपुर से कुरुद के बीच नए ब्रॉडगेज ट्रैक पर स्पीड ट्रेन का ट्रायल बुधवार को सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया है। अब जल्द ही मेमू ट्रेन इस रूट पर दौड़ती नजर आएगी। 

यशवंत गंजीर- कुरुद। नेतृत्व में यदि इच्छाशक्ति हो, तो विकास की राह में आने वाले हर पत्थर को मील का पत्थर बनाया जा सकता है। दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे (SECR) ने अभनपुर से कुरुद के बीच नए ब्रॉडगेज ट्रैक पर स्पीड ट्रेन का ट्रायल सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है। इस सफल परीक्षण के बाद अब जल्द ही मेमू ट्रेन इस रूट पर दौड़ती नजर आएगी।

वर्षों से जिस ब्रॉडगेज लाइन का स्वप्न कुरुद(धमतरी) की जनता देख रही थी, वह श्री चंद्राकर के सतत संघर्ष और केंद्र व राज्य के बीच प्रभावी सेतु बनने के प्रयासों से अब हकीकत में तब्दील हो गया है। अभनपुर से कुरुद के बीच बुधवार को  100 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ी ट्रेन महज एक तकनीकी परीक्षण नहीं, बल्कि पूर्व मंत्री अजय चंद्राकर के उस अडिग विश्वास की जीत है, जिसे उन्होंने विधानसभा से लेकर रेल मंत्रालय की दहलीज तक पूरी प्रखरता के साथ जीवंत रखा था।

धमतरी की प्रगति का नया सूर्योदय 
​रेलवे प्रशासन ने कुरुद से धमतरी के बीच 75 प्रतिशत कार्य पूर्ण होने की पुष्टि की है। अप्रैल 2026 तक ट्रैक बिछाने का लक्ष्य रखा गया है, जिसके बाद मई-जून 2026 तक मेमू ट्रेन सीधे धमतरी शहर तक पहुंचेगी। विकास के इस महायज्ञ में बाधा बन रहे 150 अवैध कब्जों को हटाने का नोटिस भी जारी कर दिया गया है।ट्रायल के दौरान मुख्य इलेक्ट्रिकल इंजीनियर और रेलवे सुरक्षा आयुक्त (CMRS) की उपस्थिति में मिली 'क्लीन चिट' ने यह स्पष्ट कर दिया है कि कुरुद अब आधुनिक रेल तंत्र से जुड़ने के लिए पूरी तरह तैयार है। कुरुद तक रेल की गूंज सुनाने के बाद अब लक्ष्य धमतरी शहर है। 

train speed Trial

​तकनीकी श्रेष्ठता और जन-आकांक्षा का संगम
​रेलवे सुरक्षा आयुक्त (CMRS) द्वारा किए गए निरीक्षण और 90-100 किमी/घंटा की सफल गति ने यह सुनिश्चित कर दिया है कि आने वाला समय धमतरी के लिए आर्थिक और सामाजिक उन्नति का नया द्वार खोलेगा। यह सिर्फ रेल की रफ़्तार नहीं, बल्कि उन हज़ारों आँखों की चमक है जिन्होंने कुरुद के इस 'विकास पुरुष' के नेतृत्व पर भरोसा जताया था।

क्षेत्र के भविष्य का आधार स्तंभ बनेगी यह रेल लाइन
वहीं इस मामले में अजय चंद्राकर, विधायक कुरुद ने कहा कि, धमतरी के जन-अरमानों को पटरियों पर उतारने का जो बीड़ा उठाया गया था, आज वह अपनी मंजिल के बेहद करीब है। यह रेल महज आवागमन का साधन नहीं, बल्कि क्षेत्र के गौरवशाली भविष्य का आधार स्तंभ बनेगी।

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