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बिहार के मुंगेर में 3 लाख के इनामी नक्सली सुरेश कोड़ा उर्फ मुस्तकीम ने आत्मसमर्पण कर दिया है। उसने एसटीएफ के सामने AK-47, AK-56 और 500 कारतूस जमा कराए हैं। उस पर 60 से अधिक मामले दर्ज हैं।

Suresh Koda Naxalite Surrender: बिहार के मुंगेर प्रमंडल में सुरक्षा बलों को बड़ी सफलता हाथ लगी है। बिहार, झारखंड और आसपास के राज्यों में आतंक का पर्याय बन चुका कुख्यात नक्सली सुरेश कोड़ा उर्फ मुस्तकीम अब पुलिस की गिरफ्त में है। उसने न केवल आत्मसमर्पण किया, बल्कि हथियारों का एक बड़ा जखीरा भी पुलिस को सौंपा है।

सुरेश कोड़ा प्रतिबंधित संगठन की स्पेशल एरिया कमेटी का सक्रिय सदस्य रहा है और पिछले 25 वर्षों से फरार चल रहा था। सरकार ने इसकी गिरफ्तारी पर 3 लाख रुपये का इनाम घोषित कर रखा था। मुंगेर डीआईजी (DIG) के समक्ष सुरेश ने औपचारिक रूप से अपने हथियार डाल दिए, जिसे बिहार पुलिस और एसटीएफ (STF) के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि माना जा रहा है।

हथियारों और कारतूसों का बड़ा जखीरा बरामद
सुरेश कोड़ा का आत्मसमर्पण केवल एक व्यक्ति का सरेंडर नहीं है, बल्कि उसने पुलिस को अत्याधुनिक हथियारों की एक बड़ी खेप सौंपी है। उसने एक AK-47, एक AK-56, दो इंसास (INSAS) राइफल और करीब 500 जिंदा कारतूस पुलिस के सुपुर्द किए हैं।

हथियारों के इस जखीरे को देखकर अंदाजा लगाया जा सकता है कि वह नक्सली गतिविधियों में कितनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा था। उसके सरेंडर से मुंगेर, लखीसराय और जमुई के नक्सल प्रभावित इलाकों में पुलिस ने राहत की सांस ली है।

60 से अधिक आपराधिक मामलों में था वांछित
सुरेश कोड़ा का आपराधिक इतिहास काफी लंबा और हिंसक रहा है। उसके विरुद्ध मुंगेर, लखीसराय और जमुई जिले के विभिन्न थानों में हत्या, लूट और पुलिस टीम पर हमले जैसे कुल 60 नक्सली कांड दर्ज हैं। वह लंबे समय से इन जिलों के पहाड़ी इलाकों में छिपकर संगठन का विस्तार कर रहा था।

बिहार एसटीएफ की निरंतर दबिश और सरकार की पुनर्वास नीति के प्रभाव के कारण उसने अंततः हथियार डालने का फैसला किया।

पुनर्वास योजना के तहत मिलेगा लाभ
मुंगेर डीआईजी ने बताया कि सुरेश कोड़ा को सरकार की 'नक्सली आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास योजना' के तहत उचित लाभ दिया जाएगा। इसका उद्देश्य भटक कर अपराध की राह पर गए लोगों को मुख्यधारा में शामिल करना और समाज में उनकी वापसी सुनिश्चित करना है।

अधिकारियों का मानना है कि सुरेश जैसे बड़े चेहरे के सरेंडर के बाद अब अन्य छोटे नक्सली कैडर भी हथियार डालने के लिए प्रेरित होंगे, जिससे राज्य से नक्सलवाद की समाप्ति की दिशा में मजबूती मिलेगी।

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