Bihar Politics: बिहार विधानमंडल के बजट सत्र के दौरान विधान परिषद में उस समय तनावपूर्ण स्थिति बन गई जब ग्रामीण कार्य मंत्री प्रोफेसर अशोक चौधरी और राजद के विधान पार्षद सुनील सिंह के बीच तीखी नोकझोंक शुरू हो गई। मामला मंत्री की शैक्षणिक डिग्री को लेकर उठे सवालों से जुड़ा था। आरोप और पलटवार के बीच सदन में शोर शराबा बढ़ गया, जिसके बाद सभापति को हस्तक्षेप कर व्यवस्था बहाल करनी पड़ी।
पूरक प्रश्न से शुरू हुआ विवाद
चर्चा की शुरुआत किसानों से जुड़े मुद्दे पर हुई। मंत्री अशोक चौधरी ने सरकार की ओर से धान खरीद और किसानों को भुगतान व्यवस्था में सुधार का उल्लेख करते हुए कहा कि राज्य सरकार किसानों के हितों के प्रति संवेदनशील है। उन्होंने दावा किया कि पैक्स के माध्यम से धान खरीद की प्रक्रिया में तेजी आई है और अधिकांश किसानों के खातों में भुगतान भेजा जा चुका है।
इसी दौरान पूरक प्रश्न पूछने वाले सदस्य की जानकारी पर टिप्पणी करते हुए मंत्री ने कहा कि कुछ लोगों को अनाज की खरीद प्रक्रिया की पूरी जानकारी नहीं है। यहीं से विवाद ने राजनीतिक रंग ले लिया।
राजद एमएलसी का पलटवार
मंत्री के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए राजद के एमएलसी सुनील सिंह ने तीखा जवाब दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि जो लोग दूसरों की जानकारी पर सवाल उठा रहे हैं, उनकी खुद की डिग्री संदिग्ध है। उनके इस बयान के बाद सदन में माहौल और अधिक गरमा गया।
अशोक चौधरी ने दी इस्तीफे की चुनौती
आरोपों से आक्रोशित मंत्री अशोक चौधरी ने सदन में खड़े होकर सुनील सिंह को खुली चुनौती दी। उन्होंने कहा कि यदि उनकी डिग्री को नकली साबित किया जाता है तो वे किसी भी कार्रवाई के लिए तैयार हैं, अन्यथा आरोप लगाने वाले सदस्य को अपने पद से इस्तीफा देना चाहिए। उन्होंने आरोप के स्रोत का खुलासा करने की भी मांग की।
सदन के बाहर भी जारी रही बयानबाजी
सत्र समाप्त होने के बाद भी विवाद थमा नहीं। मीडिया से बातचीत में सुनील सिंह ने कहा कि यदि उनके आरोप गलत हैं तो उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए। उन्होंने मंत्री के व्यवहार और राजनीतिक शैली पर भी सवाल उठाए।










