Hari bhoomi hindi news chhattisgarh

जयंतीलाल भंडारी का लेख: चीन को कड़ी चुनौती

कोरोना संकट की वजह से दुनिया में संरक्षणवाद की चुनौती बढ़ते हुए दिखाई दे रही है। ऐसे में भारत सरकार आत्मनिर्भर बनाने के लिए क्रियान्वयन की डगर पर आगे बढ़ी है। चीन से आयात होने वाले दवाइयों के कच्चे माल को भारत में ही तैयार करने के लिए प्रयास हो रहे हैं। अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खिलौना निर्माण का आह्वान करके चीन को कड़ी चुनौती दी है। इससे न केवल देश आत्मनिर्भर बनेगा बल्कि रोजगार के साधनों में भी भारी इजाफा होगा।

महाराष्ट्र में फाइनल ईयर यूनिवर्सिटी परीक्षा अक्टूबर मे हो सकती है आयोजित
X
फाइनल ईयर यूनिवर्सिटी परीक्षा

जयंतीलाल भंडारी

इस समय जब एक ओर पूर्वी लद्दाख में भारतीय सेना द्वारा चीन की सैन्य चालबाजी को लगातार नाकाम करते हुए चीन को जोरदार टक्कर दी जा रही है, वहीं दूसरी ओर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के द्वारा शुरू किया गया आत्मनिर्भर भारत अभियान चीन के लिए बड़ी आर्थिक चुनौती बनता जा रहा है। हाल ही में 30 अगस्त को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मन की बात में आत्मनिर्भरता और लोकल के लिए वोकल पर जोर दिया है। प्रधानमंत्री ने कहा कि वैश्विक खिलौना उद्योग 7 लाख करोड़ रुपये का है, लेकिन भारत की इसमें हिस्सेदारी काफी कम है। आत्मनिर्भर भारत में टॉय इंडस्ट्री को बड़ी भूमिका निभानी है। उन्होंने यह भी कहा कि असहयोग आंदोलन के समय गांधीजी ने कहा था कि यह भारतीयों में आत्मविश्वास जगाने का आंदोलन है। ऐसी ही बात आत्मनिर्भर भारत आंदोलन के साथ भी है।

वस्तुतः यह कोई छोटी बात नहीं है कि विभिन्न क्षेत्रों में देश को आत्मनिर्भर बनाने के लिए सरकार क्रियान्वयन की डगर पर आगे बढ़ी है। चीन से आयातीत होने वाले कई दवाइयों के कच्चे माल को भारत में ही तैयार करने के लिए सरकार रणनीतिपूर्वक आगे बढ़ रही है। रक्षा क्षेत्र में भी विदेशों से भारी मात्रा में आयात होने वाले 101 रक्षा उत्पादों के आयात पर कड़ा प्रतिबंध लगाकर इन्हें देश में ही तैयार करने के निर्णय के साथ आत्मनिर्भर बनने की दिशा में बड़ा कदम है। इसमें कोई दो मत नहीं हैं कि कोरोना संकट की वजह से दुनिया में संरक्षणवाद की चुनौती बढ़ते हुए दिखाई दे रही है। ऐसे में भारत वैश्विक संरक्षणवाद से अपनी अर्थव्यवस्था को बचाने के मद्देनजर आत्मनिर्भरता की डगर को आगे बढ़ाते हुए दिखाई दे रहा है। वैश्विक संरक्षणवाद से देश को बचाने और तेजी से विकास करने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने दो मंत्र दिए हैं। एक, भारत को आत्मनिर्भर बनाने की डगर पर आगे बढ़ाना और दो, लोकल को ग्लोबल बनाकर वैश्विक बाजार में तेजी से कदम बढ़ाकर आगे बढ़ना।

गौरतलब है कि प्रधानमंत्री मोदी ने देश की अर्थव्यवस्था के लिए आत्मनिर्भर भारत अभियान की अहम कड़ी के तौर पर विगत 12 मई 2020 को बड़े आर्थिक पैकेज का ऐलान किया है। वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने पांच किस्तों में 20 लाख करोड़ रुपये से करीब एक लाख करोड़ रुपये ज्यादा यानी 20 लाख 97 हजार 53 करोड़ रुपए के पाँच अलग-अलग ब्यौरे प्रस्तुत किए हैं। इस आर्थिक पैकेज से देश के लिए आत्मनिर्भरता के पांच स्तंभों को मजबूत करने का लक्ष्य रखा गया है। इन पांच स्तंभों में तेजी से छलांग लगाती अर्थव्यवस्था, आधुनिक भारत की पहचान बनता बुनियादी ढांचा, नए जमाने की तकनीक केंद्रित व्यवस्थाओं पर चलता तंत्र, देश की ताकत बन रही आबादी और मांग एवं आपूर्ति चक्र को मजबूत बनाना शामिल है। निसंदेह नए आर्थिक पैकेज के माध्यम से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को आत्मनिर्भर भारत की बुनियाद बनाने का रणनीतिक कदम आगे बढ़ाया गया है। सरकार ने आर्थिक पैकेज में खेती-किसानी पर जोर देकर किसानों को बेहतर मूल्य दिलाने की कवायद की है। नि:संदेह भंडार गृहों और यार्ड जैसे बुनियादी ढांचे के लिए एक लाख करोड़ रुपये का कोष, अत्यधिक महत्वपूर्ण कदम है। पशुपालन बुनियादी ढांचा विकास फंड से भारत की मौजूदा डेरी क्षमता तेजी से बढ़ेगी। इसी तरह किसानों को कृषि उत्पाद मंडी समिति के माध्यम से उत्पादों को बेचने की अनिवार्यता खत्म होने और कृषि उपज के बाधा रहित कारोबार से बेहतर दाम पाने का मौका मिलेगा।

स्पष्ट दिखाई दे रहा है कि कोविड-19 के बीच तेजी से आगे बढ़े कृषि सुधारों से भी ग्रामीण क्षेत्रों की आत्मनिर्भरता का एक छिपा हुआ अवसर आगे बढ़ा है। देश में खेती करने के परंपरागत तौर-तरीकों में बड़ा बदलाव आया है। निश्चित रूप से कोरोना संकट के बीच दुनियाभर में भारत की प्रतिष्ठा बढ़ी है ऐसे में हम देश में मेक इन इंडिया अभियान को आगे बढ़ाकर लोकल प्रॉडक्ट को ग्लोबल बना सकते हैं। आज दुनियाभर में विभिन्न वस्तुओं के उत्पादन करने वाली भारत की कई कंपनियां चमकीली पहचान बनाए हुए हैं। यदि हम पेट्रोलियम प्रोडक्ट, गुगल, फेसबुक जैसी टेक कंपनियों को छोड़ दें तो अधिकांश क्षेत्रों में हमारे लोकल प्रोडक्ट ग्लोबल बनने की पूरी संभावनाएं रखते हैं। चूंकि इस समय दुनिया में दवाओं सहित कृषि, प्रोसेस्ड फूड, गारमेंट, जेम्स व ज्वैलरी, लेदर एवं लेदर प्रोडक्ट, कारपेट और इंजीनियरिंग प्रोडक्ट जैसी कई वस्तुओं की भारी मांग है, अत: इन क्षेत्रों में हमारे लोकल प्रोडक्ट देखते ही देखते ग्लोबल भी बन सकते है।

जब हम देश को आत्मनिर्भर बनाने के मामले में विभिन्न चुनौतियों को देखते हैं तो पाते हैं कि कई वस्तुओं का उत्पादन बहुत कुछ आयातित कच्चे माल और आयातित वस्तुओं पर आधारित है। खासतौर से दवाई उद्योग, मोबाइल उद्योग, चिकित्सा उपकरण उद्योग, वाहन उद्योग तथा इलेिक्ट्रक जैसे कई उद्योग। इस समय मैन्युफैक्चरिंग इकाइयों के लिए बड़ी मात्रा में कच्चा माल चीन से आयात किया जाता है। इसके अलावा कई उद्योगों के लिए कच्चे माल का आयात दुनिया के कई देशों से किया जाता है। अत: सबसे पहले देश में ऐसे कच्चे माल का उत्पादन शुरू किया जाना होगा। जिनका हम अभी बड़ी मात्रा में आयात कर रहे हैं। यह कोई सरल काम नहीं है। क्योंकि ऐसे विशिष्ट कच्चे माल के उत्पादन में विशेष कुशलता के साथ-साथ बड़ी मात्रा में संसाधनों की जरूरत होगी। इसके अलावा आत्मनिर्भरता की डगर पर एक बड़ी चुनौती देश में लॉजिस्टिक सेवाओं की सरलता और नए उपयुक्त बुनियादी ढांचे से भी संबंधित है। स्पष्ट दिखाई दे रहा है कि इन सबके लिए सरकार अधिक रणनीतिक प्रयासों और भारी संसाधनों के आवंटन के साथ दृढ़ संकल्पित होकर आगे बढ़ी है।

निस्संदेह देश को आत्मनिर्भर बनाने और देश की वैश्विक तस्वीर को चमकीली बनाने के लिए हमें स्थानीयता पर जोर देना होगा। निश्चित रूप से एक ओर ग्रामीण भारत में बेहतर कृषि, पशुपालन और ग्रामीण उद्योगों से हम आत्मनिर्भरता का एक कदम आगे बढ़ाते हुए विभिन्न ग्रामीण लोकल प्रोडक्ट को भी ग्लोबल बना सकते हैं। वहीं दूसरी ओर शहरी भारत में प्रतिभाशाली नई पीढ़ी, वैज्ञानिक प्रगति और उद्योग-कारोबार के विकास से हम आत्मनिर्भरता का दूसरा कदम आगे बढ़ाते हुए विभिन्न शहरी लोकल प्रोडक्ट को भी ग्लोबल बना सकते है। हम उम्मीद करें कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के आत्मनिर्भरता के मंत्रों से उद्योग-कारोबार और ग्रामीण अर्थव्यवस्था में नई जान फूंकी जा सकेगी और लोकल उत्पादों को ग्लोबल उत्पादों में भी बदलने की संभावनाएं बढ़ेगी।

हम उम्मीद करें कि आत्मनिर्भरता की डगर पर आगे बढ़ने के लिए जो विभिन्न चुनौतियाँ दिखाई दे रही हैं, उन चुनौतियों के उपयुक्त समाधान से ग्रामीण और शहरी भारत के अमूल्य संसाधनों का पूर्ण उपयोग हो सकेगा। ऐसा होने पर देश आत्मनिर्भर बनने और लोकल प्रोडक्ट को ग्लोबल बनाने की डगर पर आगे बढ़ते हुए दिखाई दे सकेगा। साथ ही ऐसा सुकूनभरा आत्मनिर्भरता का परिदृश्य चीन के लिए बढ़ी आर्थिक चुनौती साबित होगा।

Next Story