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प्रभात कुमार रॉय का लेख : जी-7 से चीन को सख्त संदेश

जी 7 देशों की कतार में अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, जापान और इटली शामिल हैं। जी 7 के 44वें सम्मेलन में इस दफा आस्ट्रेलिया, भारत और दक्षिण कोरिया को विशेष तौर पर आमंत्रित किया गया। इस सम्मेलन का सबसे अहम पहलू रहा कि जी 7 देशों ने चीन के विरुद्ध अपनी एकजुटता का शानदार प्रदर्शन किया। जी 7 सम्मेलन में ताइवान पर चीन की आक्रामक रणनीति की कठोर आलोचना की गई। जी 7 देशों द्वारा कोविड 19 वायरस की चीन के वुहान शहर की बायलॉजिकल लैब में उत्पत्ति के संगीन आराप की भी गहनता के साथ जांच की आवश्यकता पर जोर दिया गया।

प्रभात कुमार रॉय का लेख :  जी-7 से चीन को सख्त संदेश
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प्रभात कुमार रॉय 

प्रभात कुमार रॉय

जी- 7 देशों का 44वां तीन दिवसीय शिखर सम्मेलन 11 से 13 जून तक ब्रिटेन सरकार की मेजबानी में कार्नवाल में आयोजित किया गया। जी 7 वस्तुतः विश्व के सबसे अधिक विकसित और संपन्न देशों का एक अंतरराष्ट्रीय रणनीतिक मंच है, जिसकी स्थापना 1975 में की गई थी। जी 7 देशों की कतार में अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, जापान और इटली शामिल हैं। जी 7 के 44 वें सम्मेलन में इस दफा आस्ट्रेलिया, भारत और दक्षिण कोरिया को विशेष तौर पर आमंत्रित किया गया। इस सम्मेलन का सबसे अहम पहलू रहा कि जी 7 देशों ने चीन के विरुद्ध अपनी एकजुटता का शानदार प्रदर्शन किया।

जी 7 सम्मेलन में चीन की कम्युनिस्ट सरकार द्वारा अपने शिनजियांग प्रांत में वीगर मुसलमानों द्वारा ढाए जा रहे अमानवीय जुल्मों की कड़े शब्दों में भर्त्सना की गई। हांगकांग में स्वायत्तता और जनतंत्र के समर्थकों पर किए जा रहे अत्याचारों की भी निंदा की गई। चीन पर आरोप लगाया गया कि हांगकांग पर उसके द्वारा ब्रिटेन के साथ 1997 में की गई, अंतरराष्ट्रीय संधि का घोर उल्लंघन किया जा रहा है। उल्लेखनीय है कि इस संधि के तहत हांगकांग की स्वायत्ता को 2047 तक बाकायदा बरकरार रखा जाना था। जी 7 सम्मेलन में ताइवान पर चीन की आक्रामक रणनीति की कठोर आलोचना की गई। जी 7 देशों द्वारा कोविड 19 वायरस की चीन के वुहान शहर की बायलॉजिकल लैब में उत्पत्ति के संगीन आराप की भी गहनता के साथ जांच पड़ताल करने की आवश्यकता पर जोर दिया गया। कुल मिलाकर ऐसा प्रतीत होता है कि जी 7 देशों ने चीन के विरुद्ध एकजुटता प्रदर्शित करने का निर्णायक संकल्प ले लिया है।

ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने ऐलान किया कि जी 7 देशों ने अगले वर्ष तक कोविड वैक्सीन की 1 अरब डोज़ देने का निर्णय किया है। बोरिस जॉनसन ने कहा कि जी 7 देश महामारी के दौर में शुरुआत के राष्ट्रवादी और खुदगर्जी के रुख से अब आगे बढ़ना चाहते हैं। ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री गॉर्डन ब्राउन ने जी 7 सम्मेलन को 'एक खोया हुआ अवसर' करार दिया और कहा कि जब जी 7 देशों को कोविड वैक्सीन की 11 अरब खुराक प्रदान करनी चाहिए, तब सिर्फ 1 अरब खुराक प्रदान करने का ऐलान किया गया। जब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर टीकाकरण के लिए 50 अरब डॉलर देने चाहिए, लेकिन केवल 5 अरब डॉलर देने की घोषणा हुई। जब दुनिया के सबसे अधिक दौलतमंद देश सम्मेलन कर रहे थे और उनके पास दुनिया के लिए बहुत कुछ करने की ताकत भी विद्यमान है।

ऐसा प्रतीत होता है कि यह जी 7 देशों का सम्मेलन वस्तुतः नैतिक तौर पर नाकाम है। जी 7 सम्मेलन के सत्र 'बिल्डिंग बैक स्ट्रॉन्गर हेल्थ' में तक़रीर करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि कोविड 19 महामारी के विरुद्ध जारी वैश्विक संग्राम में निर्णायक फतह हासिल करने के लिए 'वन अर्थ, वन हेल्थ' की रणनीति को अख्त्यार किया जाना चाहिए। मोदी ने कहा कि महामारी की विकटता और व्यापकता के दृष्टिगत जी-7 समूह के देश को कोविड-19 वैक्सीन के लिए पेटेंट सुरक्षाओं को तत्काल समाप्त कर देना चाहिए। कोविड के विरुद्ध विश्वव्यापी संग्राम में भारतीय प्रधानमंत्री ने वैश्विक साझेदारी, सामूहिक नेतृत्व और अंतरराष्ट्रीय समन्वय स्थापित करने की दरयाफ्त की। प्रधानमंत्री मोदी द्वारा पेश की गई वन अर्थ, वन हेल्थ की वैश्विक रणनीति को अख्त्यार करने के सुझाव का जर्मन चांसलर एंजिला मर्केल ने समर्थन किया। ऑस्ट्रेलिया सहित अनेक अन्य देशों ने प्रधानमंत्री मोदी की कोरोना वायरस के पेटेंट सुरक्षा खत्म करने की मांग का समर्थन किया, ताकि वैक्सीन के उत्पादन में तेज़ी आए।

जी 7 शिखर सम्मेलन में अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने कहा कि कोविड महामारी के बाद की दुनिया में लोकतांत्रिक देशों और तानाशाही व्यवस्था वाले देशों के मध्य सीधे संघर्ष की विकट स्थिति बन गई है। इटली के प्रधानमंत्री मारियो द्रागी ने कहा कि जी 7 देशों और चीन के मध्य उभरे तीखे मतभेदों पर खुलकर बात करनी चाहिए। जी 7 शिखर सम्मेलन द्वारा विश्वपटल पर एक स्थिति स्पष्ट तौर पर उभर कर आई है कि दुनिया पुनः शीतयुद्ध के क़गार पर आकर खड़ी हो गई है, जबकि एक तरफ अमेरिका की कयादत में पश्चिम के विकसित देश एकजुट हो रहे हैं और दूसरी तरफ चीन के नेतृत्व में रूस, ईरान आदि अनेक देश सन्नद हो रहे हैं। चीन ने वन बेल्ट एंड वन रोड परिजोयना (बीआरआई) तहत अनेक विकासशील देशों में बुनियादी ढांचे मुख्यतः ट्रेनों, सड़कों और बंदरगाहों को उन्नत करने के लिए आर्थिक निवेश अंजाम दिया है, लेकिन इस बात को लेकर चीन की आलोचना भी होती है कि उसने अनेक देशों को कर्ज़ में दबाने के बाद, उन पर तानाशाही थोपने की कोशिश की है। विश्वपटल पर चीन को सीधी टक्कर देने की चाहत में अब जी 7 देशों ने निम्न और मध्यम आय वाले विकासशील देशों को आर्थिक समर्थन देने की योजना की पेशकश की गई, जिसके तहत जी 7 देश विश्व के गरीब देशों को बेहतर बुनियादी ढांचा खड़ा करने में मदद करेंगे। हालांकि, इस बारे में अभी कोई स्पष्ट तौर पर जानकारी नहीं दी गई है कि आखिरकार जी 7 देशों की आर्थिक योजना के तहत विकासशील देशों का किस तरह से वित्‍तीय परिपोषण किया जाएगा। अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने कहा कि चीनी योजना के समक्ष अमेरिका द्वारा समर्थित बिल्ड बैक बेटर वर्ल्ड योजना (बी3डब्ल्यू) एक उच्च गुणवत्ता वाले विकल्प के तौर पर खड़ी होगी। जी 7 देशों के लीडरों ने एक संयुक्त बयान में कहा कि 'वो मूल्यों द्वारा संचालित, उच्च-मानकों वाली, पारदर्शी साझेदारी योजना की पेशकश करेंगे।'

जी 7 सम्मेलन को संबोधित करते हुए जैसा कि प्रधानमंत्री मोदी ने कहा है कि जी 7 देश भारत के स्वाभाविक तौर पर सहयोगी देश है, किंतु इस स्वाभाविक मित्रता के मध्य भारत का सबसे स्वाभाविक मित्र देश रूस भी खड़ा है, जिसको 1988 में जी 7 में शामिल किया गया, किंतु क्रिमिया संकट के पश्चात 2014 में रूस को जी 7 की सदस्यता से बर्खास्त कर दिया गया। वक्त की दरकार है कि विकसित देशों के समूह जी 7 में विश्व के कुछ अन्य संपन्न देशों को शामिल किया जाना चाहिए। रूस को फिर से जी 7 का सदस्य देश बनाने से शीतयुद्ध की विकट गरमी को कुछ शांत किया जा सकेगा और पश्चिमी देशों को रूस के साथ अपनी दुश्मनी खत्म करने का अवसर उपलब्ध हो सकेगा। विश्वपटल पर चीन की आक्रमता पर लगाम कसी जा सकेगी, जो रूस की प्रगाढ़ दोस्ती के दमखम पर विकराल होती जा रही है। एशिया के संपन्न देशों में कुछ विशिष्ट अरब देशों को शामिल किया जा सकता है। इससे जी 7 को प्रोन्नत करके जी 11 में परिवर्तित किया जा सकता है। विश्व की बड़ी अर्थव्यवस्था वाले देश भारत और ब्राजील को भी जी 7 में शामिल किया जाना चाहिए, ताकि संकीर्णता के दायरे में घिरा हुआ जी 7 विराट बन सके।

(ये लेखक के अपने विचार हैं।)

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