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व्यंग्य : वो सहयोगियों को गिराने के लिए 'तनाव परोसते हैं'

डॉ. अतुल चतुर्वेदी | UPDATED Jan 29 2019 3:36PM IST
व्यंग्य : वो सहयोगियों को गिराने के लिए 'तनाव परोसते हैं'

तनाव आज का मुख्य ग्लैमर है। वो आदमी ही क्या जिसे तनाव न हो। तनाव है तो आप व्यस्त हैं, महत्वपूर्ण हैं। आपकी समाज में पूछ-परख है। एक अच्छा तनावी आदमी वो होता है जो न केवल तनाव जीता है बल्कि उसे मुक्त हस्त से बांटता भी है। आपकी काबिलियत और कार्य क्षमता का मूल्यांकन आपका बॉस इस आधार पर ही करता है कि आप अपने अधीनस्थों को कितना तनाव बांट पाए।

आजकल वयस्क ही नहीं बच्चे और युवा तक तनाव ओढ़ बिछा रहे हैं। गोया यह अलग बात है कि ये तनाव गर्ल फ्रेंड रूठने या डेटा खत्म होने जैसे टटपूंजिए हो सकते हैं। लेकिन मासूमों की दुनिया में हमने तनावों की बाधा दौड़ ही शुरू कर दी है।

होम वर्क से लेकर क्लास में अव्वल आने तक के टेंशनों के शिखर उसे लगातार लांघने हैं, लेकिन इन सबके बावजूद उसकी दुनिया में सतोलिया, आइस पाइस और गुल्ली डंडा जैसी खुशनुमा बहारें गायब हैं। वो भावी तनावी में आहिस्ता आहिस्ता रूपांतरित हो रहा है।

एक भरपूर तनावी ही जीवन में सफल कहा जा सकता है। उसका जीवन उपलब्धियों का जीवन कहा जाता है। तनाव विरासत है अगली पीढ़ी में बोइए, तनाव फैशन है जी भर कर ढोइए। कुछ लोग जन्मजाती टेंशनिए होते हैं तो कुछ राह चलते बटोर लेते हैं अब ये तो आपकी प्रतिभा पर निर्भर करता है।

एक अच्छा तनावी व्यक्ति वो होता है जो सदा माहौल में किच-किच बनाए रखता है और रिश्तों को ठेंगे पर रख कर सिद्धान्तों का तड़का लगाता रहता है। आज ऐसे महामनाओं की वजह से तनाव का कारोबार चरम पर है।

प्रबंधन गुरू एक तरफ कुशल मैनेजमेंट के फंडों पर किताबें लिख रहे हैं तो दूसरी ओर तनाव घटाने पर कार्यशालाएं भी ले रहे हैं। उनके दोनों हाथों में लड्डू हैं। जितना तनाव बढ़ेगा उतना ही मेडीकल जांचों का दायरा बढ़ेगा और उतना ही कमीशन का बिल और सपरिवार सैर-सपाटे भी।

तनाव कारोबार में तब्दील हो रहा है। उससे चांदी कूटने की तैयारी जोरों पर है। एक तरफ योगा, प्राणायम, जिम की सलाहें हैं तो दूसरी तरफ टारगेट का एवरेस्ट छूने की चुनौती।

तनाव की बंदिशें यहां तक लोकप्रिय हो गई हैं कि अब यह व्यक्तियों से उतर कर संस्थाओं के आपसी रिश्तों तक में शोर मचा रहा है और टेंशन का गीत हर जुबां पर लोकप्रिय है।

संस्थाओं की तनावों की खबरें मीडिया की सुर्खी बन रही हैं और तनाव का सेंसेक्स आसमान छू रहा है। इससे अगर देश की छवि और व्यवस्था को बट्टा लगता हो तो लगे, तनाव का तो काम ही है ध्वंस करना और वो बखूबी अपनी बदलती भूमिका नए जमाने में निभा रहा है।

क्या कहा आपको कोई तनाव नहीं? तो बस एक अदद क्रेडिट कार्ड या सोशल मीडिया की बहस में हिस्सा ले लीजिए आप तनावों के पोखर में दिन रात स्नान करते मिलेंगे। आधुनिक जीवन शैली अपनाएं और तनाव को घर ले जाएं। वहां दिल की दवाएं आपकी बेसब्री से प्रतीक्षा कर रही हैं।


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