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जिन्ना विवादः शैक्षणिक संस्थाओं में राजनीति और धर्म हावी? सवाल तो उठेंगे ही

पहले सवाल उठा कि अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में जिन्ना की फोटो क्यों लगी है? दूसरे पक्ष ने जवाब देते हुए सवाल पूछा कि भारत के इतिहास में उनका योगदान है तो फोटो क्यों न लगाएं?

जिन्ना विवादः शैक्षणिक संस्थाओं में राजनीति और धर्म हावी? सवाल तो उठेंगे ही
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सवाल ये है कि अचानक इतने सवाल क्यों उठने लगे हैं तो जवाब ये है कि सवालों का तो काम ही है उठना। पहले सवाल उठा कि अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में जिन्ना की फोटो क्यों लगी है? दूसरे पक्ष ने जवाब देते हुए सवाल पूछा कि भारत के इतिहास में उनका योगदान है तो फोटो क्यों न लगाएं?

देशभर की कलमें, कैमरे और सोशल मीडिया के सिपाही इसके पक्ष और विपक्ष में जुबानी जंग में लग गए। तभी जामिया मिलिया इस्लामिया के सामने जिन्ना के विरोध में एक प्रदर्शन हो गया और तब जामिया प्रशासन ने ये सवाल उठाया कि जब जामिया में जिन्ना की कोई तस्वीर या उससे संबंध है ही नहीं तो फिर जामिया के सामने ये विरोध प्रदर्शन क्यों?
इसका जवाब भी एक सवाल में ही छुपा हुआ है। सवाल ये की जब जामिया का जिन्ना से कोई संबंध ही नहीं तो फिर जामिया के छात्र #jamiastandwithamu के हैशटैग के साथ अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सटी के छात्रों के समर्थन में लगातार कई दिनों से जामिया में प्रदर्शन क्यों कर रहे थे?
नई दिल्ली में जामिया मिलिया इस्लामिया के मेन गेट पर मंगलवार शाम को करीब दो दर्जन प्रदर्शनकारियों ने नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों ने यहां 'जिन्ना प्रेमी भारत छोड़ो' और 'वंदे मातरम' के नारे लगाए। उनका आरोप था कि जामिया परिसर में दो हिंदू छात्रों की पिटाई की गई है जिसके विरोध में भी इस प्रदर्शन को किया गया।
हालांकि, कुछ देर नारेबाजी करने के बाद प्रदर्शनकारी वापस चले गए लेकिन छोड़ गए एक सवाल की क्या जामिया परिसर में छात्रों के साथ धर्म के आधार पर भेदभाव या दबंगई की जाती है? इस मुद्दे को लेकर भी सोशल मीडिया के लड़ाकों के बीच जंग का माहौल है। कोई इसके समर्थन में तर्क दे रहा है तो कोई विरोध में।
एक प्रतिष्टित न्यूज़ चैनल के एंकर और पूर्व जामिया छात्र अनूप आकाश वर्मा ने सोशल मीडिया पर इसी संबंध में एक पोस्ट लिखते हुए इस बात का जिक्र किया है कि जब 2008 में वो जामिया आये थे तो उनके माथे पर तिलक देखते हुए उनके किसी सीनियर छात्र ने कहा थे कि ये सब यहां नहीं चलेगा। इस बात की गहराई में जाया जाए तो जो आरोप लग रहे हैं वो सही भी हो सकते हैं। इसी बीच जामिया को हिन्दुओं के लिए असुरक्षित बताने का भी प्रयास किया जा रहा है जो संभवतः गलत है। अभी भारत सीरिया नहीं बना है।
मैं खुद जामिया का विद्यार्थी रहा हूं, तीन साल में कई खट्टे-मीठे अनुभव भी हैं और उन सबके आधार पर कह सकता हूं कि हिन्दू छात्रों के पिटाई का जो मामला उठाया जा रहा है वो झूठा ही हो ऐसा संभव नहीं है। प्रशासन को इसकी गंभीरता को देखते हुए जांच करके सुनिश्चित करना चाहिए कि दोषियों के खिलाफ एक्शन लिया जाए और ऐसे किसी दुर्घटना की पुनरावृत्ति न हो जिससे जामिया मिलिया इस्लामिया के गंगा-जमुनी तहजीब वाले साख पर कोई आंच आए।

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