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आतंकवाद पर पाकिस्तान विश्व में फिर बेनकाब

पाकिस्तान में आतंकी गुट हक्कानी नेटवर्क के ठिकानों पर अमेरिकी ड्रोन हमले में हक्कानी के दो कमांडर समेत कई आतंकियों के मारे जाने से पाक सरकार का झूठ एक बार फिर उजागर हो गया है कि वहां आतंकवादियों को पनाह नहीं मिली हुई है।

आतंकवाद पर पाकिस्तान विश्व में फिर बेनकाब
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पाकिस्तान में आतंकी गुट हक्कानी नेटवर्क के ठिकानों पर अमेरिकी ड्रोन हमले में हक्कानी के दो कमांडर समेत कई आतंकियों के मारे जाने से पाक सरकार का झूठ एक बार फिर उजागर हो गया है कि वहां आतंकवादियों को पनाह नहीं मिली हुई है। दुनिया से पाक बार-बार कहता रहा है कि उसके यहां किसी भी आतंकी गुट को आश्रय नहीं मिला हुआ है और न ही वह पड़ोसियों के खिलाफ आतंकवाद का इस्तेमाल करता है।

अमेरिकी हमले के बाद यह साफ हो गया कि पाक ने आतंकियों को पनाह दी हुई है। यह पहली बार नहीं है जब पाकिस्तान का झूठ बेनकाब हुआ है। यूएस में 26/11 हमले के दोषी ओसामा बिन लादेन को लेकर भी पाक झूठ बोलता रहा कि वह उसके यहां नहीं है, जबकि वह पाक के सुरक्षित सैन्य इलाके एबटाबाद में मिला था। ओसामा को पाक ने सुरक्षित पनाह दे रखी थी।

अमेरिका ने खोज निकाला था और सर्जिकल स्ट्राइक कर पाक में घुसकर ओसामा को मारा था। इतना ही नहीं अंतरराष्ट्रीय घोषित आतंकवादी हाफिज सईद पाक हुक्मरानों की सरपरस्ती में है। जैश सरगना मसूद अजहर, हिज्बुल सरगना सैयद सलाहुद्दीन समेत हजारों आतंकी पाक में हैं। पाक सरकार के आंकड़े के मुताबिक छोटे-बड़े 32 आतंकी गुट उसके मुल्क में सक्रिय हैं।

संयुक्त राष्ट्र और अमेरिका के बार-बार कहने के बावजूद पाकिस्तान अपने यहां के आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई करने में आनाकानी करता रहा है। उल्टे पाक फौज और उसकी खुफिया एजेंसी आईएसआई आतंकियों को प्रशिक्षण और संरक्षण देती रही हैं। आतंकवाद पर पाकिस्तान के ढुलमुल रवैये को देखकर कहा जा सकता है कि आर्थिक मदद रोकने के पीछे अमेरिका की नाराजगी जायज ही थी।

अमेरकी प्रशासन ने कहा था कि 15 साल के दौरान पाक को आतंकवाद के सफाये के लिए 33 अरब डालर की सहायता देना यूएस की मूर्खता था। अब दुनिया जान चुकी है कि अमेरिकी पैसे से पाक भारत और अफगानिस्तान के खिलाफ आतंकवाद का इस्तेमाल कर रहा था। अप्रत्यक्ष रूप से पाक ने अमेरिका को भी नहीं छोड़ा। 26/11 के दोषियों को पनाह देने में उसे जरा भी हिचक नहीं हुई।

अफगानिस्तान में सक्रिय आतंकी गुटों- हक्कानी नेटवर्क, तहरीके तालिबान, लश्कर-ए-झंगवी, अलकायदा आदि को पाक ने पनाह दिया हुआ है। अब अमेरिकी ड्रोन हमले के बाद आतंकवाद को लेकर पाकिस्तान का असली चेहरा बेनकाब हुआ है। आतंकवाद प्रेम ने ही पाक को समूची दुनिया में अलग-थलग कर दिया है। संयुक्त राष्ट्र में अनेक बार आतंक पर पाक के झूठ की पोल खुल चुकी है।

इस वक्त कोई भी देश पाक से रिश्ता नहीं रखना चाहता है। एक मात्र चीन अगर उसका दोस्त बना हुआ है, तो वह इसलिए कि चीन की आर्थिक व सामरिक मजबूरियां हैं। सीपेक की वजह से चीन पाक के साथ है। भारत को तनाव देने के मकसद से चीन मसूद अजहर मसले पर पाक के साथ है, लेकिन आतंकवाद पर वह साथ नहीं है। पिछले साल ब्रिक्स सम्मेलन ने जब अपने साझा घोषणा पत्र में आतंकवाद की निंदा की और आतंकवाद के खिलाफ साझा जंग का संकल्प लिया तब चीन उस संकल्प के साथ था।

भारत के साथ वार्ता में भी चीन आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई का साझा ऐलान करता रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बार-बार कहने के बावजूद पाक ने आतंकियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की। पाक कश्मीर सीमा पर भी लगातार सीजफायर तोड़ता रहा है। एक साल में साढ़े आठ सौ बार संघर्ष विराम का उल्लंघन किया है। भारत से मुंहतोड़ जवाब मिलता है, तब भी पाक सुधरने का नाम नहीं लेता है।

संयुक्त राष्ट्र की टीम 26/11 मुंबई हमले का मास्टरमाइंड आतंकी हाफिज सईद पर कार्रवाई का जायजा लेने पाक जा रही है। यूएन ने कहा था कि हाफिज सईद पर पाक सरकार कार्रवाई करे, लेकिन नया पैतड़ा चलते हुए पाक कोर्ट ने हाफिज सईद की गिरफ्तारी पर रोक लगा दी। पाक सरकार से संकेत है कि यूएन की टीम को आतंकी सईद से नहीं मिलने दी जाएगी।

आतंकवाद पर यह पाकिस्तान का असली चेहरा है। यह नहीं भूलना चाहिए कि पाक अधिकृत कश्मीर (पीओके) में भी पाक के कई टेरर कैंप हैं, जिसमें आतंकियों को पाक फौज प्रशिक्षण देती है। पाकिस्तान के आतंकवाद से विश्व बिरादरी वाकिफ हो गई है। अमेरिका अगर वाकई में पाकिस्तान से आतंकवाद के सफाये के लिए गंभीर है तो उसे इस तरह के ड्रोन हमले करते रहने पड़ेंगे। इसके अलावा पाक को आतंकी राष्ट्र घोषित करने के साथ ही उस पर पूर्ण प्रतिबंध भी लगाना होगा।

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