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चिंतन: आतंकवादी के सर्मथन में हिंसा करना जायज नहीं

कश्मीर में किसी आतंकी के मारे जाने के बाद अर्से बाद इतने बड़े पैमाने पर भीड़ हिंसक हुई है।

चिंतन: आतंकवादी के सर्मथन में हिंसा करना जायज नहीं
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नई दिल्ली. कश्मीर में किसी आतंकी के मारे जाने के बाद जिस तरह भीड़ उग्र हुई है और पुलिस व सेना के साथ हिंसक झड़पें की हैं, यह चिंता की बात है। ऐसा पहली बार नहीं है कि पुलिस या सेना की कार्रवाई में कोई आतंकी मारा गया है। इससे पहले सैकड़ों आतंकी मारे जा चुके हैं, लेकिन किसी आतंकी के मारे जाने के बाद पुलिस व सेना के खिलाफ अर्से बाद इतने बड़े पैमाने पर भीड़ हिंसक हुई है।
आतंकी के सर्मथन में इस तरह भीड़ का हिंसक होना कतई जायज नहीं ठहराया जा सकता है। इस भीड़ के रूप में हिंसा में कौन शामिल हैं और उनको ताकत कहां से मिलती है, यह किसी से छिपा नहीं है। कश्मीर में जिस तरह सीमा पार से आतंकवाद को शह दी जाती है, अलगाववादी गुटों व लोगों को सरपरस्ती दी जाती है, यह जगजाहिर है।
पाकिस्तान की पूर्व विदेश मंत्री हिना रब्बानी खार स्वीकार कर चुकी हैं कि 1965, 1971 और करगिल युद्ध कश्मीर पर कब्जे के लिए ही पाक ने लड़ीई की थी। देश की आजादी के समय, बंटवारे के बाद से ही पाकिस्तान की नजर कश्मीर पर है। लेकिन दुनिया जानती है कि कश्मीर की स्वेच्छा से उसका भारत में विलय हुआ था। इस स्वैच्छिक विलय को भी पाकिस्तान कभी पचा नहीं पाया है। कश्मीर को लेकर लगातार भारत से उलझा हुआ है।
भारत से अपनी हार-दर-हार के चलते खींझ में पाकिस्तान इस कदर अंधा बन चुका है कि मुस्लिम बहुल कश्मीर घाटी में आतंकवाद को बढ़ावा देना अपनी राष्ट्रीय नीति बना लिया है। जबकि पाक मुस्लिमों की भलाई के नाम पर ही अलग हुआ था।
जिस पैसे से पाकिस्तान अपने देश की गरीबी दूर कर सकता था, उस पैसे को कश्मीर में आतंकवाद को आंजाम देने पर खर्च कर रहा है, जबकि पाकिस्तान को यह सच मान लेना चाहिए कि वह कभी भी कश्मीर हासिल नहीं कर पाएगा। वहां की जनता ही पाक को नकार चुकी है। जो लोग और गुट पाकिस्तान की बदनीयती की कठपुतली बन कर आतंक में शामिल हैं, उन्हें भी सोचना चाहिए कि उन्हें मौत के सिवा क्या मिल रहा है?
आतंकी गुट हिज़्बुल मुजाहिदीन लगभग मिट चुका था। इसको फिर से एक्टिव करने वाला आतंकी बुरहान वानी था। वह पाक की मदद से ही हिज़्बुल को खड़ा किया था और कश्मीर में आतंकी वारदात को अंजाम दे रहा था। हिज्बुल कमांडर के रूप में वानी ने कितने बेकसूरों को मौत के घाट उतारा था। कश्मीर पुलिस ने बुरहान पर दस लाख का इनाम रखा था। निश्चित ही बुरहान का एनकाउंटर में मारा जाना हमारे सुरक्षा बलों की बड़ी कामयाबी है।
अब सुरक्षा बलों और राज्य व केंद्र सरकार की बड़ी चुनौती कश्मीर घाटी में शांति बहाल करने की है। इसके लिए गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने उच्च स्तरीय बैठक की है और कश्मीर सरकार ने एहतियातन र्शीनगर के 11 पुलिस थाना क्षेत्रों में कफ्यरू लगा दिया है और हिंसा प्रभावित क्षेत्र पुलवामा, अनंतनाग, शोपियां व कुलगाम में मोबाइल व नेट सेवा बंद कर दी गई है।
सीएम महबूबा की चुनी हुई सरकार है और घाटी में उनकी पार्टी को भारी बहुमत मिला था, इसलिए उम्मीद की जानी चाहिए कि महबूबा सरकार को स्थिति को काबू करने में ज्यादा दिक्कत नहीं होगी। भटके हुए कश्मीरी युवाओं को भी हिंसा व आतंक की राह छोड़ कर शिक्षा और रोजगार के बारे में सोचना चाहिए। हिंसा से आज तक किसी को भी कुछ हासिल नहीं हो सका है। उन्हें केंद्र व राज्य सरकार की विकास योजनाओं का भागीदार बनना चाहिए।
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