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आलोक पुराणिक का लेख : मांग बढ़ाने को जरूरी था पैकेज

अर्थव्यवस्था को सुधारने के लिए दो पैकेजों की घोषणा से एक बात तो साफ होती है कि केंद्र सरकार (central government) को बखूबी एहसास है कि आर्थिक चुनौतियां बहुत गहरी हैं। पीएम गरीब कल्याण पैकेज 1,92,800 करोड़ रुपये का रहा। आत्मनिर्भर भारत अभियान का पहला पैकेज 11 लाख करोड़ रुपये का रहा। आत्मनिर्भर भारत अभियान का दूसरा पैकेज 73,000 करोड़ रुपये का रहा। आत्मनिर्भर भारत अभियान का तीसरा पैकेज 2,65,080 करोड़ रुपये का रहा। रिजर्व बैंक का पैकेज 31 अक्तूबर तक 12,71,200 करोड़ रुपये का रहा। अब ये पैकेज हर स्तर पर अगर मांग को बढ़ा दें, तो अर्थव्यवस्था के हाल आने वाले समय में बेहतर हो जाएंगे।

आलोक पुराणिक का लेख : मांग बढ़ाने को जरूरी था पैकेज
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दो दिनों में अर्थव्यवस्था को सुधारने के लिए दो पैकेजों की घोषणा से एक बात तो साफ होती है कि केंद्र सरकार (central government) को बखूबी एहसास है कि आर्थिक चुनौतियां बहुत गहरी हैं और एकाध कदम और दो चार घोषणाओं से बात बनेगी नहीं।

आत्मनिर्भर भारत 3.0 पैकेज के तहत रोजगार बढ़ोत्तरी, लघु उद्योगों के लिए उधार संबंधी शर्तों में उदारता, प्रधानमंत्री आवास योजना, घर खऱीद के लिए आयकर छूट, खाद अनुदान आदि शामिल है।

इसके पहले प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेटिव योजना में दस क्षेत्रों को जोड़ने की घोषणा की गई थी। प्रोडक्शन लिंक्ड इन्सेंटिव यानी पीएलआई यानी उत्पादन संबद्ध प्रोत्साहन-उसंप्रो योजना में दस नए क्षेत्र जोड़े गए हैं। ये दस क्षेत्र हैं-आॅटोमोबाइल, बैटरी, फार्मा, टेलीकाम, फूड प्रोडक्ट, टेक्सटाइल, स्पेशलिटी स्टील, व्हाइट गुड्स-फ्रिज, वाशिंग मशीन आदि, इलेक्ट्राॅनिक साज-सामान, सोलर सेल।

गौरतलब है कि उसमें प्रोत्साहन राशि बतौर नकदी दी जाती है। मोबाइल फोन निर्माण के लिए ऐसी योजना सरकार पहले ही ला चुकी है, जिसकी स्वीकार्यता ने केंद्र सरकार को प्रेरित किया कि दूसरे क्षेत्रों तक इसे विस्तारित किया जाए। इस नई योजना में करीब 1.46 लाख करोड़ रुपये का प्रोत्साहन संबंधित उद्योगों को दिया जाएगा। अकेले आटोमोबाइल उद्योग करीब 57,042 करोड़ रुपये का प्रोत्साहन मिलेगा।

इसकी ठोस वजह है कि आॅटोमोबाइल उद्योग भारत में खास महत्व रखता है। इसमें घरेलू स्तर पर उत्पादन को प्रोत्साहन दिया जाना बहुत जरूरी है, क्योंकि भारत एक बड़ा घरेलू बाजार भी है। आॅटोमोबाइल उद्योग के लिए और यहां निर्यात भी बहुत बड़ी तादाद में किया जा सकता है। बैटरी उद्योग के लिए 18100 करोड़ रुपये रखे गए हैं। कुल मिलाकर चीन के मुकाबले अगर भारत को मैन्युफेक्चरिंग हब बनना है, तो इस तरह के प्रोत्साहन प्रयास बहुत जरूरी हैं।

मेक इन इंडिया की दिशा में बढ़ने के लिए ये प्रयास जरूरी हैं, पर इतना भर करके रुक नहीं जाना है। प्रोत्साहन राशि का अपना महत्व है, पर महत्व इस बात का भी है कि किस तरह से जमीनी स्तर पर तमाम विदेशी और देशी निवेश के आवेदन मंजूर होते हैं।

खासकर विदेशी निवेशकों के लिए भारत में कारोबार करना बहुत आसान नहीं रहा है। यूं विश्व बैंक द्वारा तैयार कारोबारी सुगमता सूचकांक में भारत लगातार प्रगति कर रहा है, पर भारत में ऐसी आसानी नहीं है कि कोई विदेशी निवेशक एकाध हफ्ते में ही कामकाज शुरू कर सके। गौरतलब है कि चीन ने ऐसी सुगमता बहुत पहले ही सुनिश्चित करा दी, इसलिए चीन दुनियाभर में विनिर्माण का केंद्र बन गया है।


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