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आप के खिलाफ स्टिंग की सत्यता पर सवाल!

न्यूज पोर्टल ने किया आप का स्टिंग

आप के खिलाफ स्टिंग की सत्यता पर सवाल!

देश में चौतरफा व्याप्त भ्रष्टाचार के खिलाफ शुरू हुए अण्णा आंदोलन से निकली आप पार्टी के नेता अरविंद केजरीवाल और उनकी टीम के सदस्य विभिन्न मंचों से कहते रहे हैं कि वे ईमानदारी की राजनीति करने आए हैं। एक न्यूज पोर्टल की ओर से किए गए स्टिंग ऑपरेशन में पार्टी के नेताओं पर जो आरोप लगाए गए हैं उससे एक बारगी तो आप कठघरे में दिखाई देती है, लेकिन चुनावों से एन वक्त पहले जिस तरह से यह स्टिंग की गई है और उसकी सीडी जारी की गई है, उससे स्टिंग करने वालों की मंशा पर भी प्रश्न चिह्न् लगता है। हालांकि स्टिंग ऑपरेशन में लगाए गए आरोपों को आप पार्टी ने एक राजनीतिक साजिश करार देते हुए स्टिंग पर भी सवाल खड़ा किया है। आप पार्टी की ओर से स्पष्ट रूप से कहा गया हैकि स्टिंग के संपादित फुटेज के आधार पर पार्टी के किसी भी सदस्य पर किसी भी तरह की कार्रवाई उचित नहीं है। पार्टी के सदस्य और सुप्रीम कोर्ट के वकील प्रशांत भूषण ने महत्वपूर्ण बिंदु पर ध्यान दिलाया हैकि स्टिंग में जो बातें रिपोर्टर कह रहा है और जो बातें ट्रांसक्रिप्ट में लिखी हुई आ रही हैं उनमें कोई तालमेल नहीं है। इससे स्टिंग पर भी संदेह पैदा होता है। मामले की जांच के लिए आप पार्टी की ओर से स्टिंग के असली फुटेज की संबंधित पोर्टल से मांग की गई थी, परंतु उन्होंने आप को न देखकर मुख्य चुनाव अधिकारी को फुटेज सौंपा है। चुनावों के दौरान आए इस स्टिंग में कितनी सच्चाई है इसकी जांच होनी चाहिए। क्योंकि इसमें जो आरोप लगाए गए हैं, वे गंभीर हैं, और इसकी टाइमिंग ऐसी है जो आप पार्टी की छवि को धूमिल करने के लिए काफी है। यह भी जांच होनी चाहिए कि इसके पीछे कौन लोग हैं और उनका मकसद क्या है? यदि यह किसी की सोची समझी साजिश है तो उसका पर्दाफाश होना चाहिए और यदि आप पार्टी के सदस्य पर लगाए गए आरोप सही पाए गए तो उनके खिलाफ भी कानून सम्मत कार्रवाईहोनी चाहिए। बृहस्पतिवार को आए इस स्टिंग ऑपरेशन में आप के दो प्रमुख नेताओं कुमार विश्वास और शाजिया इल्मी समेत सात उम्मीदवारों पर अवैध तरीके से पैसा जुटाने का आरोप लगाया गया है। स्टिंग में मनोज कुमार, दिनेश मोहनिया, इरफान खान, मुकेश हुड्डा, प्रकार और भावना गौर का भी नाम है। ये सभी दिल्ली विधानसभा में आप के उम्मीदवार हैं। हाल ही में अण्णा हजारे और अरविंद केजरीवाल के बीच भी कुछ बातों को लेकर मतभेद सामने आए हैं। आंदोलन के दौरान जुटाए गए चंदे को लेकर अण्णा हजारे ने कुछ गंभीर सवाल खड़े किए हैं। अण्णा ने आप की ओर से विधानसभा चुनावों में उनके नाम का इस्तेमाल करने पर भी अपनी आपत्ति जताई थी। हालांकि अरविंद केजरीवाल की ईमानदारी पर बेशक कोई सवाल नहीं उठा सकता। परंतु उनके साथ जो लोग जुड़े हुए हैं उनकी ईमानदारी को भी उनको सुनिश्चित करना होगा। उनकी पार्टी एक साल में ही इतनी लोकप्रिय हो गई है कि दिल्ली विधानसभा में दो राष्ट्रीय पार्टियों कांग्रेस और भाजपा के होते अपनी पहचान दर्ज करने और कुछ सीटें हासिल करने की स्थिति में पहुंच गई है तो यह उस पर जनता के विश्वास का ही नतीजा है। परंतु अब जो बातें सामने आ रही हैं वे चुनावी मौसम में केजरीवाल को प्रभावित कर सकती हैं। लिहाजा आप पार्टी को सचेत रहना होगा।

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