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डॉ. एल. एस. यादव का लेख : सेनाओं की सराहनीय भूमिका

कोरोना महामारी से निपटने में जहां चिकित्सकों का योगदान सराहनीय रहा है। वहीं अब इसमें सशस्त्र सेनाएं भी अपना विशेष योगदान दे रही हैं। राज्य सरकारों को सेना के चिकित्साकर्मी उपलब्ध करवाए जा रहे हैं। इसके अतिरिक्त देश के विभिन्न हिस्सों में सेना की तरफ से अस्थायी अस्पतालों का निर्माण किया जा रहा है। यही नहीं सेना के अस्पतालों के दरवाजे भी आम लागों के लिए खोले जा रहे हैं। इन सभी कदमों से जनता को काफी फायदा होगा, क्योंकि सैन्य अस्पतालों के नजदीक के लोग सेना अस्पताल में जाकर इलाज करा सकेंगे। सेना के जवान आयात की जा रही ऑक्सीजन के टैंकरों और वाहनों के जरिये पहंुचाए जा रहे हैं।

डॉ. एल. एस. यादव का लेख : सेनाओं की सराहनीय भूमिका
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डॉ. एल. एस. यादव

डॉ. एल. एस. यादव

कोरोना महामारी से निपटने में जहां चिकित्सकों का योगदान सराहनीय रहा है। वहीं अब इसमें सशस्त्र सेनाएं भी अपना विशेष योगदान दे रही हैं। पिछले दिनों देश में बढ़ते कोरोना मामलों के बीच सेना प्रमुख मनोज मुकुन्द नरवाने ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से मुलाकात की। इस मुलाकात में कोरोना संकट पर सेना की तरफ से मदद के लिए की गई तैयारियों को लेकर विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की गई। सेना प्रमुख ने प्रधानमंत्री को बताया कि विभिन्न राज्य सरकारों को सेना के चिकित्साकर्मी उपलब्ध करवाए जा रहे हैं। इसके अतिरिक्त देश के विभिन्न हिस्सों में सेना की तरफ से अस्थायी अस्पतालों का निर्माण किया जा रहा है। यही नहीं सेना के अस्पतालों के दरवाजे भी आम लागों के लिए खोले जा रहे हैं। इन सभी कदमों से जनता को काफी फायदा होगा, क्योंकि सैन्य अस्पतालों के नजदीक के लोग सेना अस्पताल में जाकर इलाज करा सकेंगे। इसके अलावा सेना के जवान आयात की जा रही ऑक्सीजन के टैंकरों और वाहनों के संचालन के लिए पहंुचाए जा रहे हैं। गाड़ियों के प्रबंधन में जहां विषेशज्ञ कौशल की जरूरत होती है, वहां भी सेना की तरफ से सहयोग किया जा रहा है। कुल मिलाकर सेना आवश्यकतानुसार नागरिकों व सरकारों की मदद करने में लगी हुई है।

कोरोना की इस दूसरी लहर से निपटने के लिए सेना बीते दो वर्षों में सेवानिवृत्त हुए एवं स्वेच्छा से सेवानिवृत्ति लेने वाले अपने चिकित्सकों को वापस बुला लिया है। सेना इनकी सेवाओं का लाभ देश्ा के नागरिकों को प्राप्त होगा। सेना द्वारा बनाए जाने वाले अस्पतालों एवं अन्य सुविधा सहायता वाले केंद्रों पर इनकी तैनाती की जा रही है। सेना की मेडिकल कोर शाखा भी पूरी तरह से मदद के लिए आगे आ रही है। इस शाखा के चिकित्सक एवं नर्सिंग स्टाफ सहायता के लिए उपलब्ध होंगे। इस महामारी से निपटने में इनका सहयोग विशेष भूमिका निभाएगा। युद्ध काल हो या शान्ति काल, दोनों ही परिस्थितियों में घायलों व बीमार सैनिकों का इलाज करने का विशेष अनुभव इनको प्राप्त है। इन्हें घायलों को तीव्र गति से स्वस्थ करना होता है। तभी वे पुनः समरभूमि में जाकर अपने युद्ध कौशल का परिचय दे पाते हैं। इनका सहयोग युद्धों में विजय दिलाने में विशेष भूमिका निभाता है। अब इनके इसी प्रशिक्षण व अनुभव का लाभ देशवासियों को मिलेगा और कोरोना की जंग में देश को विजय प्राप्त हो सकेगी। सेना के अस्पतालों में हर प्रकार की सुविधाएं होती हैं। इसके अलावा यौद्धिक काल में जिस तरह से वे बेड सहित विभिन्न सुविधाओं का विस्तार करते हैं, वह कार्य इस समय भी किया जा सकता है। युद्ध काल में सेना इसे दो गुना तक करने में सक्षम होती है। यहां गौरतलब तथ्य यह भी है कि सेना के अस्पताल देश के हर क्षेत्र में बने हुए हैं, जिनका लाभ नागरिकों को मिलेगा। सेना के जवानों को नागरिक सैनिक संबंधों की भी महत्वपूर्ण जानकारी होती है, क्योंकि उन्हें इस बात के लिए पहले ही प्रशिक्षित कर दिया जाता है। सम्प्रति किसी भी देश की प्रशासनिक व्यवस्था सही रूप से चलाने के लिए सैनिक एवं नागरिक संबंधों का महत्व काफी अधिक बढ़ गया है। भारतीय लोकतांत्रिक प्रणाली में भारतीय सेना के जवान संगठन, स्वरूप, कार्य एवं योजना को भली भांति निभाते हैं।

अगर वायु सेना की बात की जाए तो वह देश में क्रायोजेनिक आक्सीजन टैंकरों की भारी कमी को दूर करने के लिए दिन रात अपने अभियान में जुटी हुई है। देश-विदेश से टैंकरों को जुटाने और उन्हें अलग-अलग जगहों पर पहुंचाने की गति को रुकने नहीं दे रहे हैं। भारतीय वायु सेना के सी-17 ग्लोबमास्टर विमान ने आक्सीजन टैंकरों को बैंकाक से गुजरात के जामनगर पहुंचाया। दूसरे सी-17 विमान ने आक्सीजन टैंकर को आगरा से रांची और तीसरे ने चंडीगढ़ से रांची बिना विलंब के पहुंचाया। इसके अलावा दो-दो आक्सीजन टैंकरों को इंदौर से रायपुर और भोपाल से सूरत भेजा जा चुका है। इसके अलावा गाजियाबाद के हिंडन से एक आक्सीजन टैंकर को रांची, एक आक्सीजन टैंकर को भोपाल से रांची पहंुचाया गया। यही नहीं सिंगापुर की वायु सेना का एक जहाज 256 आक्सीजन सिलेंडर लेकर पागगढ़ पहुंचाने में सफल रहा। वायु सेना प्रमुख एयरचीफ मार्शल आर के एस भदौरिया ने जानकारी दी है कि पूरे देश में चिकित्सा सहायता पहुंचाने के लिए वायु सेना के सभी बेड़ों को चौबीसों घंटे उड़ान भरने के लिए तैयार रहने के निर्देश जारी किए जा चुके हैं। कोरोना महामारी से निपटने के लिए वायु सेना ने भारी संख्या में अपने भारी, हल्के व मध्यम श्रेणी के परिवहन विमानों को तैनात कर रखा है।

इन सराहनीय कार्यों के चलते वायु सेना प्रमुख ने 28 अप्रैल को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से मुलाकात की। इस मुलाकात में उन्होंने प्रधानमंत्री को जानकारी दी कि देश की भौगोलिक परिस्थितियों के मद्देनजर विभिन्न श्रेणी के विमानों को आक्सीजन की आपूर्ति में लगाया गया है। वायु सेना ने विशेष कोरोना एयर सपोर्ट सेल भी बना रखा है, जो हर परिस्थिति में विभिन्न मंत्रालयों एवं एजेंसियों के साथ सहयोग व समन्वय बनाए रखता है। कोरोना महामारी से निपटने में भारतीय नौसेना भी अपनी भूमिका निभा रही है। चिकित्सा सुविधाओं और ऑक्सीजन बेड़ों की मांग को देखते हुए पश्िचमी नौसेना कमान (डब्लूएनसी) ने प्रवासी मजदूरों के लिए ऑक्सीजन बेड की सुविधा वाले तीन अस्पताल शुरू कर दिए हैं। कोरोना पीड़ितों की मदद के लिए गोवा में आईएनएचएस जीवनबत्ती, कारबार में आईएनएचएस पतंजलि, मुम्बई में शुरू किए गए आईएनएचएस संधानी सिविल प्रशासन को सहयोग दे रहे हैं। नौसेना परिसर के अंदर प्रवासी मजदूरों के लिए बुनियादी सुविधाओं की स्थापना की गई। इससे उनके अपने गृह जनपद की ओर पलायन रुका।

बेहतर सहयोग प्रदान करने के लिए नौसैनिक अधिकारी नागरिक प्रषासन के साथ नियमित रूप से संपर्क में रहे। जरूरत के अनुसार इन अधिकारियों ने आकस्मिक सहायता भी की। मुंंबई में आईएनएचएस संधानी एवं आईएनएचएस अष्विनी पर शार्ट नोटिस पर बैटल फील्ड नर्सिंग सहायकों के रुप में प्रशिक्षित मेडिकल और गैर चिकित्सा कर्मियों को भर्ती किया गया। यही नहीं कारवाड़ में नौसैनिक अधिकारियों ने 1500 प्रवासी मजदूरों के लिए जरूरी सामान एवं स्वास्थ्य सेवाओं के इंतजाम किए। भारतीय नौसेना ने विदेशों से ऑक्सीजन से भरे क्रायोजेनिक कंटेनर लाने के लिए विशेष अभियान चलाया। नौसेना के युद्धक पोत आईएनएस कोलकाता, तलवार, जलाश्व एवं ऐरावत बहरीन, सिंगापुर एवं थाईलैंड से ऑक्सीजन लेकर आए।

उपर्युक्त वर्णन से यह पूर्ण रूप से स्पष्ट हो जाता है कि यह सैन्य सहयोग भारत से कोरोना महामारी को दूर करके नागरिकों को स्वास्थ्य लाभ प्रदान करने में सहायक सिद्ध होगा।

(ये लेखक के अपने विचार हैं।)

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