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लखवी की रिहाई पर चौतरफा घिरता पाक, अमेरिका, रूस, फ्रांस और जर्मनी ने जताई चिंता

संयुक्त राष्ट्र ने भारत के उस मांग को स्वीकार लिया है जिसमें उससे मुंबई हमले के आरोपी और लश्कर ए तैयबा के कमांडर आतंकी जकीउर रहमान लखवी की रिहाई के मामले में हस्तक्षेप करने को कहा गया था।

लखवी की रिहाई पर चौतरफा घिरता पाक, अमेरिका, रूस, फ्रांस और जर्मनी ने जताई चिंता

संयुक्त राष्ट्र ने भारत के उस मांग को स्वीकार लिया है जिसमें उससे मुंबई हमले के आरोपी और लश्कर ए तैयबा के कमांडर आतंकी जकीउर रहमान लखवी की रिहाई के मामले में हस्तक्षेप करने को कहा गया था। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की एक कमेटी ने भारत को आश्वासन दिया है कि वह इस मामले को पाकिस्तान के सामने उठाएगी। इसके बाद लखवी को लेकर पाकिस्तान पर दबाव बनना तय है। लखवी की रिहाई पर अमेरिका, रूस, फ्रांस और जर्मनी आदि कई देशों ने सार्वजनिक रूप से पहले ही चिंता जता दी है। भारत ने तर्क दिया था कि लखवी के मामले में पाकिस्तान ने अंतरराष्ट्रीय मानदंडों का पालन नहीं किया है। उसकी रिहाई संयुक्त राष्ट्र के प्रस्ताव का उल्लंघन है। इसके प्रावधानों के मुताबिक एक घोषित आतंकी होने की वजह से लखवी की सारी संपत्ति सील करने के साथ-साथ उसके यात्रा करने और हथियार रखने पर भी पाबंदी होनी चाहिए। ऐसे में वह न तो पैसे ले सकता है, न ही दे सकता है। दरअसल, लखवी से जमानत राशि ली गई है जो कि संयुक्त राष्टÑ के दिशानिर्देशों का उल्लंघन है।

लखवी को पाकिस्तान की एक अदालत ने पिछले महीने जमानत दी थी। वह मुंबई हमले का मास्टर माइंड जमात उद दावा प्रमुख हाफिज सईद का करीबी है। पाकिस्तान की अदालत का कहना है कि उसके खिलाफ पुख्ता सबूत नहीं है। लखवी की रिहाई के लिए पाकिस्तान सरकार और सेना को जिम्मेदार माना जा रहा है। क्योंकि सरकारी पक्ष ने ही केस में कमी रखी है। भारत ने जो सबूत दिए हैं, उसे वहां की सेना और सरकार ने अदालत के समक्ष रखे ही नहीं हैं। यही वजह है कि केस कमजोर हो गया है। मुंबई हमले के केस का यह हश्र चिंताजनक है। लखवी के मामले में भारत सीधे तौर पर पाकिस्तान के सामने कड़ी आपत्ति जता चुका है। मुंबई हमला 2008 में हुआ था, जिसमें आतंकियों ने 166 लोगों की बर्बरतापूर्वक हत्या कर दी थी।

हमले के दौरान एकमात्र जिंदा पकड़ा गया आतंकी कसाब ने लखवी को पूरे आॅपरेशन का कमांडर और हाफिज सईद को मास्टर माइंड बताया था। वहीं अमेरिका में पकड़ा गया डेविड हेडली ने भी दोनों की पहचान की थी। इसके अलावा हमले के दौरान आतंकियों की हुई बातचीत के सैंपल की फॉरेंसिक जांच और गत वर्ष नेपाल की सीमा पर पकड़े गए अबु जुंदाल से हुई पूछताछ में भी दोनों की भूमिका उजागर हुई है। इतने पुख्ता सबूत होने के बावजूद भी उसकी रिहाई चिंता की बात है। पाकिस्तान पेशावर की वीभत्स घटना से भी कुछ सबक लेता हुआ नहीं दिख रहा है। वह अब भी आतंकवाद को अच्छे और बुरे की श्रेणी में बांट कर देख रही है। लखवी की रिहाई ने साबित किया है कि पाकिस्तान आतंकवाद पर दोहरी नीति रखता है। उसे यह नहीं भूलना चाहिए कि ऐसे फैसलों से आतंकियों के हौसले बुलंद होते हैं। यदि पाकिस्तान वास्तव में आतंकवाद को समाप्त करना चाहता है तो उसे बिना भेदभाव किए जमात उद दावा, हिजबुल मुजाहिदीन, लश्कर ए तैयबा सहित सभी आतंकवादियों को नेस्तनाबूद करना होगा। यदि पाक सरकार कार्रवाई नहीं करेगी तो ये आतंकी अंतत: उसे ही नुकसान पहुंचाएंगे।

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