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29 जून 1976 को जब सेशेल्स अपना स्वतंत्रता दिवस मना रहा था, तब भारत कर रहा था ये सब

भारत शुरू से ही सेशेल्स की सामरिक महत्ता से परिचित है, इसलिए हमेशा कोशिश रही कि सेशेल्स के साथ सामरिक व कूटनीतिक संबंध मजबूत रहे। इस बार भी जब सेशेल्स के राष्ट्रपति डैनी फॉरे भारत यात्रा पर आए तो केंद्र सरकार ने सेशेल्स की आशंका को दूर करने में देर नहीं लगाई।

29 जून 1976 को जब सेशेल्स अपना स्वतंत्रता दिवस मना रहा था, तब भारत कर रहा था ये सब
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भारत के सेशेल्स से संबंध उसकी आजादी के समय से ही मजबूत है। 29 जून 1976 को जब सेशेल्स अपना स्वतंत्रता दिवस मना रहा था, उस भारतीय नौसाना का जहाज आईएनएस विक्टोरिया के तट पर तैनात था। भारत शुरू से ही सेशेल्स की सामरिक महत्ता से परिचित है, इसलिए हमेशा कोशिश रही कि सेशेल्स के साथ सामरिक व कूटनीतिक संबंध मजबूत रहे।

इस बार भी जब सेशेल्स के राष्ट्रपति डैनी फॉरे भारत यात्रा पर आए तो केंद्र सरकार ने सेशेल्स की आशंका को दूर करने में देर नहीं लगाई। दरअसल 10 मार्च 2015 को जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सेशेल्स यात्रा पर गए तो उस दौरान दोनों देशों के बीच नौसेना अड्डा बनाने पर सहमति बनी थी। इस अड्डे का निर्माण भारत को करना था। लेकिन भारत आने से पहले राष्ट्रपति डैनी फॉरे ने नौसेना अड्डा बनाने का करार रद कर दिया।

उन्होंने यह भी कहा था कि जब वह भारत आएंगे तो असम्पशन आईलैंड प्रॉजेक्ट को लेकर कोई चर्चा नहीं करेंगे। सेशेल्स के कदम को भारत के कूटनीतिक प्रयासों के लिए असफलता के तौर पर देखा जा रहा था। उनके मन में आशंका घर कर गई थी कि इससे उसको सामरिक खतरा हो सकता है। अब सेशेल्स भारत की मदद से अपने आईलैंड पर नेवल बेस बनाने पर राजी हो गया है।

यह भारत की कूटनीतिक सफलता है। यह नेवल बेस भारत के लिए काफी महत्वपूर्ण है। इससे हिंद महासागर में सामरिक लाभ होगा और सागर सुरक्षा करने में मदद मिलेगी। मात्र 95 हजार की आबादी वाले 115 द्वीप समूहों का यह पूर्व अफ्रीकी देश भारत के लिए महत्वपूर्ण है। शिक्षा, स्वास्थ्य, तकनीक, रक्षा और सामरिक क्षेत्र में भारत सेशेल्स को सहयोग करता रहा है।

2015 में पीएम मोदी की यात्रा के दौरान चार समझौते- हाइड्रोग्रफी, नवीकरणीय ऊर्जा, बुनियादी ढांचा विकास और नौवहन व इलेक्ट्रॉनिक नौवहन चार्ट, हुए थे। इस बार भी भारत और सेशेल्स में छह समझौते भी हुए हैं। 1981 में इंदिरा गांधी ने प्रधानमंत्री के रूप में पहली बार सेशेल्स की यात्रा की थी।

उसके बाद 1989 में तत्कालीन राष्ट्रपति आर वेंकटरमण,1991 में तत्कालीन उपराष्ट्रपति शंकर दयाल शर्मा, 2003 में तत्कालीन उप राष्ट्रपति भैरो सिंह शेखावत और 2012 में तत्कालीन राष्ट्रपति प्रतिभा पाटील ने सेशेल्स की यात्रा की। सेशेल्स के राष्ट्रपति जेम्सा एलेक्स मिचेल ने 2010 में भारत की यात्रा की थी।

केंद्र में चाहे सरकार कांग्रेस की रही हो, या भाजपा की, सेशेल्स के साथ कूटनीतिक संबंध हमेशा प्रगाढ़ बने रहे। हिंद महासागर के साथ लगे अफ्रीकी जल क्षेत्र में समुद्री डाकुओं की भरमार को देखते हुए भारत सेशेल्सक पीपुल्स डिफेंस फोर्सेज (एसपीडीएफ) की क्षमता को सुदृढ़ करने में सक्रिय रहा है।

भारत ने एसपीडीएफ को सैन्य वाहनों और निगरानी उपस्कररों का दान किया है। वर्ष 2014 में भारत ने निगरानी और गश्तफ करने की क्षमता को बढ़ाने के लिए सेशेल्सन को नौसेना जहाज आईएनएस तरासा दान दिया। इससे पहले 2006 में भी नौसैनिक जहाज दिया था। डॉर्नियर लड़ाकू विमान दिया है।

2013 में भारत ने सेशेल्सो के एक्सेक्लूढसिव इकोनोमिक जोन की आतंकवाद और समुद्री डकैत से रक्षा करने के लिए एक डोर्नियर-228 समुद्री खोजी विमान भेंटस्व रूप दिया था। भारत ने विक्टोरिया में तटीय निगरानी रडार परियोजना का निर्माण किया है।

भारत ने हमेशा समुद्री डकैती के विरुद्ध लड़ाई में सेशेल्सक की मदद की है। समुद्री डकैतों का निशाना भारतीय लोग व व्यापार रहे हैं। भारत इस क्षेत्र में चीन को पांव नहीं जमाने देना चाहता है, पूर्वी अफ्रीकी देशों के साथ अपने संबंधों को मजबूत करना चाहता है और हिंद महासागर में अपनी सुरक्षा को चाकचौंबंद रखना चाहता है। भारत के इन मकसद में सेशेल्स भरोसेमंद सामरिक पार्टनर साबित हो सकता है।

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