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भारत का पाक को करारा जवाब, बताया- खेल और आतंकवाद का मतलब

केंद्र सरकार ने साफ कर दिया कि आतंकवाद और खेल साथ नहीं चल सकते।

भारत का पाक को करारा जवाब, बताया- खेल और आतंकवाद का मतलब
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भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) और पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (पीसीबी) की दुबई में प्रस्तावित बैठक से ठीक पहले केंद्र सरकार का भारत और पाक के बीच किसी भी द्विपक्षीय क्रिकेट की संभावना को खारिज कर देना सही समय पर लिया गया निर्णय माना जा सकता है।

केंद्र सरकार ने साफ कर दिया कि आतंकवाद और खेल साथ नहीं चल सकते। पांच साल पहले भी जब भारत ने पाकिस्तान के साथ द्विपक्षीय क्रिकेट का रिश्ता खत्म किया था, उस वक्त भी सरकार ने यही तर्क दिया था कि आतंकवाद और खेल दोनों एक साथ संभव नहीं है।

अब एक बार फिर केंद्र सरकार ने कहा कि जब तक पाकिस्तान सीमा पार से आतंकवाद को बढ़ावा देना बंद नहीं करता, तब तक भारत द्विपक्षीय क्रिकेट सीरीज को शुरू करने की अनुमति नहीं देगा।

हालांकि भारत और पाकिस्तान की टीमें अंतरराष्ट्रीय सीरीज में एक-दूसरे के साथ खेलना जारी रखेंगी। द्विपक्षीय सीरीज पर सरकार के इस स्टैंड का बीसीसीआई के लिए ज्यादा महत्व है।

उसके लिए एक आईना भी है। कारण बीसीसीआई पीसीबी के साथ द्विपक्षीय सीरीज के बाबत कुछ फैसला करने वाला था। सरकार ने कहा कि बीसीसीआई को सरकार से सलाह के बाद ही इस संबंध में कोई सुझाव या प्रस्ताव पेश करना चाहिए।

निश्चित रूप से बीसीसीआई देश और सरकार से अलग नहीं है। देश का मूड पाक के खिलाफ है। ऐसे में क्रिकेट बोर्ड सरकार को दरकिनार करके कोई फैसला नहीं कर सकता है।

दरअसल, भारत व पाक बोर्ड के बीच मामला पेचीदा हो गया है। बीसीसीआई और पीसीबी के बीच ढाई साल पहले बातचीत में सहमति बनी थी कि दोनों देशों की टीमें 2015 से 2023 के बीच छह द्विपक्षीय सीरीज खेलेंगी।

पाक का दावा है कि एमओयू साइन हुआ था, जबकि बीसीसीआई के मुताबिक सिर्फ सहमति बनी थी। कोई लिखित करार नहीं हुआ। पाक क्रिकेट बोर्ड ने कथित एमओयू को तोड़ने के लिए बीसीसीआई को कानूनी नोटिस भेजा है और हर्जाने के तौर पर उससे 60 मिलियन डालर (करीब 387 करोड़ रुपये) मांगे हैं।

इसी नोटिस के बाद बीसीसीआई पीसीबी के साथ मामला सुलझाने के लिए दुबई में बैठक कर रहा है। इस पूरे प्रकरण में बीसीसीआई कटघरे में दिख रहा है। कारण जब पांच वर्ष पहले 2012 में ही सरकार ने पाकिस्तान के साथ द्विपक्षीय क्रिकेट नहीं खेलने का फैसला किया था।

तो आखिर ढाई साल पहले बीसीसीआई ने किस आधार पर पीसीबी के 2015 से 2023 के बीच छह द्विपक्षीय सीरीज के लिए सहमति जताई थी। क्या क्रिकेट बोर्ड खुद को सरकार से ऊपर तो नहीं मान रहा था?

बीसीसीआई सरकार के साथ टकराव पूर्ण रवैया अपनाता रहा है। यहां तक कि बोर्ड उच्चतम न्यायालय के आदेश को भी नहीं मानने के अंतिम बहाने तक की कोशिश भी करता रहा है।

जस्टिस लोढ़ा समिति के मामले में बोर्ड का चूहे-बिल्ली का खेल देश ने देखा है। बोर्ड को सोचना चाहिए कि 9 साल पहले पाकिस्तान में श्रीलंका की क्रिकेट टीम पर आतंकी हमला हुआ था।

यानि कि जब पाक आतंकी श्रीलंका क्रिकेट को भी बख्शने को तैयार नहीं है तो भारत को तो ज्यादा खतरा है। पाकिस्तान भारत के साथ तो आतंकवाद का खेल ही खेल रहा है।

आतंकवाद के चलते ही बॉलीवुड में भी पाक कलाकारों के काम करने का विरोध हुआ था। पाक गजल गायक गुलाम अली का शो मुंबई में पिछले साल रद हो गया था। पाक प्रायोजित आतंकवाद के चलते ही कश्मीर में हालात खराब हैं और भारत ने पाक से वार्ता स्थगित कर रखी है।

भारत को पाक के साथ द्विपक्षीय व्यापार भी बंद कर देना चाहिए। दोनों के बीच जब तक शांतिपूर्ण संबंध कायम नहीं हो जाते और सरकार की अनुमति नहीं मिल जाती, तब तक बीसीसीआई को पीसीबी से द्विपक्षीय सीरीज के बारे में नहीं सोचना चाहिए, उसे सरकार के निर्णय का सम्मान करना चाहिए।

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