Hari bhoomi hindi news chhattisgarh

शंशाक द्विवेदी का लेख : एचआईवी का जोखिम बरकरार

एड्स एक खतरनाक बीमारी है जो इंसान को जीते जी मार देती है। असुरक्षित यौन संबंधों, दोषपूर्ण रक्त बदलने या अन्य कारकों से होने वाला यह रोग आज भी बड़े पैमाने (scale) पर जिंदगियां प्रभावित कर रहा है। एचआईवी यानी ह्यूमन इम्यूनोडिफीशिएंसी यह विषाणु एक रेट्रोवायरस है जो मानव की रोग प्रतिरोधक प्रणाली की कोशिकाओं को संक्रमित कर उनके काम करने की क्षमता को नष्ट या क्षतिग्रस्त कर देता है। यह विषाणु शरीर को बाहरी रोगों से सुरक्षा प्रदान करने वाले रक्त की टी कोशिकाओं को प्रभावित करता है और धीरे-धीरे उन्हें नष्ट करता रहता है। इसका खतरा आज भी बरकरार है।

शंशाक द्विवेदी का लेख : एचआईवी का जोखिम बरकरार
X

पिछले दिनों यूएनएड्स द्वारा प्रकाशित 'सैजिंग द मूमेंट' नामक रिपोर्ट के अनुसार दुनिया नए एचआईवी संक्रमणों को रोकने के लक्ष्य से काफी पीछे है। 2019 में करीब 17 लाख नए मामले सामने आये थे। जोकि वैश्विक लक्ष्य से करीब तीन गुना ज्यादा हैं, हालांकि इनमें 2010 से करीब 23 फीसदी की कमी आई है|

इसके बावजूद यह 75 फीसदी की कमी लाने के लक्ष्य से काफी दूर है। कुल मिलाकर कोविड (covid) की वजह से 2020 के लिए जो लक्ष्य निर्धारित किया गया था उसे हासिल नहीं किया जा सकेगा। कोरोना के वजह से एड्स के एंटीरेट्रोवायरल थेरेपी, दवाओं और सेवाओं के वितरण और पहुंच में दिक्कतें आ रही है|

विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार,एचआईवी महामारी की शुरुआत से लेकर अब तक 7.5 करोड़ लोग संक्रमित हो चुके हैं और 3.2 करोड़ लोगों की मौत हो चुकी है। इस महामारी से दुनियाभर में हर साल लाखों मौत हो रही हैं। साल 2018 में ही 7.70 लाख लोग मारे गए, जबकि 17 लाख लोग संक्रमित हो गए। दुनियाभर में कुल 3.79 करोड़ लोग एचआईवी अथवा एड्स से पीड़ित हैं।

डब्ल्यूएचओ के अनुसार, दुनिया भर में 15-49 आयुवर्ग की 0.8 प्रतिशत आबादी इस महामारी की शिकार है। यूएनएड्स के आंकड़ों के मुताबिक, 2018 में एड्स (AIDS) की चपेट में आकर जान गंवाने वालों में 6.70 लाख लोग वयस्क थे जबकि एक लाख मौतें 15 साल से कम उम्र के बच्चों की हुईं। एड्स से जान गंवाने वाले 61 प्रतिशत लोग अफ्रीका देशों से हैं। हालांकि यूएनएड्स और डब्लूएचओ द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, 2000 से 2019 के बीच नए एचआईवी संक्रमणों में करीब 39 फीसदी की गिरावट आई है।

जबकि इसी अवधि में एचआईवी संबंधित मौतों में भी 51 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है| जिसमें एंटीरेट्रोवायरल थेरेपी, दवाओं का बहुत बड़ा योगदान है। रिपोर्ट के अनुसार एंटीरेट्रोवाइरल थेरेपी के उपयोग से लगभग 1.5 करोड़ लोगों की जान बचाई जा सकी है। जहां पूर्वी और दक्षिणी अफ्रीका में इस दिशा में प्रगति हुई है, वहां 2010 के बाद से संक्रमण के नए मामलों में 38 फीसदी की गिरावट आई है|

जबकि पूर्वी यूरोप और मध्य एशिया में 2010 के बाद से एचआईवी के नए मामलों में 72 फीसदी की वृद्धि देखी गई है। जबकि मिडिल ईस्ट और उत्तरी अफ्रीका में नए संक्रमणों में 22 फीसदी की वृद्धि हुई है| वहीं दक्षिण अमेरिका में 21 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई है| रिपोर्ट के अनुसार 14 देशों ने एचआईवी उपचार के 90-90-90 लक्ष्य को हासिल कर लिए है|



Next Story