Top
Hari bhoomi hindi news chhattisgarh
Breaking

गुरुग्राम में जलभराव जैसी गंभीर स्थिति के आगे प्रशासन पंगु

स्मार्ट सिटी बनने की लिस्ट में है गुरुग्राम

गुरुग्राम में जलभराव जैसी गंभीर स्थिति के आगे प्रशासन पंगु

अगर जाम के चलते हजारों व्यक्तियों को रात सड़क पर गुजारनी पड़े, जान आफत में आ जाए, हर तरफ त्राहिमाम मच जाए, दो दिन के लिए स्कूलों में छुट्टियां घोषित करनी पड़े, कंपनियों को अपने दफ्तर बंद रखने को मजबूर होना पड़े, धारा-144 लागू करनी पड़े, सूबे के मुख्यमंत्री को दौरा रद करना पड़े, केंद्र सरकार को अधिकारियों की टीम भेजनी पड़े और राज्य सरकार को आपात बैठक बुलानी पड़े, तो स्थिति की गंभीरता का अंदाजा स्वत: हो जाता है।

इस गंभीर स्थिति का सामना हरियाणा के साइबर सिटी गुरुग्राम (गुड़गांव) को करना पड़ा है, जहां 'महाजाम' के चलते 20 से 21 घंटे तक हजारों लोग सड़क पर फंसे रहे। जलभराव के चलते 18-20 किलोमीटर तक लंबा जाम लग गया। गुरुग्राम में इस महाजाम की वजह ऐसी है जो वहां के प्रशासन की पूरी तरह पोल खोल रही है। नागरिक प्रशासन की इतनी बड़ी विफलता उस शहर के लिए और भी चिंताजनक है, जो स्मार्ट सिटी बनने की लिस्ट में है। गुरुग्राम अकेले नहीं है। दिल्ली, मुंबई और बेंगलुरु भी वर्षा जलभराव का सामना कर रहे हैं।
वहां के लोगों को भी भारी दिक्कत उठानी पड़ रही है। सड़कों-गलियों में पानी भरा है, नालियां ओवरफ्लो हैं। हमारे देश में मानसून में वर्षा होना नई बात नहीं है। हर साल मानसून आता है और बारिश होती है। तो फिर जब प्रशासन को पता है कि अमुक समय में उनके शहर में वर्षा होगी, ऐसे में वह समय रहते एहतियाती कदम क्यों नहीं उठाता है। वह इतना बेफिक्र कैसे रह सकता है। वर्षा जलनिकासी का पर्याप्त इंतजाम क्यों नहीं हो पाता है। ड्रेनैज सिस्टम को क्यों नहीं सुधारा जाता है। गुरुग्राम में जाम की वजह सड़कों पर जलभराव ही है।
अगर जल की निकासी का बढ़िया इंतजाम होता, तो आज हजारों लोगों को तकलीफ नहीं उठानी पड़ती। पब्लिक को हुई इस पीड़ा के लिए आखिर जिम्मेदार कौन है? आखिर लोग टैक्स चुकाते हैं, वे अच्छी सड़क, बेहतर नाली व्यवस्था, पानी-बिजली और सुरक्षा के हकदार है। हमारा नगर प्रशासन कब सुधरेगा? वह कब अपनी जिम्मेदारी समझेगा? वह कब अपनी कार्यप्रणाली को सुधारेगा? उसे कब एहसास होगा कि पब्लिक के पैसे से ही सैलरी मिलती है? राज्य सरकार को भी ध्यान रखना चाहिए कि उसका नगर प्रशासन कितना अलर्ट है।
अगर कोई अधिकारी या कर्मचारी जमीन पर काम नहीं करता है, केवल कागजों को भरता है, सरकार को यह पता होना चाहिए। पता होने के बावजूद अगर कोई सरकार ऐसे कर्मचारियों के प्रति ढिलाई बरतती है, तो यह उस सरकार की कमी है। ऐसा नहीं है कि दुनिया के और देशों में जाम नहीं होता है या जलभराव नहीं होता है, वहां भी यह सब होते हैं। चीन, फ्रांस, ब्राजील, र्जमनी और अमेरिका जैसे देशों में भी मीलों तक रोडजाम, जलभराव की स्थिति आती है, लेकिन वे अपने नगरों में तत्काल सुधार लाते हैं, प्रशासन को जिम्मेदार बनाते हैं।
दुबारा वैसी स्थिति पैदा नहीं होने देते हैं। लेकिन हम सालों साल लापरवाही बरतते रहते हैं। हम सबक नहीं लेते हैं। सरकार को नगर प्रशासन की जिम्मेदारी तय कर देनी चाहिए। उसके बाद लापरवाही सामने आती है, तो दोषी अफसरों को बाहर का रास्ता दिखा देना चाहिए। क्योंकि जनता की उम्मीद सरकार पर टिकी रहती है। राजनीतिक दलों को भी जन पीड़ा पर राजनीति नहीं करनी चाहिए। गुरुग्राम मामले में भाजपा, कांग्रेस व आप सियासत करती नजर आई, जो ठीक नहीं है।
खबरों की अपडेट पाने के लिए लाइक करें हमारे इस फेसबुक पेज को फेसबुक हरिभूमि, हमें फॉलोकरें ट्विटर और पिंटरेस्‍ट पर-
Next Story
Top