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जीएसटी : रेट टैक्स स्लैब में सुधार से 300 वस्तुओं पर पड़ा बड़ा असर

अभी जीएसटी में ये स्लैब- 0%, 5%, 12%, 18% और 28% जेटली के मुताबिक, इनमें से 28% में सिर्फ अल्कोहल और तम्बाकू जैसे सिन गुड्स और लग्जरी आइटम्स को रखा जाएगा वित्त मंत्री ने कहा- नया स्लैब 12% से 18% के बीच होगा।

जीएसटी : रेट टैक्स स्लैब  में सुधार से 300 वस्तुओं पर पड़ा बड़ा असर

अगर हमें अप्रत्यक्ष कर प्रणाली को और प्रभावी बनाना है तो जीएसटी का और सरलीकरण जरूरी है। सरकार भी इस बात को समझती है कि वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) को जितना अधिक सरल बनाया जाएगा, कर संग्रहण उतना ही सुलभ होगा। खुद वित्त मंत्री अरुण जेटली ने संकेत दिए हैं कि 12 व 18 फीसदी कर स्लैब के बदले एक स्टैंटर्ड टैक्स स्लैब बनाया जा सकता है।

वित्त मंत्री के मुताबिक आने वाले वक्त में देश में जीएसटी के 0, 5 और स्टैंडर्ड रेट टैक्स स्लैब (12 से 18 के बीच) होंगे। सिंगल स्टैंटर्ड रेट के आने से सेवा क्षेत्र को काफी सहूलियत मिलेगी। अभी अधिकतर सेवाएं 18 के स्लैब में हैं। 28 फीसदी स्लैब में केवल लग्जरी (याट, एयरक्राफ्ट, कोल्ड ड्रिंक्स, लग्जरी गाड़ियां, एसी, सोडा वाटर, बड़े टीवी, डिश वॉशर) और सिन आयटम्स (अल्कोहल, गुटखा, सिगरेट और तंबाकू) होंगे।

वित्त मंत्री ने कहा है कि आम आदमी के इस्तेमाल में आने वाले सीमेंट और वाहनों के कलपुर्जे 28 फीसदी टैक्स स्लैब में बच गए हैं। सरकार की प्राथमिकता सीमेंट पर टैक्स कम करने की है। एक दिन पहले ही सरकार ने निर्माणाधीन आवासीय इकाइयों और और कंप्लीशन (निर्माण कार्य सम्पन्न होने का प्रमाण पत्र) की प्रतीक्षा में पड़े तैयार फ्लैट पर जीएसटी की दर को घटाकर पांच प्रतिशत करने की बात कही है।

चूंकि दूसरे सभी बिल्डिंग मैटेरियल पहले ही 28% से 18% या 12% के टैक्स स्लैब में आ हो चुके हैं, इसलिए सीमेंट पर भी कर में कटौती से भवन समेत सभी निर्माणों की लागत कम हो जाएगी, वहीं बन रहे मकानों पर रियायत से रियल स्टेट में बूम आएगा। 1 जुलाई 2017 से जब से जीएसटी लागू हुआ है, सरकार इसे सरल बनाने में जुटी हुई इै। करीब 300 वस्तुओं को उच्च से निम्न स्लैब में ला चुकी है।

डेढ़ साल में ही वह 226 वस्तुओं में से 198 को 28 फीसदी स्लैब से बाहर कर चुकी है। दो दिन पहले ही 23 वसतुओं पर जीएसटी दरों में कमी की गई है। इसके बाद अब केवल 28 वस्तुएं ही 28 फीसदी स्लैब में बचीं। अभी 183 आइटम्स पर टैक्स शून्य है। 308 आइटम्स 5 फीसदी, 178 आयटम्स 12 फीसदी, व 517 आइटम्स 18 फीसदी टैक्स स्लैब में हैं।

स्लैब में सुधार से जीएसटी ओर सरल होगा व कर संग्रहण बढ़ेगा। इसमें कोई दोराय नहीं कि देश में अप्रत्यक्ष कर का विश्व का सबसे बुरा सिस्टम था, 17 से 20 तरह के टैक्स लगते थे, पर जीएसटी आने के बाद देश कर की एकीकृत प्रणाली की तरफ बढ़ा। कांग्रेस बेशक विकास का ढिंढोरा पीटती रहती है, लेकिन देश में बेहतर कर प्रणाली लागू करने में वह नाकाम रही।

टैक्स स्लैब को सरल बनाने के बाद छोटे कारोबारियों को राहत देने के लिए 20 लाख की न्यूनतम सीमा को बढ़ा कर कम से कम एक करोड़ किए जाने की भी जरूरत है। इससे एमएसएमई सेक्टर को राहत मिलेगी। जीएसटी लागू होने के बाद सबसे अधिक एमएसएमई सेक्टर ही प्रभावित हुआ। 30 लाख से अधिक लोगों का रोजगार छूट गया।

करोड़ों लोगों को अपना धंधा समेटना पड़ा। निर्माण व गारमेंट सेक्टर के बाद सबसे अधिक रोजगार एमएसएमई सेक्टर ही पैदा करता है। हालांकि जीएसटी कलेक्शन बढ़ने की स्थिति बनने के बाद ही इसमें नया रिफॉर्म देखने को मिलेगा। जनवरी में जीएसटी परिषद की होने वाली बैठक में सीमेंट व ऑटो कलपुर्जे में टैक्स कटौती का ऐलान संभव हे।

जीएसटी की तरह ही सरकार को प्रत्यक्ष कर प्रणाली में सुधार के लिए कदम उठाना चाहिए। डीटीसी को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है। देश प्रत्यक्ष कर में भी सुधार की जरूरत महसूस कर रहा है। 10 से 12 लाख तक सालाना आय व एक करोड़ तक उद्यम की आय को कर के दायरे से बाहर लाने के बारे में सोचना चाहिए। इससे अर्थव्यवस्था में और बूम आएगा।

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