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जयंतीलाल भंडारी का लेख: भारत आएंगी वैश्विक कंपनियां

निश्चित रूप से कोविड-19 के कारण दुनियाभर में चीन के प्रति बढ़ती नकारात्मकता के बीच भारत ने कोरोना से लड़ाई में सबके प्रति सहयोग पूर्ण रवैया अपना कर पूरी दुनिया में अपनी प्रतिष्ठा बढ़ाई है। ऐसे में भारत में वैश्विक निवेश, वैश्विक कारोबार और निर्यात बढ़ने की नई संभावनाएं उभरकर दिखाई दे रही हैं। चीन से बाहर निकलते निवेश और निर्यात के मौके भारत की ओर आने की संभावना के कई बुनियादी कारण भी चमकते हुए दिखाई दे रहे हैं।

जयंतीलाल भंडारी का लेख: भारत आएंगी वैश्विक कंपनियां

हाल ही में 11 मई को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के साथ विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्रियों की बैठक में प्रधानमंत्री ने चीन से निकलते हुए निवेश के देश के विभिन्न राज्यों की ओर आने की अपार संभावनाएं रेखांकित की। प्रधानमंत्री ने राज्यों से औद्योगिक गतिविधियों की राह आसान बनाने तथा श्रम कानूनों के सरलीकरण का आग्रह किया।

गौरतलब है कि इन दिनों अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और जापान के प्रधानमंत्री शिंजो आबे के साथ-साथ दुनिया के विकसित देशों के राष्ट्र प्रमुख चीन पर अपने देशों की कंपनियों की निर्भरता खत्म करने के अगुवा बन गए हैं। हाल ही में अमेरिका के विख्यात संगठन एडवोकेसी ग्रुप सहित कई वैश्विक संगठनों के द्वारा प्रकाशित रिपोर्टों में कहा गया है कि कई देशों की 1 हजार से अधिक दिग्गज कंपनियां चीन से अपना निवेश समेटकर भारत में मैन्युफैक्चरिंग करना चाहती हैं। खासतौर से जापान, अमेरिका, दक्षिण कोरिया और ब्रिटेन की कई कंपनियों भारत को प्राथमिकता देते हुए दिखाई दे रही हैं। ये चारों देश भारत के टॉप-10 ट्रेडिंग पार्टनर्स में शामिल हैं। 5 मई को ख्यात वैश्विक कंपनी ब्लूमबर्ग द्वारा प्रकाशित रिपोर्ट कहा गया है कि चीन से बाहर निकलती कंपनियों को आकर्षित करने के लिए भारत इन्हें बिना किसी परेशानी के जमीन मुहैया कराने पर काम कर रहा है। सरकार ने इन कंपनियों के कारखानों को स्थापित करने के लिए औद्योगिक क्षेत्रों में 4,61,589 हेक्टेयर जमीन की पहचान की है।

यह बात भी महत्वपूर्ण है कि भारत के वैश्विक मैन्युफैक्यरिंग हब बनने की नई संभावनाओं को साकार करने के लिए प्रधानमंत्री ने प्लग एंड प्ले मॉडल को साकार करने को शीघ्र रणनीतिक कदमों की आवश्यकता बताई है। इस परिप्रेक्ष्य में केंद्र सरकार के कुछ विभागों ने पहल शुरू भी कर दी है। उद्योग और वित्त मंत्रालय ने चीन से निवेश निकालकर अन्य देशों में ले जाने की कोशिश कर रही विदेशी कंपनियों से विशेष संपर्क भी शुरू किया है। इसी तरह पिछले दिनों केंद्र सरकार के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय ने एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल के साथ बैठक आयोजित की, जिसमें कोरोना वायरस का संकट खत्म होने के बाद भारत को पूरी दुनिया की सप्लाई चेन का प्रमुख हिस्सा बनाने की बेहतर संभावनाओं को मुठ्ठी में करने की योजना पर काम शुरू करने का निर्णय लिया गया।

वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय ने निवेशकों को आकर्षित करने के लिए प्रधानमंत्री मोदी के प्लग एंड प्ले मॉडल को साकार करने के मद्देनजर मोडिफाइड इंडस्ट्रियल इन्फ्रास्ट्रक्चर अपग्रेडेशन स्कीम में बदलाव करने तथा औद्योगिक उत्पादन के लिए विशेष आर्थिक क्षेत्र में गैर-उपयोगी खाली पड़ी जमीन का इस्तेमाल करने के संकेत दिए हैं।

निश्चित रूप से कोविड-19 के कारण दुनियाभर में चीन के प्रति बढ़ती नकारात्मकता के बीच भारत ने कोरोना से लड़ाई में सबके प्रति सहयोग पूर्ण रवैया अपना कर पूरी दुनिया में अपनी प्रतिष्ठा बढ़ाई है। ऐसे में भारत में वैश्विक निवेश, वैश्विक कारोबार और वैश्विक निर्यात बढ़ने की नई संभावनाएं उभरकर दिखाई दे रही हैं। चीन से बाहर निकलते निवेश और निर्यात के मौके भारत की ओर आने की संभावना के कई बुनियादी कारण भी चमकते हुए दिखाई दे रहे हैं।

कई आर्थिक मापदंडों पर भारत अभी भी चीन से आगे है। भारत दवा निर्माण, रसायन निर्माण और बायोटेक्नोलॉजी के क्षेत्रों में सबसे तेजी से उभरता हुआ देश भी है। भारत की श्रमशक्ति का एक सकारात्मक पक्ष यह है कि भारत में श्रम लागत चीन की तुलना में कम है। भारत के पास तकनीकी और पेशेवर प्रतिभाओं की भी कमी नहीं है। भारत के पास पैंतीस साल से कम उम्र की दुनिया की सबसे बड़ी जनसंख्या है। दुनिया में सबसे अधिक अंग्रेजी बोलने वाले वाले भी भारत में ही हैं, ये सब विशेषताएं भारत को चीन से निकलने वाले निवेश और कारोबार के मद्देनजर दूसरे देशों की तुलना में अधिक उपयुक्त दिखाई दे रही है।

यह भी उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आर्थिक सुधारों को तेजी से आगे बढ़ाया है। वाणिज्य-व्यापार के क्षेत्र में सुधार किए है, निर्यात बढ़ाने तथा करों एवं ब्याज दरों में बदलाव जैसे अनेक क्षेत्रों में रणनीतिक कदम उठाए हैं। ग्रामीण क्षेत्र में बुनियादी ढांचा विकसित करने का काम भी किया है। उत्पादकों और श्रमिकों के हितों को देखते हुए श्रम कानूनों में संशोधन किए गए हैं।

चूंकि इस समय दुनिया में दवाओं सहित कृषि, प्रोसेस्ड फूड, गारमेंट, जेम्स व ज्वैलरी, लेदर एवं लेदर प्रोडक्ट, कारपेट और इंजीनियरिंग प्रोडक्ट जैसी कई वस्तुओं के निर्यात की अच्छी संभावनाएं हैं, अत: ऐसे निर्यात क्षेत्रों के लिए सरकार के रणनीतिक प्रयत्न लाभप्रद होंगे। इसमें कोई दो मत नहीं है कि भारतीय फार्मा उद्योग पूरी दुनिया में अहमियत रखता है। भारत अकेला एक ऐसा देश है जिसके पास यूएसएफडीए के मानकों के अनुरूप अमेरिका से बाहर सबसे अधिक संख्या में दवा बनाने के प्लांट हैं।

एक ऐसे समय में जब कोरोना की वजह से भारत के लिए वैश्विक निवेश, वैश्विक निर्यात और दुनिया का नया कारखाना बनने की संभावनाओं रेखांकित हो रही हैं, तब इन संभावनाओं को साकार करने के लिए हमें कई बातों पर ध्यान देना होगा। शोध, नवाचार को बढ़ना होगा। अर्थव्यवस्था को डिजिटल करने की रफ्तार तेज करना होगी। सरकार को निर्यात प्रोत्साहन के लिए और अधिक कारगर कदम उठाने होंगे। मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की अहम भूमिका बनाई जानी होगी। बुनियादी संरचना में अकुशलता एवं भ्रष्टाचार पर नियंत्रण कर अपने प्रॉडक्ट की उत्पादन लागत कम करनी होगी। उद्योग-व्यवसाय में कौशल प्रशिक्षित युवाओं की मांग और आपूर्ति में लगातार बढ़ता अंतर दूर किया जाना होगा।

इन विभिन्न प्रयासों के साथ-साथ एक नया जोरदार प्रयास यह भी करना होगा कि जो कंपनियां चीन से अपने निवेश निकालकर अन्य देशों में जाना चाहती हैं उनको भारत में आमंत्रित करने के लिए अभियान तेज करना होगा। उद्योग और वित्त मंत्रालय के साथ तमाम देशों में मौजूद भारत के दूतावासों को भी समर्पित रूप से आगे आना होगा। नई प्रभावी और चमकीली विपणन रणनीति के माध्यम से भारत को निवेश और निर्यात की आकर्षक संभावनाओं वाले देश के रूप में प्रभावपूर्ण ढंग से पेश किया जाना होगा। साथ ही भारत आने वाली विदेशी कंपनियों के लिए कारगर तरीके से विशेष सुविधाएं भी जुटाई जानी होगी। हम उम्मीद करें कि कोविड-19 की वजह से चीन के प्रति बढ़ती हुई वैश्विक नकारात्मकता और दुनिया के देशों का भारत के प्रति बढ़ते हुए विश्वास के मद्देनजर भारत चीन से निकलते हुए विदेशी निवेश के उभरे हुए चमकीले मौकों का एक बड़ा भाग अपनी मुट्ठियों में करते हुए दिखाई दे सकेगा।

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