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जिम्मेदार सांसदों का गैरजिम्मेदार आचरण

शिवसेना के ग्यारह सांसदों ने एक मुस्लिम कर्मचारी को रोजे के दौरान रोटी खिलाने की कोशिश की।

जिम्मेदार सांसदों का गैरजिम्मेदार आचरण
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शिवसेना के ग्यारह सांसदों पर महाराष्ट्र सदन की कथित खराब सेवाओं के विरोध में हंगामा करने और एक मुस्लिम कर्मचारी को रोजे के दौरान जबरदस्ती रोटी खिलाने का आरोप लगा है। हालांकि इन सांसदों ने इस आरोप को आंशिक तौर पर गलत बताया है। वहीं शिवसेना की तरफ से कहा जा रहा है कि उन्हें मालूूम नहीं था कि वह कर्मचारी मुस्लिम है और उनका मकसद उसके रोजेदारी को भंग करने का नहीं था बल्कि वहां के खाने की क्वालिटी को लेकर उनमें रोष था, लेकिन खबरें ये भी आ रही हैं कि उस कर्मचारी की वर्दी पर उसके नाम की नेमप्लेट लगी थी। इन दिनों रमजान का पवित्र महीना चल रहा है।ऐसे समय में सांसदों की जिम्मेदारी बनती थी कि उनके कृत्य से किसी की भावनाओं को ठेस न पहुंचे। अगर महाराष्ट्र सदन में सांसदों को दी जा रही सेवा अच्छी नहीं थी तो वे कैंटीन के कर्मचारियों को डरा-धमका कर या उनकी हैसियत बताकर इस असुविधाजनक स्थिति को दुरुस्त करने की बजाय इसकी शिकायत उचित प्लेटफॉर्म पर दर्ज करवा सकते थे। परंतु उनका यह व्यवहार दुर्भाग्यपूर्ण है। शिवसेना सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी की सबसे पुरानी सहयोगी पार्टी है, लेकिन उसके इस तरह के आचरणों से भारतीय जनता पार्टी को अकसर शर्मिंदा होना पड़ता है, असहज स्थितियों का सामना करना पड़ता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुरू से ही अपनी पार्टी के सांसदों और साथ ही सहयोगी दलों के सांसदों को भी यह संदेश देने का प्रयास करते रहे हैं कि वे सदन के अंदर और बाहर जिम्मेदाराना, मर्यादित, गरिमापूर्ण और अनुशासित व्यवहार करें, ताकि विरोधी दल ये आरोप न लगा सकें कि सत्ता और शक्ति का वे बेजा इस्तेमाल कर रहे हैं। खासतौर से सत्तारूढ़ दल तथा इसके सहयोगियों की जिम्मेदारी बनती है कि वे संयमित व्यवहार करें और देश के समक्ष एक श्रेष्ठ उदाहरण पेश करें। दुर्भाग्य से राष्टीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के कुछ सहयोगी दल इन हिदायतों के विपरीत आचरण करते हुए दिखाई दे रहे हैं। वहीं भारतीय जनता पार्टी के भी कुछ सदस्य यदा-कदा इसी तरह के आचरण का प्रदर्शन करते हुए दिख रहे हैं। बुधवार को लोकसभा में इसके एक सदस्य ने जिस तरह से दूसरे दल के एक सदस्य को पाकिस्तान चले जाने की सलाह दी, इससे उन्होंने सदन की गरिमा को नीचे गिराने का काम किया। उनके इस व्यवहार से सरकार को शर्मिंदगी झेलनी पड़ी। यदि भारतीय जनता पार्टी के सदस्य अपनी गलती की माफी नहीं मांगते तो उन्हें मुश्किल स्थितियों का सामना करना पड़ सकता था। जाहिर है, इसी तरह की कार्रवाइयों से नेताओं की बदतर होती छवि जनता के बीच और भी दागदार होती जा रही है। इस पर समय रहते रोक लगाई जानी चाहिए। महाराष्टÑ सदन में जो कुछ हुआ है वह बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है। जिस तरह से शिवसेना अपने सांसदों के कृत्य का बचाव करते हुए दिखाई दे रही है वह और भी दुर्भाग्यपूर्ण है। वहीं विरोधी दलों के सदस्य संसद के भीतर और बाहर इस प्रकरण पर जिस तरह से राजनीतिक रोटियां सेंकने का काम कर रहे हैं वह और भी अफसोसजनक है। यह नाजुक व संवेदनशील मामला है। इस तरह के मसलों पर राजनीति से परहेज किया जाना चाहिए।
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