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सानिया मिर्जा और मार्टिना ने रचा नया इतिहास

सानिया को शीर्ष की ओर ले जाने में उनकी पारिवारिक पृष्ठभूमि का महत्वपूर्ण योगदान है।

सानिया मिर्जा और मार्टिना ने रचा नया इतिहास
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भारत में टेनिस को नई ऊंचाई देने वाली सानिया मिर्जा स्विट्जरलैंड की अपनी जोड़ीदार मार्टिना हिंगिस के साथ मिलकर इतिहास रचती जा रही हैं। इस जोड़ी ने अपना विजयी अभियान जारी रखते हुए शनिवार को बीजिंग में खेले गए चाइना ओपन टूर्नामेंट का महिला युगल खिताब भी जीत लिया। इस जोड़ी का इस साल यह आठवां और लगातार चौथा खिताब है। इससे पहले यह जोड़ी इस वर्ष दो ग्रैंड स्लैम विंबलडन व यूएस ओपन सहित इंडियन वेल्स, मियामी ओपन, चाल्र्सटन, ग्वांगझोऊ और वुहान ओपन खिताब अपने नाम कर चुकी है। इस साल मार्च में इस जोड़ी ने साथ खेलना आरंभ किया था। अभी यह जोड़ी दुनिया की नंबर वन महिला युगल जोड़ी है। इतने कम समय में इतनी अधिक सफलता बताती हैकि दोनों में बढ़िया तालमेल है। इन्होंने अपने खेल से दिखा दिया है कि इन्हें शीर्ष स्थान महज संयोग से नहीं मिला है बल्कि अपनी प्रतिभा के दम पर यह मुकाम हासिल किया है। सानिया और मार्टिना आज जिस ऊंचाई पर पहुंची हैं उसमें उनकी अथक मेहनत और एकाग्रता का अहम योगदान है। आम तौर पर लोगों को किसी खिलाड़ी की सफलता ही ज्यादा दिखाई देती है, लेकिन उसके पीछे उसकी कितनी मेहनत, त्याग और संघर्ष छिपा होता है, वह नहीं दिखता है। सानिया मिर्जा की बात करें तो उनमें टेनिस के प्रति खास जुनून ही उन्हें औरों से अलग करता है। उनमें खेल के प्रति गजब का सर्मपण और संघर्ष करने की क्षमता है। वे युगल रैंकिंग में दुनिया की नंबर एक महिला खिलाड़ी बनने वाली भारत की पहली खिलाड़ी हैं। वे विंबलडन में महिलाओं का युगल खिताब जीतने वाली देश की पहली खिलाड़ी भी हैं। अभी तक किसी पुरुष खिलाड़ी ने भी विंबलडन में ऐसा कारनामा नहीं किया है। वे अपने करियर में ढ़ाई दर्जन खिताब अपने नाम कर चुकी हैं जिसमें ऑस्ट्रेलियन ओपन, फ्रेंच ओपन जैसे बड़े खिताब भी शामिल हैं। सानिया मिर्जा का बचपन हैदराबाद में गुजरा है। निजाम क्लब हैदराबाद में उन्होंने छह साल की उम्र से टेनिस खेलना शुरू किया था। सानिया को शीर्ष की ओर ले जाने में उनकी पारिवारिक पृष्ठभूमि का महत्वपूर्ण योगदान है। वर्ष 2005 में प्रतिष्ठित टाइम पत्रिका द्वारा सानिया को एशिया के 50 नायकों में नामित किया गया था। वहीं 2010 में एक मशहूर अखबार ने उन्हें भारत की गौरवान्वित 33 महिलाओं की सूची में नामित किया था। सानिया जब 14 वर्ष की भी नहीं थीं तब उन्होंने पहला आईटीएफ जूनियर टूर्नामेंट खेला था। बेहतर खेल के लिए उन्हें अर्जुन पुरस्कार और पद्मर्शी सम्मान दिया गया है। इसके अलावा इसी साल उन्हें राजीव गांधी खेल रत्न से नवाजा गया है। हालांकि व्यक्तिगत जीवन में सानिया का विवादों से भी गहरा नाता रहा है, लेकिन उन्होंने इसकी परवाह किए बगैर खेल पर ध्यान केंद्रित रखा और कई कीर्तिमान अपने नाम किए। देश को उनसे और भी उम्मीदें हैं। पूरे देश की ओर से इसके लिए उन्हें शुभकामनाएं। जाहिर है, खेलों में भारतीय महिला का शिखर पर पहुंचना देश के लिए गौरव की बात है।
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