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चिंतनः कथनी-करनी में एका कब लाएंगे शरीफ

पाकिस्तान के शीर्ष नेतृत्व की कथनी-करनी में अंतर को देखते हुए यह कहना कठिन है कि वे अपने नए बयान पर कब तक टिके रहेंगे।

चिंतनः कथनी-करनी में एका कब लाएंगे शरीफ
माल्टा की राजधानी वालेटा में कॉमनवेल्थ देशों के सम्मेलन में हिस्सा लेने गए पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने ब्रिटेन के प्रधानमंत्री डेविड कैमरन के साथ बातचीत में कहा है कि वे स्थायी शांति के लिए भारत से बिना शर्त वार्ता के लिए तैयार हैं।
पाकिस्तान के शीर्ष नेतृत्व की कथनी-करनी में अंतर को देखते हुए यह कहना कठिन है कि वे अपने नए बयान पर कब तक टिके रहेंगे। पूर्व में वहां की चुनी हुई सरकारों ने भारत से रिश्ते सुधारने के लिए कई वादे किए, लेकिन जब उनको अमलीजामा पहनाने की नौबत आई तब वे अपने कहे से स्वयं मुकरते गए या भारत को उकसाने वाला ऐसा कोई कदम उठाते रहे जिससे वार्ता प्रक्रिया पटरी से उतर गई। बहुत पीछे नहीं जाकर, गत वर्ष भारत में नई सरकार बनने के बाद के घटनाक्रमों पर ही नजर दौड़ाएं तो पाकिस्तान का दोमुंहापन उजागर हो जाता है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने शपथग्रहण समारोह में नवाज शरीफ को आमंत्रित कर रिश्तों पर जमी बर्फ पिघलाने की कोशिश की थी, लेकिन उसके कुछ ही दिनों बाद पाकिस्तान ने कश्मीरी अलगाववादियों को महत्व देकर उस पर पानी फेर दिया था। कड़वाहट को दूर करने के लिए इस साल जुलाई में भी रूस के शहर उफा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनसे मुलाकात की थी जिसके बाद दोनों देशों में कश्मीर मुद्दे को परे रख आतंकवाद पर विभिन्न स्तरों पर वार्ता शुरू करने पर सहमति बनी थी, लेकिन शरीफ पाकिस्तान लौटने के बाद उफा में जाहिर किए अपने रुख से न सिर्फ पलट गए, बल्कि वार्ता में कश्मीर मुद्दे को शामिल करने की शर्त भी लगा दी।
यही नहीं सितंबर में संयुक्त राष्ट्र को संबोधित करने के दौरान उन्होंने वार्ता के लिए चार और शर्तें थोप दी थीं, जिसके बाद भारत-पाक राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार स्तर की वार्ता रद हो गई। इस कदम से दुनिया में न सिर्फ पाकिस्तान की किरकिरी हुई, बल्कि आतंकवाद पर वह एक्सपोज भी हो गया, क्योंकि यह वार्ता भारत में घुसपैठ और आतंकवाद पर होनी थी। उसी बीच पंजाब के गुरदासपुर और जम्मू-कश्मीर के उधमपुर में हुए आतंकवादी हमलों में कुछ ऐसे सबूत मिले जो साफ कह रहे थे कि वे आतकंवादी पाकिस्तान से आए थे।
दो जिंदा आतंकवादी सुरक्षा बलों के हाथ लगे जिसके बाद उसकी पोल खुल गई है। सत्ता में आने के बाद से ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दुनियाभर में घूमकर आतंकवाद को मुद्दा बना रहे हैं, जिसका सभी देश सर्मथन कर रहे हैं। गत माह नवाज शरीफ अमेरिकी यात्रा पर थे तब राष्ट्रपति बराक ओबामा ने उनसे दो टूक कहा कि आतंकवाद पर भारत की चिंताओं का समाधान करें। दरअसल, पाक वर्षों से कहता आ रहा है कि वह अपनी जमीन का इस्तेमाल भारत के खिलाफ नहीं होने देगा, लेकिन अब भी वहां सेना व सरकार की जानकारी में दर्जनों आतंकी संगठन सक्रिय हैं, जिनका मकसद भारत में हिंसा फैलाना है।
पाक सेना जब ना तब उनकी घुसपैठ कराती है, जिससे सीमा पर टकराव की हालत बनी रहती है। सीजफायर का उल्लंघन भी इसी की देन है। जाहिर है, इससे पाक दबाव में है। परिणामस्वरूप वह हाफिज सईद को आतंकवादी मानने पर मजबूर हुआ है। अब देखने वाली बात यह होगी कि नवाज शरीफ पाकिस्तान लौटने के बाद माल्टा में दिए अपने बयान पर कायम रहते हैं या कट्टरपंथियों व सेना के दबाव में पलट जाते हैं।
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