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नई उम्मीदों के साथ नव वर्ष का सु-स्वागतम्, भारत करेगा विकास

देश की राजनीति ने करवट बदली और तीन दशक बाद नरेंद्र मोदी की अगुआई में भाजपा की पूर्ण बहुमत वाली सरकार बनी।

नई उम्मीदों के साथ नव वर्ष का सु-स्वागतम्, भारत करेगा विकास

साल 2014 बीत गया और हम 2015 में प्रवेश कर चुके हैं। एक तरफ अतीत है तो दूसरी ओर सुनहरा भविष्य हमारा इंतजार कर रहा है। लिहाजा हम वर्तमान में खड़े होकर आने वाले वक्त को सुखद और आशातीत होने की उम्मीद कर सकते हैं। दरअसल, भविष्य हमारे वर्तमान और अतीत दोनों पर निर्भर करता है। भूत हमारी स्मृतियों को ताजा करता है। हम उससे सबक लेते हुए वर्तमान में किए कार्यों के आधार पर ही एक बेहतर कल के निर्माण की कोशिश करते हैं।

बीता साल नई उम्मीदों और कुछ अनुत्तरित प्रश्नों को छोड़ कर चला गया। निश्चित रूप से उन मुद्दों पर देश की नजर रहेगी जिनकी जड़ें खत्म हुए साल से जुड़ी हैं। गुजरे साल में देश में आम चुनाव हुए, जिसमें ऐतिहासिक नतीजे सामने आए। देश की राजनीति ने करवट बदली और तीन दशक बाद नरेंद्र मोदी की अगुआई में भाजपा की पूर्ण बहुमत वाली सरकार बनी। सवा सौ पुरानी कांग्रेस सहित कई क्षेत्रीय दलों को जनता ने सिरे से नकार दिया जिससे वे हाशिए पर पहुंच गए हैं।

प्रधानमंत्री मोदी देश ही नहीं दुनिया में भी लोकप्रिय नेता के रूप में सामने आए हैं। हरियाणा, महाराष्ट्र , झारखंड और जम्मू कश्मीर में मोदी के जादू का ही असर था कि भाजपा सरकार बनाने की स्थिति में पहुंच गई। निश्चित रूप से देश में आए इस युगांतरकारी राजनीतिक बदलाव का असर इस साल देखने को मिलेगा। वहीं राहुल गांधी को भी जनता ने खारिज दिया। हालांकि इस साल अरविंद केजरीवाल पर सभी की निगाहें रहेंगी। अंतरिक्ष के क्षेत्र में भारत को बहुत बड़ी कामयाबी मिली जब इसरो ने पहले ही प्रयास में मंगलयान को मंगल की कक्षा में उतार दिया। वहीं साल के अंत में इसरो ने अंतरिक्ष में मानव भेजने का परीक्षण भी पूरा कर लिया। सामरिक क्षेत्र में भारत ने स्वदेशी तकनीक से पनडुब्बी, युद्धपोत व हल्के हेलीकॉप्टर बनाकर अपनी ताकत का प्रदर्शन किया। अर्थव्यवस्था भी पटरी पर लौट आई है। कई सालों से चरम पर रही महंगाई शून्य पर पहुंच गई है। अब इस साल मेक इन इंडिया, स्वच्छ भारत मिशन व जनधन योजना पर सबकी निगाहें होंगी।

योजना आयोग के जगह बन रही नई संस्था के स्वरूप से भी बड़ा बदलाव आएगा। बीमा व रक्षा क्षेत्र में विदेशी निवेश की अनुमति तभा भूमि अधिग्रहण कानून में संशोधन का हश्र भी देश देखना चाहेगा। इस प्रकार बीते वर्ष राजनीति, अर्थव्यवस्था, समाज, न्याय, सुरक्षा और विदेश नीति के मोर्चे पर देश को सफलता मिली है, परंतु अभी इस क्षेत्र में चुनौतियां भी काफी हैं, उनसे पार पाने का प्रश्न नये नेतृत्व के समक्ष होगा। वहीं अंतरराष्ट्रीय जगत में कच्चे तेल की गिरती कीमत ने भारत सहित पुरी दुनिया को प्रभावित किया है, तो पश्चिम एशिया में आईएसआईएस आतंकी संगठन के उभार ने विश्व को चिंता में डाल दिया है। हालांकि आधी आबादी की सुरक्षा, हक और उनको पर्याप्त सम्मान का सवाल अभी भी बरकरार है।

अब इन तमाम सवालों का जवाब 2015 देगा। और उसके आधार पर भविष्य का निर्माण होगा। 2014 ने जाते-जाते ऐसे संकेत दे दिए हैं कि 2015 कैसा रहेगा। लोगों में नई उम्मीद और आशा का संचार हुआ है। अब उनकी सोच और फैसलों में एक परिपक्वता दिख रही है। खासकर युवा सोच समझकर फैसले लेते दिख रहे हैं। इसी उम्मीद के साथ कि आने वाला साल अच्छा रहेगा, हमें उसका सु-स्वागत करना चाहिए।

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