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यूएन के मंच से वसुधैव कुटुंबकम का संदेश

उसकी नीतियां ने बहुत हद तक इसे बढ़ाने का काम किया है। वहीं अभी पाकिस्तान जैसे कुछ देश आतंकवाद को खुले रूप में बढ़ावा दे रहे हैं।

यूएन के मंच से वसुधैव कुटुंबकम का संदेश
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संयुक्त राष्ट्र महासभा के 69वें अधिवेशन में शनिवार को हिंदी में दिए अपने भाषण में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दुनिया को भारतीय दर्शन परंपरा वसुधैव कुटुंबकम से परिचय कराने के साथ ही आतंकवाद के खतरे, बढ़ती अशांति, गरीबी और अप्रभावी होते संयुक्त राष्ट्र (यूएन) जैसी संस्था में समय रहते बदलाव की ओर ध्यान दिलाया। इससे पहले पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने भी महासभा को हिंदी में संबोधित किया था। मोदी ने पाकिस्तान को भी स्पष्ट शब्दों में कह दिया कि हमारी नीति पड़ोसी देशों से दोस्ती करने की है। भारत पाकिस्तान के साथ शांतिपूर्ण वातावरण में बिना आतंक के साए में द्विपक्षीय वार्ता करना चाहता है। भारत हमेशा से अपने पड़ोसी देशों से मैत्रीपूर्ण रिश्ते रखने का हिमायती रहा है, परंतु पाकिस्तान इसे भारत की कमजोरी समझता रहा है। ऐसे में प्रधानमंत्री मोदी ने सहज शब्दों में यह समझाने का प्रयास किया किकश्मीर के मुद्दे को यूएन में उठाने से पाक को कुछ नहीं मिलेगा। बेहतर होगा कि वह द्विपक्षीय वार्ताके लिए उपर्युक्त माहौल बनाए। विश्व जगत के सामने आज आतंकवाद के रूप में बड़ी गंभीर चुनौती खड़ी है। दरअसल, यह एक कानून व्यवस्था का मसला नहीं है, इसके पीछे विचारधारा है। यह नीत नए रूप में फन उठा रहा है। आईएसआईएस का उदाहरण हमारे सामने है। भारत भी कई दशकों से इसका भुक्तभोगी रहा है। लिहाजा, इसके खिलाफ लड़ना सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।। अमेरिका, जब स्वयं के हितों को ठेस पहुंचता है तो बड़ी कार्रवाई करता है, परंतु जहां उसके हित नहीं हैं, वहां वह चुप रहता है। उसकी नीतियां ने बहुत हद तक इसे बढ़ाने का काम किया है। वहीं अभी पाकिस्तान जैसे कुछ देश आतंकवाद को खुले रूप में बढ़ावा दे रहे हैं। ऐसे में प्रधानमंत्री मोदी का यह कहना कि सभी देशों को अपने मतभेदों को भुलाकर इससे लड़ना होगा, काफी अहम है। इस महत्वपूर्ण मौके पर नरेंद्र मोदी संयुक्त राष्ट्र को आईना दिखाने से भी नहीं चुके। आज संयुक्त राष्ट्र जैसे महत्वपूर्ण संस्था की अहमियत कम होती जा रही है। इसे प्रासंगिक बनाए रखने के लिए इसमें सुधार करने की नितांत जरूरत है। प्रधानमंत्री मोदी ने ठीक कहा कि 20वीं सदी में बनी संस्था 21वीं सदी में बदली हुई जरूरतों को पूरा नहीं कर सकती। लिहाजा इसकी संरचना में बदलाव की जरूरत है। हाल के दिनों में कई वैश्विक मुद्दों पर यह पंगु नजर आया। अमेरिका आदि कुछ देशों ने अपने हितों के आगे इसकी एक न चलने दी है। ऐसा नहीं होता तो संयुक्त राष्ट्र जैसी संस्था होने के बावजूद दुनिया में इतने सारे संगठन नहीं बनते। यही वजह है कि मोदी को यह कहना पड़ा कि वैश्विक स्तर पर इतनी गुटबाजी हुई है कि दुनिया जी-4, जी-7 व जी-20 जैसे संगठनों में बंट गई है। ऐसे में आज संयुक्त राष्ट्र को आत्म अवलोकन की जरूरत है कि क्या वह अपने उद्देश्यों में सफल हो पाया है? उन्होंने जी-ऑल बना कर सभी 193 सदस्य देशों को एक परिवार की तरह रहने पर जोर दिया। जाहिर है, दुनिया बंधुत्व की भावना को आत्मसात करके ही शांति के मार्ग पर आगे बढ़ सकती है। प्रकृति से हमारा जुड़ाव हो सके इसके लिए उन्होंने अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाने का सुझाव दिया। कुल मिलाकर, नरेंद्र मोदी ने यह बताने की कोशिश की कि भारतीय दर्शन परंपरा को अपनाकर ही दुनिया में शांति, एकता और भाईचारा लाया जा सकता है।

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